आप लेफ्टी होंगे या राइटी, क्या ये जन्म से पहले ही तय हो जाता है

अगर कोई लेफ्ट हैंडर है तो आमतौर पर बचपन में उसे कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

अगर कोई लेफ्ट हैंडर है तो आमतौर पर बचपन में उसे कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

बहुत लंबे समय तक लेफ्ट हैंडेड लोगों को बाएं हाथ से काम करने वाले लोगों के साथ अपशगुन जुड़ा रहा. अंधविश्वासों में इसे अच्छा नहीं माना जाता था लेकिन बाद में शोध से तय हो गया कि लेफ्टी या राइटी होना हमारे हाथ में नहीं होता बल्कि जन्म से पहले मां के पेट में ही ये तय हो जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 9, 2021, 11:33 AM IST
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अगर आप भी बाएं हाथ से लिखते हैं तो बचपन से ही आपको बहुत से भेदभाव का सामना करना पड़ा होगा. टीचर, पेरेंट्स हर कोई आपके बाएं हाथ से लिखने या खाना खाने की आदत को छुड़वाकर आपको दाएं हाथ से खाने और लिखने के लिए प्रेरित करता होगा. वहीं आपको ऐसा ना कर पाने के चलते डांट और कभी कभी तो मार भी खानी पड़ी होगी.

दरअसल केवल भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में बाएं हाथ से लिखने वाले लोगों को अपशगुनी माना जाता था. प्राचीन काल में तो ऐसा भी माना जाता था कि ऐसे लोगों पर पिशाच और चुड़ैलों का साया है! हालांकि विज्ञान ने इस अंधविश्वास का खंडन किया और इसे दिमाग के काम करने के तरीके से जोड़ा.

एक हालिया रिसर्च बताती है कि बाएं हाथ से लिखने और दिमाग के काम करने के तरीके में कोई संबंध नहीं है. हम दाएं हाथ से लिखेंगे या बाएं, यह हमारे जन्म से पहले ही तय हो जाता है. 2017 में हुई एक रिसर्च के अनुसार हम किस हाथ का बहुतायत में प्रयोग करते हैं, ये हमारी 'स्पाइनल कॉर्ड' पर निर्भर करता है.



क्या दिमाग का हिस्सा तय करता है इसे
1980 के दशक में हुई बहुत सी रिसर्चों में कहा गया कि हमारे दिमाग का दायां हिस्सा शरीर के बाएं हिस्से को नियंत्रित करता है और बायां हिस्सा शरीर के दाएं हिस्से को. इसमें आज भी कोई दोराय नहीं है, लेकिन पुरानी थ्योरी के अनुसार हमारे दिमाग का जो हिस्सा अधिक मजबूत होता है, उसके द्वारा नियंत्रित किए गए हाथ का प्रयोग हम अपनी दिनचर्या में ज्यादा करते हैं. उस हिसाब से दाएं हाथ से लिखने वाले लोगों के दिमाग का बायां हिस्सा अधिक मजबूत है और बाएं हाथ से लिखने वालों के दिमाग का दायां.

मेरुदंड है इसकी असली वजह 
यह थ्योरी अब पूरी तरह से नकार दी गई है. हमारे तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क के साथ ही एक और बहुत जरूरी और मुख्य अंग होता है जो हमारे शरीर के बहुत से मूवमेंट नियंत्रित रखता है. ये है 'मेरुदंड' या 'स्पाइनल कॉर्ड' जो मस्तिष्क की पूंछ से शुरू होकर हमारी रीढ़ की हड्डी के अन्दर से गुजरता है और कूल्हों तक जाता है. 2017 में हुई एक रिसर्च के मुताबिक हमारा मेरुदंड निर्धारित करता है कि हम किस हाथ से लिखेंगे.

ये है मेरुदंड या स्पाइनल कॉर्ड जो मस्तिष्क से निकलती है.


 मां के पेट में ही हो जाता है तय
जन्म से पहले भ्रूण में ही बच्चे के लेफ्टी या राइटी होने का अनुमान लगाया जा सकता है. वैज्ञानिकों ने 13 हफ्ते के कुछ भ्रूणों का निरीक्षण किया. इसमें सिद्ध हुआ कि बच्चे 8 से लकर 13 हफ्ते में ही अपना दायां या बायां अंगूठा चूसने लगते हैं. जन्म के बाद ये उसी हाथ का अधिक प्रयोग करते हैं जो अंगूठा उन्होंने 13 हफ्ते की भ्रूणावस्था में चूसना शुरू किया था.

दायां दिमाग बाएं शरीर को और बायां दिमाग शरीर के दाहिने हिस्से को नियंत्रित करता है


हमारा मस्तिष्क का वो हिस्सा जो हमारे चलने-फिरने और हाथों के प्रयोग को निर्धारित करता है उसे 'मोटर कोर्टेक्स' कहते हैं. यह हिस्सा भ्रूण में 15 हफ्ते के बाद बढ़ना शुरू होता है. इस आधार पर मस्तिष्क नहीं, बल्कि आपकी स्पाइनल कॉर्ड आपके लेफ्टी या राइटी होना निर्धारित करती है.

क्या वाकई सफल होते हैं लेफ्टी
निया की कुल आबादी में 10 प्रतिशत लोग लेफ्टी होते हैं. यही कारण है कि पुराने जमाने में उन्हें अपशगुनी माना जाता था. चूंकि इन लोगों में दुनिया की 90% आबादी से हटके कुछ होता है, इसी आधार पर अब माना जाता है कि बाएं हाथ से लिखने वाले अधिक सफल होते हैं. लेकिन यह भी एक अंधविश्वास है.

दुनिया के सफल लेफ्टी
दुनिया में ऐसे कई सफ़ल लोग हैं जो लेफ्टी हैं जिनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा शामिल हैं. अमिताभ बच्चन, रॉबर्ट डे नीरो, लक्ष्मी मित्तल और सचिन तेंदुलकर भी लिखने के लिए बाएं हाथ का प्रयोग करते हैं.
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