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क्यों स्टीफन हाकिंग ने लिखा- न कोई भगवान होता है और न ही कोई किस्मत

क्यों स्टीफन हाकिंग ने लिखा- न कोई भगवान होता है और न ही कोई किस्मत

स्टीफन हॉकिंग (shutterstock)

स्टीफन हॉकिंग (shutterstock)

मशहूर भौतिक विज्ञानी और अंतरिक्ष विशेषज्ञ स्टीफन हाकिंग (Stephen Hawking) की जिंदगी का बड़ा हिस्सा व्हीलचेयर पर बीता, तब भी वो दुनिया को अपनी कई बड़ी खोज दे गए. उन्होंने अपनी आखिरी किताब में ये क्यों लिखा कि कोई भगवान नहीं होगा और न कोई किस्मत होती है. उनका कहना है कि किसी ने यूनिवर्स नहीं बनाया है और ना ही कोई दुनिया को चला रहा है.

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    भगवान कहीं नहीं है. किसी ने दुनिया नहीं बनाई और कोई हमारी किस्मत नहीं लिखता है. नास्तिक माने जाने वाले खगोलशास्त्री स्टीफन हॉकिंग ने अपनी आखिरी किताब में यही लिखा. हॉकिंग की इस किताब में कई यूनिवर्स के बनने, एलियन इंटेलिजेंस, स्पेस कोलोनाइजेशन और आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस जैसे कई जरूरी सवालों के जवाब दिए गए हैं. उन्होंने अपनी आखिरी किताब में भगवान के अस्तित्व को मानने से इनकार कर दिया.

    हॉकिंग की किताब में कई बड़े सवालों के जवाब हैं. उनकी किताब में लिखा है, ‘सदियों से यह माना जाता रहा है कि मेरे जैसे डिसेबल लोगों पर भगवान का श्राप होता है. लेकिन मेरा मानना है कि मैं कुछ लोगों को निराश करूंगा लेकिन मैं यह सोचना ज्यादा पसंद करूंगा कि हर चीज की व्याख्या दूसरे तरीके से की जा सकती है.’

    क्या वहां भगवान है
    वैसे हॉकिंग की इस किताब का नाम ही है क्या वहां भगवान है?. हॉकिंग ने लिखा, ‘मेरी भविष्यवाणी है कि हम इस सेंचुरी के खत्म होते-होते भगवान के दिमाग को समझने लगेंगे.यह मेरा मानना है कि भगवान नहीं है. किसी ने यूनिवर्स नहीं बनाया. न ही कोई हमारी किस्मत चलाता है.

    स्टीफन हॉकिंग ने 80 के दशक से आखिर से साफतौर पर ये कहना शुरू कर दिया कि भगवान का कोई अस्तित्व नहीं होता. वो अपनी बातें तर्क के आधार पर रखते थे. अपनी आखिरी किताब में तो उन्होंने इस पर खुलकर लिखा.

    क्या मरने के बाद जीवन है
    वह आगे लिखते हैं इससे मुझे इस बात का पूरा अहसास है कि न तो कोई स्वर्ग है और न ही मरने के बाद कोई जीवन. मेरा मानना है कि मरने के बाद जीवन है-यह सोचना सिर्फ आपका खुशनुमा विचार हो सकता है. इसके लिए कोई भरोसेमंद साक्ष्य नहीं है. हॉकिंग की मौत के बाद उनके एस्टेट ने प्रोजेक्ट पूरा करके किताब पब्लिश करने का फैसला लिया.

    दुनियाभर में लोगों के दिलों में जगह बनाई
    स्टीफन हॉकिंग ऐसे वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने आधुनिक दुनिया में ईश्वर की सत्ता को नकार दिया. अल्बर्ट आइंस्टीन के बाद स्टीफन हॉकिंग ही एक वैज्ञानिक के तौर पर दुनियाभर में लोगों के दिलों में अपनी जगह बना पाए. 21 वर्ष की उम्र में उन्हें मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी हुई. ऐसा लग रहा था कि वे अपनी पीएचडी नहीं पूरी कर पाएंगे, लेकिन सभी कयासों को गलत साबित कर वह 76 सालों तक जिए.

    स्टीफन हॉकिंग को हमेशा लगता रहा कि उन्हें जो कुछ मिला वो उनकी विकलांगता के चलते मिला. हालांकि उन्होंने अंतरिक्ष को लेकर कई अहम थ्योरीज दीं और हमारी धारणाओं को तोड़ा.

    14 मार्च, 2018 को स्टीफन हॉकिंग का निधन हो गया. वो ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड में 8 जनवरी, 1942 को जन्मे थे. उनके पिता एक चिकित्सा विज्ञानी थे जबकि मां दर्शनशास्त्र की स्नातक. स्टीफन हॉकिंग ने लंदन के पास स्थित संत अलबांस स्कूल में शुरुआती पढ़ाई की. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से भौतिकी में प्रथम श्रेणी की डिग्री हासिल की. उनके शोध की शुरुआत 1962 से हुई. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एक स्नातक के तौर पर उनका नामांकन हुआ.

    80 के दशक से भगवान के अस्तित्व पर सवाल उठाना शुरू किया
    80 के दशक के आखिर में उन्होंने भगवान के अस्तित्व पर सवाल उठाया. लेकिन ये सही है कि हाकिंग की बातों को दुनिया ने कभी नहीं नकारा. उनकी किताबों की बिकने की गारंटी हमेशा रहती थी. उनकी सारी किताबें हमेशा बेस्ट सेलर रहीं. जहां भी वो भाषण देने जाते थे, वहां हमेशा पूरी सीटें पहले से रिजर्व हो जाती थीं. उनकी बातें लोग ध्यान से सुनते थे.

    हाकिंग को हमेशा अपनी सफलता पर संदेह होता था
    हालांकि उनको हमेशा लगता रहा कि उन्हें जो कुछ मिला, वो उनकी योग्यता से नहीं बल्कि उनकी विकलांगता की वजह से मिला. वह हमेशा कहते थे कि लोग उन्हें उनके काम की वजह से याद करें.

    अंतरिक्ष पर हमारी धारणाओं को बदला
    हो सकता है कि हाकिंग हमारे समय से महान साइंटिस्ट नहीं रहे हों लेकिन वो महत्वपूर्ण भौतिक विज्ञानी जरूर थे, जिन्होंने अंतरिक्ष के बारे में हमारी बहुत सी धारणाओं को तोड़ा और साइंस के आधार पर नई थ्योरीज बताईं.

    Tags: Book, Stephen hawking

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