लंदन में आखिर क्यों 29 टन गाजर सड़कों पर डंप कर दी गई?

गाजरों का ढेर लंदन की गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी के बाहर बीच सड़क पर रखा गया (Photo-goldsmiths university)
गाजरों का ढेर लंदन की गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी के बाहर बीच सड़क पर रखा गया (Photo-goldsmiths university)

हजारों किलो गाजर का ढेर लंदन की गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी (Goldsmiths, University of London) के बाहर बीच सड़क पर रखा गया. यूनिवर्सिटी के मुताबिक ये उसके एक छात्र की कलाकृति थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 7:40 AM IST
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हाल में लंदन की सड़कों पर गाजरों का ढेर गिराया गया. ये मात्रा कुछ ऐसी-वैसी नहीं, बल्कि सीधे 29 टन थी यानी लगभग 29 हजार किलो. गाजरों का ये विशाल ढेर लंदन की गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी के बाहर बीच सड़क पर रखा गया था. देखते ही देखते वहां से गुजरने वालों की भीड़ लग गई और गाजरों के सड़क पर पड़े होने के वीडियो वायरल होने लगे. आखिरकार पता चला कि ये गोल्डस्मिथ में ही पढ़ने वाले किसी छात्र के आर्ट वर्क के लिए मंगाए गए थे. जानिए, आखिर किस आर्ट वर्क के लिए इतने सारे गाजरों की जरूरत पड़ी और बाद में उन गाजरों का क्या हुआ.

ये गाजरें मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स कर रहे एक छात्र रफील परवेज इवान्स ने मंगवाई थीं. उनसे तैयार कलाकृति को इवान्स ने ग्राउंडिंग नाम दिया. खुद गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सड़क पर जमा होकर सवाल करने वालों को ये जवाब दिया.
यूनिवर्सिटी का ये भी कहना था कि कला प्रदर्शनी खत्म होने के बाद इवान्स ने गाजरों को पशुओं के खाने के लिए भेजने का बंदोबस्त पहले से किया हुआ है. साथ ही साथ ये भी बताया गया कि गाजरों की क्वालिटी ऐसी नहीं थी, जो लोग खाने में इस्तेमाल कर सकें इसलिए कलाकृति के लिए उन गाजरों को चुना गया. खुद कला छात्र इवान्स ने भी यही तर्क दिया.
यूनिवर्सिटी के मुताबिक गाजरों की क्वालिटी ऐसी नहीं थी, जो लोग खाने में इस्तेमाल कर सकें- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
हालांकि गाजरों का इतना बड़ा ढेर सड़क पर कूड़े की तरह पड़ा देखने वालों को ये तर्क संतुष्ट नहीं कर सका. बहुत से देखने वालों ये ट्विटर पर लिखा कि खाने लायक गाजरों की इतनी बड़ी मात्रा की बर्बादी है. बहुतों ने ये आरोप लगाया कि जब देश और दुनिया में लाखों-करोड़ों लोग भुखमरी का शिकार हो रहे हैं, तब आर्ट वर्क के नाम पर खाना सड़कों पर फेंका जा रहा है. कुछ ने ये भी माना कि अगर गाजरों को सड़क की बजाए किसी साफ-सुथरी जगह पर रखा जाता तो ये गरीबों के खाने के काम आ सकता था.

गाजरों की बर्बादी को लोगों ने गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा से भी जोड़ दिया. एक यूजर ने लिखा कि सड़क पर गाजर डलवाकर उसे कला कहना सिर्फ इसी यूनिवर्सिटी में हो सकता है. वैसे बता दें कि लंदन की गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी कला और सोशल साइंस की जानी-मानी यूनिवर्सिटी है. साल 1891 में बनी ये यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के तहत आती है. कला के क्षेत्र में योगदान के लिए यूनिवर्सिटी को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं और साल 2017 में इसे यूके की दूसरी बेस्ट, जबकि दुनिया में 8वीं शानदार यूनिवर्सिटी माना गया था.



वैसे ब्रिटेन में खाने की कमी एक गंभीर समस्या है. यही वजह है कि यहां एक नई तरह की संस्कृति चल निकली है, जिसे फ्रीगेनिज्म कहते हैं. इसके तहत सुपर मार्केट बचा-खुचा या लगभग एक्सपायर होने जा रहा खाना फेंकने की बजाए गरीबों को पहुंचा देते हैं. हालांकि इसका दूसरा पक्ष भी है. बहुत से सुपर मार्केट इसे गलत मानते हैं और बचा हुआ फूड वेस्ट सीधे कूड़ेदान में डाल देते हैं. भूख से परेशानहाल लोग कूड़ेदानों से भी खाना निकालकर खा लेते हैं.

पूरे ब्रिटेन में ही फ्रीगेनिज्म पर बहस चल रही है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


लंदन की फूड चेन टेस्को ने कूड़ेदान के खाना निकालकर खाने वाले एक शख्स के खिलाफ साल 2015 में कानूनी कार्रवाई की शुरुआत कर दी. हालांकि खुद कोर्ट ने ही ऐसे गरीब के खिलाफ किसी कार्रवाई या जुर्माना लगाने से इनकार कर दिया था. दूसरी ओर कई ऐसे जज भी रहे, जो मानते हैं कि भले ही दुकानदार ने खाना कूड़ेदान में डाल दिया हो लेकिन वो तब भी दुकानदार की ही संपत्ति है.

इसके बाद से लंदन से लेकर पूरे ब्रिटेन में ही फ्रीगेनिज्म पर बहस चल पड़ी है. सवाल किया जा रहा है कि क्या फ्रीगन होना कोई अपराध है, खासकर जब आय का कोई जरिया न हो और खाने को कुछ न मिले! कुछ समाज विज्ञान के जानकार मानते हैं कि मुफ्त में खाना, भले ही वो कूड़ेदान से मिले, इंसान को आलसी बना देगा और वो काम करना बंद कर देगा. ये किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है.
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