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जब सरदार पटेल की मां उन पर एक आंदोलन के बाद हो गईं थीं नाराज, क्या थी वजह

जब सरदार पटेल की मां उन पर एक आंदोलन के बाद हो गईं थीं नाराज, क्या थी वजह

सरदार पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) अपनी मां की बातों का आमतौर पर कोई जवाब नहीं देते थे. चुप ही रहते थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

सरदार पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) अपनी मां की बातों का आमतौर पर कोई जवाब नहीं देते थे. चुप ही रहते थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

Sardar Vallabh Bhai Patel Mother : 1924 ब्रिटिश राज के कुछ अन्यायपूर्ण कानून गुजरात के बोरसद इलाके में लागू किए जाने के विरोध में सरदार वल्लभभाई पटेल ने सफल आंदोलन किया और उन्होंने अंग्रेज अफसरों को झुकाया भी. इस आंदोलन के बाद वो अपने पैतृक गांव जब मां के पास गए तो वो उन्हें नाराज मिलीं. आखिर किस बात पर था उनका गुस्सा. गुस्से में उन्होंने सरदार पटेल को क्या कहा

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वर्ष 1924 में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने गुजरात के बोरसद में एक सत्याग्रह किया था. इसमें ब्रिटिश राज कुछ जातियों को आपराधिक जाति मानने और अक्सर उन्हें किसी भी मामले में संदिग्ध मानकर जेल में बंद कर दिया जाता था लेकिन तब अति हो गई जब स्थानीय अंग्रेज प्रशासन ने पूरे इलाके पर इसलिए लगान बढ़ा दिया, क्योंकि अंग्रेजों का आरोप था कि स्थानीय लोग डाकुओं से मिले हुए हैं. सरदार पटेल ने इलाके के लोगों के साथ मिलकर इसका जबाव दिया. फिर अंग्रेजों को ये कानून वापस लेना पड़ा. इसके बाद जब वो अपनी मां से मिलने गए तो वो उन पर नाराज थीं.

सरदार पटेल की मां का नाम लाड़ बा था. वो सक्रिय महिला थीं. इस उम्र में भी उनकी यादाश्त और कामकाज गजब का था. हालांकि अब उनकी उम्र 77 साल हो रही थी. उस समय उनके बेटे वल्लभ भाई पटेल 48 साल के थे. वो अपने मां-बाप की चौथी संतान थे. हालांकि लाड़ बा का एक और बेटा आजादी की लड़ाई में कूदा हुआ था. उनका नाम विट्ठल भाई पटेल था. लेकिन विट्ठल का अपने घर और पैतृक गांव से कम ही संपर्क रहता था. ये वल्लभ ही था, जो लगातार अपने घर के लोगों और गांववालों के सपर्क में रहते थे.

गांधीजी के प्रभाव में आराम की जिंदगी छोड़ी
राजमोहन गांधी की किताब “पटेल ए लाइफ” में सरदार पटेल की पूरी जिंदगी की कहानी काफी गंभीर रिसर्च के बाद लिखी गई है. जिसमें उनके सारे पक्षों को समेटने की कोशिश हुई है. वल्लभ भाई पटेल विलायत से बैरिस्टरी की पढ़ाई करके आए थे लेकिन गांधीजी के साथ आने के बाद उन्होंने आराम की जिंदगी और पेशा दोनों लगभग छोड़ दिया था. गुजरात के लिए तो वो हीरो बन चुके थे.

सरदार पटेल अपने भाइयों, पिता और मां लाड़ बा के साथ. 1927 में खींची गई इस फोटो में सरदार वल्लभभाई पटेल एकदम दाएं बैठे हुए हैं. (फाइल फोटो)

सरदार पटेल की मां ने 74 की उम्र में चरखा कातना सीखा
सरदार पटेल के गांधीजी के साथ जाने के बाद ही 74 साल की उम्र में लाड़ बा ने चरखा कातना सीखा था. वो चरखे पर सूत कातती थीं और खुद भी खादी का कपड़ा पहनती थीं. जब आंदोलन के बाद पटेल अपनी मां से मिलने पैतृक गांव करमसद गए तो मां उन्हें नाराज लगीं.

आते ही क्या कहना शुरू किया
उन्होंने पटेल के आते ही उनकी बेटी मणिबेन की शादी की बात शुरू की. उस जमाने में जिस उम्र में लड़कियों की शादी होती थी, मणिबेन की उम्र उससे अधिक हो चुकी थी. विद्यापीठ में वो वह गुजराती साहित्य, बंगाली और अंग्रेजी की पढ़ाई कर रही थीं. उनकी उम्र 20 साल होने वाली थी. जब मां ने उनसे पोती की शादी की बात की तो बेटे ने जवाब दिया, “जो होना है होगा”.

तब नाराज हो गईं लाड़ बा
तब लाड़ बा ने थोड़ी क्षुब्धता के साथ कहा, मुझे लगता है कि ईश्वर ने मुझे केवल मणि का विवाह देखने के लिए ही जिंदा रखा है. वल्लभभाई  इस बात पर चुप रहे. उन्होंने अब तक मणि से ना तो उसके विवाह के बारे में पूछा था और ना ही उसकी कोशिश की थी. ना उसके लिए कोई योग्य वर ही अब तक तलाशा था.

सरदार वल्लभ भाई पटेल अपनी बेटी मणिबेन के साथ. पटेल की मां चाहती थीं कि उनकी पोती की अब जल्दी से जल्दी शादी कर दी जाए.हालांकि वो शादी कभी नहीं हो पाई. (File Photo)

सरदार पटेल के दोनों बच्चे गांधीजी के आश्रम में रहते थे. वो उनका ख्याल रखते थे. दोनों भाई-बहन अपने भविष्य के बारे में पिता की तुलना में गांधीजी से ज्यादा बात किया करते थे.

बढ़ रहा था मां का गुस्सा
उस दिन मां ने ये चर्चा छोड़ी नहीं. कहां तो सरदार पटेल अंग्रेज सरकार की हर बात का मुंहतोड़ जवाब देते थे, कहां वो मां के सामने चुप्पी लगाए हुए थे. ये बात उनके मां के गुस्से को और बढ़ा रही थी. जब जाने लगे तो लाड़ बा ने फिर मणि की सगाई की ध्यान रखने की सलाह दी. वल्लभ ने तब मां से कहा कि बार-बार यही बात कहकर वो उन्हें क्यों तंग कर रही हैं.

आचार्य जेबी कृपलानी के साथ सरदार पटेल और उनकी बेटी मणिबेन (फाइल फोटो)

तब उन्होंने सरदार पटेल से कही ये कठोर बात
उनके इस जवाब ने लाड़ बा को ज्यादा रुष्ट कर दिया. उन्होंने कठोर शब्दों में कहा, ठीक कहते हो, जिस बाप ये नहीं पता कि उसके बच्चे क्या पढ़ रहे हैं तो वह जवाईं कहां से ढूंढेगा.

मां की नाराजगी को सरदार पटेल दूर नहीं कर सके. वो जब मुंबई आए तो उन्होंने वहां से बेटे और बेटी को पत्र लिखकर ये जरूर कहा कि अगर उन्हें किसी भी तरह की जरूरत हो तो उनके मित्रों को बता दें. उनकी उस बात की तुरंत व्यवस्था की जाएगी.

Tags: Sardar patel, Sardar Vallabhbhai Patel

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