अंतिम संस्कार में सुषमा स्वराज को क्यों पहनाई गई हरे रंग की साड़ी और जैकेट

सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) में राजनीति के गलियारों में महिला नेताओं के परिधान को नया लुक दिया. उनका ये लुक खासा कॉन्फिडेंट और एलीट तो था लेकिन खालिस तौर पर उनका अपना था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 7, 2019, 9:31 PM IST
  • Share this:
भारतीय जनता पार्टी की नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का अंतिम संस्कार जब 7 अगस्त को हुआ तो उन्हें हरे रंग की साड़ी के साथ हरे रंग की जैकेट पहनाई गई थी. इसके साथ उन्हें लाल रंग की चुनरी भी ओढ़ाई गई. इसके बाद ये सवाल भी पूछे जाने लगे कि उन्हें हरा रंग क्यों पहनाया गया था.

सुषमा अपने जीवन में कम से कम दो बार हरे रंग को लेकर खासे विवादों में भी आईं थी. एक बार तो उन्हें इस बारे में संसद तक में सफाई देनी पड़ी थी.

09 दिसंबर 2015 में विदेश मंत्री के तौर पर जब वो पाकिस्तान गईं तो उन्होंने वहां हरी साड़ी और हरा जैकेट पहना हुआ था. इसे लेकर भारत में विवाद छिड़ गया. सवाल पूछे जाने लगे. मामला तूल पकड़ गया. ये कहा जाने लगा कि उन्होंने पाकिस्तानियों को खुश करने के लिए हरा रंग पहना था. खासकर धार्मिक जगत में भी इसे लेकर नाराजगी फैली.



सुषमा वापस लौटीं तो उन्हें 14 दिसंबर 2015 को संसद में इसका खुलासा करना पड़ा. उन्होंने कहा कि वो हमेशा ही बुधवार के दिन हरा रंग पहनती हैं. पाकिस्तान में उस दिन बुधवार का ही दिन था.
यही नहीं जब 28 मई 2014 को उन्होंने एनडीए के मंत्रिमंडल के लिए शपथ ली, तब भी उन्होंने हरे रंग के कपड़े पहने हुए थे. इस पर भी विवाद हुआ. तब भी उन्होंने यही जवाब दिया कि बुधवार के दिन वो हरा रंग पहनती हैं. अब आप समझ गए होंगे कि उन्हें 07 अगस्त के दिन जब अंतिम विदाई दी जा रही थी तो क्यों उन्हें हरा रंग पहनाया गया. अगर वो जिंदा होतीं तो 07 अगस्त को बुधवार होने के नाते हरा रंग ही पहनतीं.

तिरंगे में लिपटा सुषमा स्वराज का पार्थिव शरीर देख पति और बेटी ने नम आंखों से किया सैल्यूट

क्यों पहनती थीं अलग दिन अलग रंग की साड़ी   
उनकी साड़ी के रंगों की चर्चाएं अक्सर हुईं. जब वो वर्ष 2009 में विदिशा से चुनाव लड़ने गईं तो एक प्रेस कांफ्रेंस में भी उनकी साड़ी के रंग पर चर्चा छिड़ी तो उनसे पत्रकारों ने पूछ ही लिया कि वो अलग अलग दिन अलग रंग की साड़ी पहनती हैं, क्या इसके पीछे उनका अपना कोई अंधविश्वास या क्या कोई मान्यता है.

हरे रंग की साड़ी में सुषमा स्वराज, हालांकि इस रंग के कारण उन्हें कई विवादों का भी सामना करना पड़ा


तब उन्होंने खुलासा किया कि पहले उन्हें अपना वॉर्डरोब मैनेज करने में बहुत दिक्कत होती थी. यूं भी राजनीतिज्ञों के पास ज्यादा समय तो होता नहीं है. लिहाजा मैने अलग-अलग दिन के लिए अलग रंग तय कर दिये और वॉर्डरोब अब उसी हिसाब से मैनेज होता है. इसमें दिक्कत भी नहीं होती.

तब क्या बताया था सुषमा ने
सुषमा किस दिन किस रंग की साड़ी और जैकेट पहनती थीं, इसका राज भी उन्होंने इसी अवसर पर खोला. उन्होंने बताया कि सोमवार के दिन वो क्रीम या सफेद, मंगलवार को लाल या मैरून, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार बैंगनी, शनिवार को नीले रंग की साड़ी और इसी रंग से मिलते हुए जैकेट पहनती हैं. हां, रविवार के दिन वो कोई भी रंग की साड़ी पहन लेती हैं और इसी दिन अक्सर काली रंग की जैकेट भी पहनती हैं. साथ ही ये भी कहा कि इन रंगों के पीछे कोई अंधविश्वास नहीं है बस उनकी अपनी एक व्यवस्था है.

सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देने पहुंचे MDH के मालिक धर्मपाल गुलाटी... फूट-फूट कर रोने लगे

वैसे रंगों को लेकर एक और भाजपा सांसद का नाम उनके साथ लिया जाता रहा था. वो थे एसएस अहलूवालिया. वो हर दिन उसी रंग की पगड़ी पहनते, जिस तरह का शेड्यूल सुषमा ने अपनी साड़ी और जैकेट के लिए बना रखा था.

तब भी हुआ था सुषमा की साड़ी के रंग पर विवाद 
एक बार और उनकी साड़ी के रंग को लेकर विवाद हुआ था, तब उन्होंने गुलाबी रंग की साड़ी में थीं और वो शंकराचार्य से मिलने गईं थीं. इस पर इसलिए विवाद हुआ क्योंकि माना जाता है कि ये रंग ईरान के शियाओं से ताल्लुक रखता है. बाद में उन्हें इस पर भी सफाई देनी पड़ी.

सुषमा का खास स्टाइल था, वो साड़ी के साथ जैकेट पहनती थीं और उसी रंग के


परिधान के मामले में अंदाज था निराला 
भारतीय राजनीति में साड़ी महिला नेताओं का पावर परिधान माना जाता है तो पुरुषों नेताओं के बीच जैकेट की लोकप्रियता है. लेकिन इस मामले में पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की नेता सुषमा स्वराज का अंदाज निराला था. उन्होंने इन दोनों के ही कॉम्बिनेशन को अपनाया और ऐसा लुक और स्टाइल दिया, जो और किसी महिला नेता का नहीं है.

कहा जाता है कि राजनीति में आप जो पहनते हैं, वो आपको डिफाइन भी करता है. मसलन इंदिरा गांधी ने जब साड़ी पहननी शुरू की तो ये देखते ही देखते भारतीय राजनीति में पावर पोशाक मानी जाने लगी.  इंदिरा गांधी हमेशा साड़ियां पहनती थीं. यहां तक कि अपने तमाम विदेशी दौरों में भी वो हमेशा साड़ी में ही होती थीं.

इसके बाद भारतीय राजनीति में साड़ी को एक नई नजर से देखा जाने लगा. वहीं पुरुष नेताओं के बीच जैकेट हिट रही. पहले नेहरू जैकेट का जमाना था. अब नरेंद्र मोदी जैकेट हिट है. आमतौर पर महिला नेता संसद और विधानसभा में साड़ी में ही दिखती हैं जबकि पुरुष नेता अलग अलग स्टाइल वाली जैकेट में नजर आते हैं.

कौन है लद्दाख का ये युवा सांसद, जिसने अनुच्छेद 370 पर विपक्ष की हवा निकाल दी

पहली बार राजनीति में दिया नया फैशन स्टाइल 
सुषमा इस मामले में एकदम अलग रहीं. उन्होंने ना जाने कितने सालों से अलग अलग रंगों की साड़ियों के साथ खास डिजाइन वाले जैकेट पहनने शुरू किये. शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब उन्हें इसके बगैर देखा गया हो. वो जिस रंग की साड़ी पहनती थीं, उसी रंग के शेड का जैकेट भी. आप ये भी कह सकते हैं कि उन्होंने राजनीति में पहने जाने वाली दो खास पोशाकों यानि साड़ी और जैकेट के जेंडर गैप को तोड़ दिया. और ये भी दिखाया कि इन दोनों का तालमेल अगर साथ चले तो कितना शानदार लगता है.

वो अलग अलग दिन अलग रंगों की साड़ी और जैकेट पहनती थीं. उनका परिधान उनकी एक खास पहचान बन चुकी थी


खास तरह की जैकेट 
जिस तरह अक्सर उनकी साड़ी के रंग से जैकेट का रंग सटीक तौर पर मिलता था, उससे सियासी गलियारों में ये बात अक्सर की जाती थी कि सुषमा जी अपनी साड़ी के रंग के जैकेट जुटाने में काफी जतन करने पड़ते होंगे. लेकिन उनकी हर जैकेट के दो सामने के पॉकेट्स और बीच की लंबी पट्टी ये जाहिर करने के लिए पर्याप्त थी कि वो एक खास डिजाइन की जैकेट ही पहनती हैं, जिसे जरूर वो किसी डिजाइनर से बनवाती रही होंगी.

भारतीय राजनीति महिलाएं साड़ी पहनती हैं और जैकेट पुरुष नेताओं की पहचान मानी जाती है. सुषमा ने इन दोनों को अपनाया


साड़ी का अंदाज भी होता था खास 
सुषमा की साड़ी का भी अपना खास अंदाज होता था, ये भांति- भांति के रंगों की तो होती थी लेकिन हमेशा ही चौड़े बॉर्डर वाली. या तो सिल्क या फिर बढ़िया कॉटन. साथ में लाल रंग की बड़ी सी बिंदी और सिंदूर. उनका ये खास कॉम्बिनेशन उनके लुक को एक खास एलीट लुक तो देता ही था, साथ ही एक कॉन्फिडेंट पर्सनालिटी भी. वो अक्सर पूछने पर ये भी बताती थीं कि जेब वाली जैकेट पहनने के क्या फायदे हैं. इसमें मोबाइल फोन से लेकर कई सामान रखे जा सकते हैं.

 कौन थीं वो कादंबरी, जिन्हें जिंदगी भर टूटकर चाहते रहे गुरुदेव टैगोर

आमतौर पर वो ठंड के मौसम में सिल्क की जैकेट और वैसी ही साड़ियां पहनती थीं. हालांकि उनके वॉर्डरोब को लेकर कई बार उनसे सवाल भी किए गए. कई बार उनकी साड़ी के गाढ़े रंगों को लेकर भी चुटकियां ली गईं. कई बार उनके साड़ी के रंगों से विवाद भी हुए. लेकिन सुषमा अपने खास स्टाइल और रंगों के खास अंदाज से कभी डिगी नहीं. विदेशी दौरों में वो हमेशा इसी स्टाइल में होती थीं.

हालांकि उनके नजदीकियों का कहना है कि सुषमा शुरू में केवल साड़ी में ही नजर आती थीं. पिछले एक-डेढ़ दशक में उन्होंने साड़ी और जैकेट का खास कॉम्बिनेशन अपनाया, जो फिर उनकी पहचान ही बन गई. संसद में उनकी समकालीन दूसरी दिग्गज महिला नेता आमतौर पर साड़ी में ही आती हैं.

हो सकता है अब चांद पर जिएं धरती के ये अजर-अमर जीव!
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज