डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों कहा-ईरान में 52 जगह पर करेंगे हमले

डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों कहा-ईरान में 52 जगह पर करेंगे हमले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर दी धमकी.

ट्रंप ने अपने ट्वीट में इन 52 जगहों को प्रतीकात्मक बताया है. उनके मुताबिक ये 52 जगहें उन 52 नागरिकों और राजनयिकों की प्रतीक हैं जिन्हें 1979 में ईरान ने बंधक बनाया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2020, 5:20 PM IST
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अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच जंग जैसे हालात बनते जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है- हमने 52 ठिकाने चिन्हित कर लिए हैं, अगर अब ईरान ने अमेरिकी नागरिकों या ठिकानों को निशाना बनाया तो हम 52 जगह हमले करेंगे. ट्रंप ने अपने ट्वीट में इन 52 जगहों को प्रतीकात्मक बताया है. उनके मुताबिक ये 52 जगहें उन 52 नागरिकों और राजनयिकों की प्रतीक हैं जिन्हें 1979 में ईरान ने बंधक बनाया था. करीब 444 दिनों तक इन लोगों को बंधक बनाकर रखा गया था. लेकिन आखिरकार अमेरिका अपने नागरिकों को बचाने में कामयाब हो गया था.






क्या था पूरा मामला


दरअसल इस पूरे मामले की शुरुआत हुई थी 1953 में जब ईरान में लोकतांत्रिक सरकार हटाकर पहलवी राजवंश काबिज हो गया था. आरोप था कि ईरान की लोकतांत्रिक सरकार गिराने में अमेरिका का हाथ है. इस तख्तापलट को ईरान के इतिहास में ऑपरेशन अजाक्स के नाम से याद किया जाता है. तब वहां के प्रधानमंत्री रहे मोहम्मद मोसादेह की सरकार हटाई गई और गद्दी पर काबिज हुए मुहम्मद रजा पहलवी. इसके बाद मुहम्मद रजा पहलवी के हाथों में ईरान की संपूर्ण सत्ता आ गई. शाह के बारे में वक्त के साथ ईरानी जनता की धारणा बनने लगी कि वो अमेरिकी एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं. शाह ने भी कोल्ड वार के दौरान अमेरिका को पूरा सहयोग किया. ईरान में इस दौरान का इतिहास काफी खुलेपन के लिए याद किया जाता है.

1970 का दशक
70 के दशक तक शाह के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता गया. शाह के खिलाफ लोगों के गुस्से के नेता थे इस्लामिक नेता आयतुल्लाह खामनेई. खामनेई को शाह ने देश से बाहर निकाल दिया था. वो फ्रांस में रह कर ही शाह के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ा रहे थे. आखिरकार 1979 में शाह को गद्दी छोड़कर देश से भागना पड़ा और मिस्र में शरण लेनी पड़ी. इसी दौरान आयतुल्लाह खामनेई के समर्थक छात्रों ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास के 52 कर्मचारियों और नागरिकों को बंधक बना लिया.

इस्लामिक क्रांति के बाद आयतुल्लाह खामनेई ईरान वापस लौटे थे.
इस्लामिक क्रांति के बाद आयतुल्लाह खामनेई ईरान वापस लौटे थे.


करीब डेढ़ साल चला राजनयिक संकट
पश्चिमी मीडिया ने इसे बदले की कार्रवाई करार दिया था. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे ब्लैकमेल बताते हुए अपने नागरिकों और राजनयिकों को बचाने के प्रयास शुरू कर दिए थे. लेकिन ईरान में इस घटना को आज भी अमेरिका के खिलाफ गुस्से के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है. अमेरिका ने अपने लोगों को छुड़ाने के लिए सिर्फ राजनीतिक प्रयास ही नहीं किए बल्कि मिलिट्री ऑपरेशन भी किया लेकिन वो भी फेल रहा. आखिरकार अल्जीरिया की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों के बीच संधि पर हस्ताक्षर हुए. इसके बाद अमेरिकी लोगों को ईरान की गिरफ्त से आजादी मिली.

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