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ट्रंप के ताजमहल दीदार के बीच जानिए आखिर ये इमारत क्यों हमारे लिए जरूरी है

Samarth Saraswat | News18Hindi
Updated: February 24, 2020, 7:11 PM IST
ट्रंप के ताजमहल दीदार के बीच जानिए आखिर ये इमारत क्यों हमारे लिए जरूरी है
कमाई पर नजर डालें तो पहले नंबर पर ताजमहल है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार को ताजमहल का दीदार किया. इसे देखकर वो भी मोहब्बत की प्रतीक इस इमारत की तारीफ किये बगैर नहीं रह सकेंगे. ताज वो स्मारक भी है, जिसे विदेश से आना वाला हर आम और खास शख्स जरूर देखना चाहता है. आखिर ताज हमारे लिए क्यों जरूरी है. क्या है इसकी अहमियत

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  • Last Updated: February 24, 2020, 7:11 PM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को आगरा में ताजमहल का दीदार किया. वो भारत दौरे में खासतौर पर अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया के साथ मोहब्बत के इस प्रतीक का दीदार करना चाहते थे. केवल ट्रंप ही क्यों, जब भी दुनियाभर से कोई भी राष्ट्रप्रमुख या महत्वपूर्ण शख्स यहां आता है तो अपनी पत्नी या पार्टनर को ये खूबसूरत इमारत जरूर दिखाता है.

लिहाजा ताजमहल वो इमारत है, जो विदेश में हमारे सिर को ऊंचा करती है और तमाम कद्रदान भी बनाती है. इसे दुनिया के अजूबों में भी शामिल किया जाता रहा है. हालांकि पिछले कुछ सालों में ताजमहल को लेकर विवाद भी छिड़े हैं. ये प्रदूषण का शिकार भी बन रहा है. सवाल है कि ताजमहल हमारे लिए जरूरी क्यों है? आंकड़ों से समझिए कि देश की तमाम खास पुरातात्विक इमारतों में ताज की अहमियत क्या है?

सबसे ज्यादा कमाई वाली इमारत
देश में अगर तमाम पुरातात्विक इमारतों से होने वाली कमाई पर नजर डालें तो पहले नंबर पर ताजमहल खड़ा है. संसद में दिए जवाब के मुताबिक साल 2013 से 2016 के बीच ताजमहल के टिकट से 67.7 करोड़ रुपये की कमाई हुई.



साल 2013-14 में 22.5 करोड़, 2014-15 में 21.3 करोड़ और 2015-16 में 23.9 करोड़ रुपये कमाई हुई थी. जबकि दूसरी इमारतों की बात करें तो साल 2015-16 के दौरान कुतुब मीनार ने 10.85 करोड़, लाल किला ने 6.16 करोड़, हुमायूं का मकबरा ने 6.07 करोड़ और नालंदा बिहार ने 54 लाख रुपये कमाए थे. 2015-16 में देश की तमाम धरोहरों से 94 करोड़ की कमाई हुई थी, इसमें 24 करोड़ रुपये अकेले ताजमहल से हासिल हुए.



ताजमहल एक ऐतिहासिक इतिहास
मुगल शासक शाहजहां ने अपनी पत्‍नी अर्जुमंद बानो बेगम की याद में इस मकबरे को बनवाया था. इसका निर्माण 1632 AD में शुरू हुआ और 1648 AD में बनकर खत्म हुआ. ऐसा कहते हैं कि लगातार 17 साल तक 20,000 मजदूरों ने इसे बनाया.

अमानत खान शिराजी ताजमहल का केली ग्राफर था, उसका नाम ताज के दरवाजों में से एक में तराश कर लिखा गया है. कवि गयासु‍द्दीन ने इसके पत्‍थरों पर इबारतें लिखी हैं, जबकि इस्‍माइल खान अफरीदी ने तुर्की से आकर इसके गुंबद का निर्माण किया.

मुहम्‍मद हनीफ मिस्त्रियों का अधीक्षक था. ताजमहल के डिज़ाइनर का नाम उस्‍ताद अहमद लाहौरी था. इसे बनाने में इस्तेमाल हुई सामग्री को पूरे भारत और मध्‍य एशिया से लाया गया. ये सामान निर्माण स्‍थल तक लाने में 1000 हाथियों के बेड़े की सहायता ली गई.

इसका केंद्रीय गुंबद 187 फीट ऊंचा है. इसका लाल सेंड स्‍टोन फतेहपुर सीकरी, पंजाब के जसपेर, चीन से जेड और क्रिस्‍टल, तिब्‍बत से टर्कोइश यानी नीला पत्‍थर, श्रीलंका से लेपिस लजुली और सेफायर, अरब से कोयला और कोर्नेलियन तथा पन्‍ना से हीरे लाए गए. इसमें कुल मिलाकर 28 प्रकार के दुर्लभ, मूल्‍यवान और अर्ध मूल्‍यवान पत्‍थर ताजमहल की नक्‍काशी में उपयोग किए गए थे. मुख्‍य भवन सामग्री, सफेद संगमरमर जिला नागौर, राजस्‍थान के मकराना की खानों से लाया गया था.



ताजमहल के बदरंग होने के कारण

- वाहनों से होने वाला प्रदूषण
- इंडस्ट्रीज से होने वाला प्रदूषण
- नगर निगम का सॉलिड वेस्ट जलाया जाना
- पर्यटकों की बढ़ती भीड़

प्रदूषण से कैसे बर्बाद हो रहा ताज?
वाहनों और उद्योगों से निकालने वाले धुएं में पार्टिकुलेट मैटर होते हैं जो उड़कर ताजमहल की इमारत पर जाकर चिपक रहे हैं. इसके अलावा कूड़ा जलाए जाने से भी धुआं और राख इमारत को बर्बाद कर रहा है. पहले ताजमहल के पीले होने की शिकायत सामने आ रही थी जबकि अब इमारत के हरे होने की बात कही जा रही है.

इसके साथ ही आगरा में बायोमास जलाया जाता है. इससे PM 2.5 पॉल्यूटेंट निकलता है. गाड़ियों के धुएं और औद्योगिक धुएं से नाइट्रोज़न डाइऑक्साइड निकलती है जिनके संपर्क में आकर 2.5 पॉल्यूटेंट के पार्टिकल उनसे चिपक जाते हैं और ये ताजमहल पर जाकर बैठ जाते हैं. इसके अलावा बढ़ते पर्यटक भी प्रदूषण का कारण है. पर्यटक पसीने और तेल के हाथों से ताजमहल को मैला कर रहे हैं.



किन तकनीकों से हो रही सफाई?
2013 से ही ASI (ऑर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) की टीम ताज को चमकाने लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रही है. इनमें ताज की गर्म पानी के फव्वारे से बौछार. दूसरा खास साबुन से मैल साफ करने के प्रयास किए गए.

मडपैक से ताज को साफ करने की तीसरी तरीके से कोशिश की गई. इसके जरिए खास मिट्टी के लेप से ताजमहल की गंदगी को दूर किया जाता है. ताज की सफाई का चौथा तरीका स्टीम बाथ प्रयोग है. स्टीम बाथ का इस्तेमाल इससे पहले संसद भवन को बचाने के लिए भी हो चुका है.

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First published: February 24, 2020, 5:42 PM IST
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