Explained: क्यों अब भी कुछ वैज्ञानिक मान रहे हैं कि Corona चीन की Wuhan लैब से ही फैला?

 बहुत से वैज्ञानिक WHO पर ही शक जताते हुए लैब की खुली जांच की मांग कर रहे हैं

बहुत से वैज्ञानिक WHO पर ही शक जताते हुए लैब की खुली जांच की मांग कर रहे हैं

Coronavirus Origin: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीम में मार्च के अंत में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपते हुए चीन के वुहान लैब (Wuhan lab, China) को बरी कर दिया. वहीं कई वैज्ञानिक अब WHO पर ही शक जताते हुए लैब की खुली जांच की मांग कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2021, 12:42 AM IST
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कोरोना वायरस के ओरिजिन की जांच में लगे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीम ने चीन जाकर जांच-पड़ताल की और अपनी रिपोर्ट में बताया कि वायरस लैब से नहीं, बल्कि वुहान के बाजार से जंगली जानवरों के जरिए फैला है. हालांकि संगठन की इस रिपोर्ट के खिलाफ कई विशेषज्ञ अलग राय दे रहे हैं. कई वैज्ञानिक ये दावा तक कर रहे हैं कि वायरस चीन की वुहान लैब से ही आया है और किसी वजह से ये बात सामने नहीं लाई जा रही. यहां तक कि इसकी खुली जांच की मांग हो रही है.

वुहान की लैब चर्चा में 

लगभग 11 मिलियन की आबादी वाला चीन का वुहान शहर केवल अपने वेट मार्केट (वो बाजार, जहां फल-सब्जियों के साथ मांस और जंगली जानवरों का मांस भी मिलता है) के कारण ख्यात नहीं, बल्कि यहां कई बड़े लैब भी हैं. इन्हीं में से एक है वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी. सरकार इस लैब को चला रही है, जिसमें कई खुफिया प्रयोग भी होते रहते हैं.

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अमेरिका ने कई बार ऐसे दावे किए हैं. साल 2019 के आखिर से इस लैब का नाम सुर्खियों में आया, और अब तक ये नाम चर्चा में है. कई देशों के वैज्ञानिकों को यकीन है कि इसी लैब से कोरोना वायरस फैला, जिसके कारण पूरी दुनिया में तबाही मच गई.

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वुहान से होकर कोरोना तेजी से दुनिया में फैला (Photo- news18 English via AP)




क्या कहते हैं विशेषज्ञ

अमेरिका के नेशनल पब्लिक रेडियो (NPR) में इस बारे में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया. इस रिपोर्ट में अमेरिका के पूर्व एशिया एडवाइजर डेविड फेथ कहते हैं कि वुहान से कोरोना वायरस की शुरुआत होना और वुहान में ही वायरस पर स्टडी करने वाली लैब का होना- दोनों संयोग नहीं हो सकते. फेथ साल 2019 में उन लोगों में से थे, जिन्होंने महामारी फैलने पर वुहान पर काफी ध्यान दिया था.

WHO ने दी रिपोर्ट 

वुहान से होकर कोरोना तेजी से दुनिया में फैला और देशों का ध्यान अपने यहां महामारी के नियंत्रण पर लगा रहा. इस दौरान वायरस के मूल स्थान को पता करने की बात ठंडी पड़ गई. लेकिन मार्च के आखिर में WHO ने बीजिंग के साथ मिलकर वायरस के मूल स्थान पर एक रिपोर्ट दी. इसका सार ये था कि लैब से कोरोना वायरस का फैलना केवल अफवाह है और ऐसा मुमकिन ही नहीं है.

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खुद स्वीकारी पड़ताल में कमी की बात 

हालांकि खुद WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम मानते हैं कि लैब-लीक थ्योरी पर उतनी गहनता से काम नहीं हो सका. टेड्रोस ने एक लिखित स्टेटमेंट में कहा कि कई मिसिंग कड़ियां हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए. तभी पक्का हो सकेगा कि वायरस के फैलने का स्थान वुहान लैब था या नहीं.

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साल 2019 में सबसे पहले बीमार पड़ने वाले लोग वुहान की लैब में काम करने वाले रिसर्चर ही थे- सांकेतिक फोटो (pixabay)


वैज्ञानिक लगा रहे राजनीति का आरोप 

संगठन प्रमुख तो अपनी बात कहते हुए निकल गए, लेकिन उनके इस बयान से वैज्ञानिक तबके में नाराजगी है. वे मानते हैं कि ऐसा कहना भारी लापरवाही और राजनीति से प्रेरित है. अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फैलो जेमी मेट्ज्ल कहते हैं कि असावधानी लैब लीक के बारे में हम जैसे वैज्ञानिक भी निश्चित नहीं लेकिन आधी-अधूरी पड़ताल के आधार पर WHO का रिपोर्ट तैयार करना बड़ी राजनीति हो सकती है.

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अमेरिका के पास चीन के खिलाफ सबूत के दावे 

जैसे साल 2019 में बीमार पड़ने वाले लोग वुहान की लैब में काम करने वाले रिसर्चर ही थे. उनकी रिपोर्ट में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी. साथ ही ये भनक भी पड़ी थी कि वुहान लैब में खुफिया तौर पर कई मिलिट्री गतिविधियां हो रही हैं. साथी ही अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट का ये भी आरोप है कि WHO ने लैब में जाकर केवल दुभाषियों की बात सुनी और उसी आधार पर रिपोर्ट बना दी, अपनी तरफ से संगठन ने लैब-लीक पर कोई तहकीकात नहीं की.

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चमगादड़ पर प्रयोग के दौरान टीम के पास पीपीई किट तो छोड़िए, हाथ में ग्लव्स और चेहरे पर मास्क तक नहीं था- सांकेतिक फोटो (pixabay)


लैबकर्मियों की लापरवाही दिखी वीडियो में

वैसे बता दें कि लैब-लीक थ्योरी में भले ही सच्चाई हो या न हो लेकिन लैब में काम करने वाले लोगों की लापरवाही के बारे में कई वीडियो आ चुके हैं. साल 2017 को चीन के सरकारी टीवी ने एक वीडियो रिलीज किया था, जिसमें बैट वुमन नाम से मशहूर शी झेंग्ली (Shi Zhengli) और उनकी टीम को लैब में SARS वायरस की उत्पत्ति पर रिसर्च करते दिखाया गया था.

चमगादड़ों पर हो रहा था प्रयोग

इसमें दिख रहा था कि चमगादड़ पर प्रयोग के दौरान टीम के पास पीपीई किट तो छोड़िए, हाथ में ग्लव्स और चेहरे पर मास्क तक नहीं था. वे खुले हाथों से चमगादड़ों को छू रहे थे, जो कि बेहद खतरनाक है. बता दें कि चमगादड़ में कई खतरनाक वायरस पाए जाते हैं, जिनका इलाज तो दूर, हमारे पास उनकी पूरी जानकारी तक नहीं है. इस वीडियो से चीन की इस लैब में सुरक्षा इंतजामों का पता चलता है.

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इधर लैब-लीक थ्योरी पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन भी पूरी तरह से अविश्वास नहीं कर रहे. यही कारण है कि उनके प्रशासन ने 13 अलग सरकारों से बात करते हुए WHO की फाइनल रिपोर्ट को आड़े हाथों लिया. हालांकि जॉइंट स्टेटमेंट में सीधे ये आरोप नहीं लगा कि वुहान लैब से ही वायरस लीक हुआ है, लेकिन चीनी पारदर्शिता पर जरूर सीधा शक जताते हुए दोबारा नए सिरे से पड़ताल की बात हुई.
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