जानिए रूस के लिए खतरे की घंटी क्यों है SpaceX का ऐतिहासिक लॉन्च

स्पेसएक्स के आने से रूस का अंतरिक्ष में इंसान भेजने में एकछत्र राज खत्म हो गया है.  (प्रतीकात्मक फोटो)
स्पेसएक्स के आने से रूस का अंतरिक्ष में इंसान भेजने में एकछत्र राज खत्म हो गया है. (प्रतीकात्मक फोटो)

स्पेसएक्स (SpaceX) ने दो अंतरिक्ष यात्रियों को ISS भेजकर रूस (Russia) के एक छत्र राज को खत्म कर दिया है,

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नई दिल्ली: अंतरिक्ष (Space) में वर्चस्व की होड़ आज की नहीं काफी समय पहले से है. आज भी अंतरिक्ष अभियानों को एक ताकत के तौर पर देखा जाता है. हाल के सालों में अंतरिक्ष में लोगों को भेजने में रूस (Russia) का एकछत्र राज (Monopoly) था, लेकिन अब अमेरिका की निजी कंपनी ने दो यात्रियों को अपने यान से अंतरिक्ष भेज कर कई संकेत दिए हैं. जिसमें रूस के लिए एक चेतावनी भी छिपी है.

शीत युद्ध से चल रही है वर्चस्व की लड़ाई
1950 के दशक से अमेरिका और सोवियत संघ (अब रूस) के बीच अंतरिक्ष अनुसंधान की होड़ लगी है. शुरुआत से ही रूस ने इसमें बाजी मारी. पहला अंतरिक्ष यान और अंतरिक्ष में पहला व्यक्ति भी रूस ने ही सबसे पहले भेजा. लेकिन अमेरिका ने चांद पर सबसे पहले इंसान को भेज कर रूस के वर्चस्व को तोड़ा. अमेरिका का यह दबदबा कई सालों तक चला. लेकिन साल 2003 में अमेरिका  ने इस क्षेत्र में कुछ कदम पीछे खींच लिए.

कैसे पीछे हटा अमेरिका
2003 में कोलंबिया हादसे के बाद से अमेरिका ने अपना स्पेस शटल अभियान बंद कर दिया. इसके बाद से 2011 को उसे आखिरी बार अपनी धरती से अंतरिक्ष यात्री ISS भेजे. इसके बाद से रूस का अंतरिक्ष में इंसान भेजने का एकछत्र राज हो गया. अमेरिका ने भी रूस से ही ISS तक अपने अंतरिक्ष यात्री भिजवाए.



अब खत्म हो गया है यह वर्चस्व
लेकिन दो दिन पहले रूस का यह वर्चस्व खत्म हो गया है. अमेरिका कि निजी कंपनी स्पेसएक्स ने अपने अंतरिक्ष यान ड्रैगन क्रू को फॉल्कन 9 रॉकेट की मदद से सफलता पूर्वक ISS तक पहुंचा दिया. अब रूस के अंतरिक्ष में इंसान भेजने की क्षमता के एकछत्र राज को खत्म माना जा रहा है.

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स्पेस एक्स का यह प्रक्षेपण अंतरिक्ष अनुसंधान इतिहास में एक टर्निंग प्वाइंट साबित होगा. (प्रतीकात्मक फोटो)


कितना खर्चीला था अमरिका के लिए रूस से यात्री भेजना
अब तक अमेरिकी और अन्य देशों के यात्रियों को ISS तक जाने के लिए रूसी स्पेस एजेंसी रोसकोसमोस के सुयोज यान की जरूरत पड़ती थी. इसके अलावा अंतरिक्ष यात्रियों को रूसी भाषा सीख कर मास्को शहर के बाहर स्टार सिटी में प्रशिक्षण भी लेना पड़ता था. एक अंतरिक्ष यात्री को ISS भेजना का खर्चा नासा को 8 करोड़ डॉलर आता था.

इससे कीमतें गिरेंगी
मॉस्कओ के विशेषज्ञ एंद्रेई लोनिन का मानना है कि अब स्पेसएक्स के आने से रूस का सालाना नुकसान 20 करोड़ डॉलर हो सकता है. रोसकोसमोस का यह कुल नुकसान 2 अरब डॉलर हो सकता है. एलन मस्क ने एक सीट का की कीमत 6 करोड़ डॉलर रखी है. वहीं रोसकोसमोस प्रमुख दिमित्री रोगोजिन ने घोषणा की है की रूस अपनी कीमत 30 प्रतिशत कटौती करने परकाम कर रहा है.

आसान नहीं होगा रूस के लिए भरपाई करना
लेकिन रूस के लिए यह आसान नहीं होगा. स्पेसएक्स जहां सस्ते इंजन और अपने सभी पुर्जे खुद ही बना रहा है, रूस को इसके लिए अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं में बदलाव करना होगा. इतना ही नहीं पहले से ही नुकसान और भ्रष्टाचार से लिप्त रूसी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए यह काफी मुश्किल होगा.

Space
अंतरिक्ष उद्योग में निजी व्यवसायियों का आना अहम संकेत माना जा रहा है.


अंदर बाहर दोनों से चुनौतियां
जहां रूस के स्पेस सैक्टर में समस्याएं तो उसे बाहर से भी तगड़ी चनौती मिल रही है. चीन भी अपनी प्रक्षेपण क्षमता के साथ टक्कर देने के लिए तैयार हो चुका है. अमेरिका में निजी क्षेत्र पहले से ही आगे बढ़ रहा है. वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिलचस्पी भी सैन्य होड़ में ज्यादा और अंतरिक्ष अनुसंधान में कम है.

माना जा रहा है कि मंगल पर पहले इंसान भेज कर रूस अपना वर्चस्व फिर से कायम कर सकता है, लेकिन यह आसान नहीं होने वाला है. अब रूस को इसके लिए दूसरे देशों की मदद लेनी होगी जो आसान नहीं होगा.  कुल मिला कर स्पेस एक्स का यह अभियान रूस के लिए खतरे की एक घंटी जरूर है.

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