क्यों मकाऊ चीन के लिए पोस्टर-बॉय बना हुआ है?

क्यों मकाऊ चीन के लिए पोस्टर-बॉय बना हुआ है?
मकाऊ ने अपने पर चीन के वर्चस्व का हमेशा समर्थन किया- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

चीन के कब्जे में जी रहे मकाऊ (Macau) ने कभी भी खुद को अलग करने की कोशिश नहीं की, बल्कि लगातार अपनी वफादारी साबित करता रहा.

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हांगकांग में विरोध के बाद भी चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर दिया. इसके बाद से हांगकांग के नागरिकों के पक्ष में दुनिया के कई देश सामने आए हैं. वे मानते हैं कि चीन का विवादित कानून हांगकांग के लोगों के मानवाधिकारों का हनन है. समर्थन में आए देशों में से एक ब्रिटेन ने हांगकांग के लाखों लोगों को अपने यहां नागरिकता तक की पेशकश कर दी. वहीं चीन के कब्जे में जी रहे एक और देश मकाऊ के बारे में कोई बात नहीं होती है. खुद मकाऊ ने भी चीन की नीतियों का खुलकर विरोध नहीं किया. बता दें कि चीन ने जो पॉलिसी अब हांगकांग में लगाई है, वो साल 2009 में मकाऊ में लागू हो चुकी है.

क्या है इस देश में
मकाऊ चीन के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के तहत आता है. पहले चीन ने इसे पुर्तगाल को लीज पर दिया हुआ था. साल 1999 में लंबी बातचीत के बाद पुर्तगाल ने इसे चीन को वापस लौटा दिया. इसके बाद से मकाऊ चीन के प्रशासन के तहत आता है. हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस देश को पोस्टर-बॉय की तरह प्रचारित भी किया ताकि हांगकांग में सुरक्षा कानून लागू करने में दिक्कत न हो और विरोध कर रहे लोगों को लगे कि चीन के तहत जाना काफी फायदेमंद है. यहां तक कि जिनपिंग ने मकाऊ को देशभक्त कहते हुए हांगकांग को उससे सीखने की बात कही.

मकाऊ के चीन का साथ देने की एक वजह ये भी है कि ये अपने-आप में काफी छोटा देश है - सांकेतिक फोटो (Photo-सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

क्या है अलग


हांगकांग से सिर्फ 65 किलोमीटर की दूरी पर होने के बाद और चीन का दोनों पर कब्जा करने के बाद भी क्या वजह है कि मकाऊ ने इसका कोई विरोध नहीं किया? इसकी बड़ी वजह यहां का कमजोर नेतृत्व है. मकाऊ ने दिसंबर 1999 में चीन के तहत आने का तो विरोध नहीं ही किया, साथ ही हांगकांग के विरोध पर भी चुप्पी साधे रखी. यहां तक कि मकाऊ ने शीर्ष नेता Ho Iat Seng ने हांगकांग पर चीन की नई पॉलिसी का समर्थन तक कर दिया.

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
यही हाल वहां के आम लोगों का है. इस बारे में डीडब्ल्यू से बात करते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ मकाऊ के प्रोफेसर किन सुन चान कहते हैं कि यहां के लोग हांगकांग के प्रदर्शनकारियों के साथ नहीं, बल्कि चीन के साथ हैं. मकाऊ के चीन का साथ देने की एक वजह ये भी है कि ये अपने-आप में काफी छोटा देश है और मेनलैंड चीन पर काफी हद तक निर्भर है. खासकर दूसरे देशों से कूटनीतिक और सामरिक महत्व के लिए ये चीन पर ही निर्भर है.

आधिकारिक तौर पर वापस मिलने से पहले से ही मकाऊ पर चीन का कब्जा होने लगा था- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


हांगकांग vs मकाऊ
एक ही सरकार के एक ही प्रिंसिपल के तहत आने पर भी हांगकांग और मकाऊ में काफी अंतर है. मकाऊ की जनसंख्या 623,000 है, वहीं हांगकांग की आबादी 7.4 मिलियन है. मकाऊ के आधे से ज्यादा आबादी की जन्म मेनलैंड चीन में हुआ है, जबकि हांगकांग की केवल 20% आबादी के साथ ऐसा है. यही वजह है कि मकाऊ के लोग खुद को चीन का मान पाते हैं.

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अर्थव्यवस्था अलग-अलग
एक बड़ा फर्क अर्थव्यवस्था के साथ भी है. छोटा होने के कारण मकाऊ की इकनॉमी चीन पर काफी हद तक निर्भर है. जुएं और मनोरंजन के लिए ख्यात मकाऊ में आने वाले ज्यादातर सैलानी चीन से आते हैं. साल 2018 में यहां 70% चीनी पर्यटक ही आए. दूसरी तरफ हांगकांग में पश्चिमी देशों से आर्थिक संबंध हैं और चीन के तहत आना उनसे कट जाना होगा. पहचान छिनने के साथ-साथ आर्थिक पक्ष भी विरोध की वजह है.

जुएं और मनोरंजन के लिए ख्यात मकाऊ में आने वाले ज्यादातर सैलानी चीन से आते हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


दोनों देशों का इतिहास भी अलग
हांगकांग पर डेढ़ सौ सालों तक ब्रिटेन का राज रहा, जिसके बाद साल 1997 में ये चीन को दिया गया. वहीं मकाऊ पर साल 1557 से पुर्तगाल ने राज किया और साल 1999 में चीन को सौंपा गया. हांगकांग छोटी अवधि में भी चूंकि ब्रिटेन के संपर्क में रहा, इसलिए उसे खुद को किसी भी दूसरे और खासकर चीन से सुपीरियर देखना सिखाया गया. ब्रिटेन का हिस्सा रहने के दौरान हांगकांग को बोलने की आजादी मिली. दूसरी ओर मकाऊ में पुर्तगाली काफी हद तक खुद चीन के असर में रहे. यहां तक कि चीन को आधिकारिक तौर पर वापस मिलने से पहले से ही मकाऊ पर चीन का कब्जा होने लगा था.

मकाऊ में चीन को लेकर इतना डर है कि वहां उन लोगों के खिलाफ एक्शन लिया जाता है जो हांगकांग के पक्ष में बात करते दिखें. साल 2019 में मकाऊ के सिक्योरिटी सेक्रेटरी ने घोषणा कर दी कि अगर कोई छात्र या कोई भी समूह हांगकांग के पक्ष में बैनर-पोस्टर उठाए या बोलता दिखे तो गैरकानूनी माना जाएगा और कार्रवाई होगी.
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