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अमेरिका और चीन के बीच क्यों छिड़ा है ट्रेड वार?

व्यापार को लेकर अमेरिका ने हाल ही में चीन पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं तो चीन ने भी पलटवार किया है

व्यापार को लेकर अमेरिका ने हाल ही में चीन पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं तो चीन ने भी पलटवार किया है

व्यापार को लेकर अमेरिका ने हाल ही में चीन पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं तो चीन ने भी पलटवार किया है

    पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ व्यापार असंतुलन पर मोर्चा खोल दिया. उन्होंने बड़ी व्यापारिक जंग का ऐलान किया. जिसमें चीनी वस्तुओं के आयात पर 60 अरब डॉलर का शुल्क (टैरिफ) लगा दिया गया. चीन ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी वस्तुओं के आयात पर तीन अरब डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा कर दी. 25 साल के इतिहास में चीन के साथ अमेरिका की ये सबसे तीखी व्यापारिक तनातनी है. माना जा रहा है कि ये तनाव एक नए किस्म के वार में बदल सकता है.

    ट्रंप ने क्या किया है?
    ट्रंप ने पिछले दिनों अमेरिका आने वाले उत्पादों पर टैरिफ बढाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए. अमेरिका का मानना है कि पेटेंट को लेकर चीन लगातार समय सीमा का उल्लंघन कर रहा है. ट्रंप बहुत समय से व्यापार असंतुलन कम करने की बात कहते रहे हैं. अमेरिका जिन देशों के साथ व्यापार कर रहा है, उसमें चीन के साथ उसका व्यापार असंतुलन सबसे ज्यादा है.

    जवाब में चीन ने क्या किया?
    चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं के आयात पर नया शुल्क लगा दिया. जिससे चीन से अमेरिका आने वाली वस्तुओं पर तीन अरब डॉलर शुल्क लगाया जाएगा. चीन ने ट्रंप के एेलान को एक पक्षीय व संरक्षणवादी बताया. चीन के वाणिज्यमंत्री ने कहा कि अमेरिका ने बहुत बुरी मिसाल कायम की है.

    क्या ये ट्रेड वॉर है?
    ट्रेड वॉर को कारोबार के ज़रिए युद्ध कह सकते हैं. किसी दूसरे युद्ध की तरह इसमें भी एक देश दूसरे पर हमला करता है. पलटवार के लिए तैयार रहता है. इसमें हथियारों की जगह करों का इस्तेमाल करके विदेशी सामान को निशाना बनाया जाता है. ऐसे में जब एक देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर टैरिफ़ यानी कर बढ़ाता है तो दूसरा देश भी इसके जवाब में ऐसा ही करता है और इससे दोनों देशों में टकराव बढ़ता है. इससे देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं जिससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ता है.

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    इसमें आगे क्या होने वाला है?
    फिलहाल दोनों देशों का जो रुख है, उससे वैसा ही लग रहा है. ट्रंप अपने कदम वापस खींचने वाले नहीं हैं. चीन को इससे बड़ा झटका लगा है. आने वाले समय में इसकी तस्वीर ज्यादा साफ होगी लेकिन चीन की प्रतिक्रियाओं से जाहिर है उसके रिश्ते अमेरिका से कटु होने जा रहे हैं. चूंकि चीन अब खुद एक बड़ी महाशक्ति है, लिहाजा दो महाशक्तियों के बीच तनाव का असर दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ना है. ये ट्रेड वार तब और बढेगा, अगर अमेरिका इसे लेकर दूसरे देशों के खिलाफ भी कुछ ऐसे कदम उठाता है. लेकिन कई बार इस तरह के कदमों के पीछे का मकसद अपनी शर्तें मनवाना या सौदा करना होता है.

    टैरिफ़ आख़िर क्या है?
    टैरिफ़ टैक्स यानी कर का वो रूप होता है जो विदेशों में बनने वाले सामान पर लगता है. सैद्धांतिक रूप से, विदेशी सामान पर कर बढ़ाने का मतलब ये होता है कि वह सामान महंगे हो जाएंगे और लोग उन्हें ख़रीदना कम कर देंगे. ऐसा करने के पीछे मंशा ये होती है कि लोग विदेशी सामान की कमी या उनके दाम ज़्यादा होने की स्थिति में स्वदेशी सामान ख़रीदेंगे,जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था को फ़ायदा होता है.
    अमेरिका-चीन में व्यापार की स्थिति क्या है?
    इन दोनों देशों के बीच व्यापार में अमेरिका का व्यापार घाटा 375.2 बिलियन डॉलर का है.

    दूसरे देशों के साथ अमेरिका के व्यापार घाटे की स्थिति क्या है?
    मैक्सिको -375.2 बिलियन डॉलर
    जापान - 68.3 बिलियन डॉलर
    जर्मनी - 64.3 बिलियन डॉलर
    वियतनाम -38.3 बिलियन डॉलर
    आयरलैंड -38.3 बिलियन डॉलर
    इटली -31.6 बिलियन डॉलर
    मलेशिया -24.6 बिलियन डॉलर
    इंडिया -22.9 बिलियन डॉलर

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    अमेरिकी प्रतिबंध से क्या होगा?
    1300 चीनी उत्पाद श्रेणियों पर शुल्क लगेगा. अमेरिकी प्रौद्योगिकी चीन निवेश की आजादी कम हो जाएगी. व्यापार असंतुलन कम होने में मदद मिलेगी. चीनी सामान महंगा हो जाएगा तो लोग अमेरिकी कंपनियों के उत्पादों को ज्यादा खरीदना चाहेंगे. ट्रंप का मानना है कि इससे अमेरिका के उद्योगों को मजबूती मिलेगी और हजारों नौकरियां सृजित होंगी.

    क्या इससे अमेरिका को भी नुकसान होगा?
    हां, अमेरिका की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका खासा ज्यादा नकारात्मक असर पड़ेगा. क्योंकि बड़े पैमाने पर सोयाबीन का चीन को निर्यात होता है. इसके अलावा अमेरिका से कई तरह के कृषि उत्पाद चीन जाते थे. 15 सालों से अमेरिकी किसानों की हालत इससे काफी बेहतर रही है. नए टैरिफ से अमेरिका के सोयाबीन किसान खुद को मुश्किल में पाएंगे. अमेरिका की बड़ी कंपनियां भी इस कदम पर सकते में हैं. इसका असर अमेजन, आईबीएम, अमेजन, लेनोवो, वालमार्ट, नाइकी और कई बड़े ब्रांड्स पर होगा.

    अमेरिका के किन उत्पादों पर असर पड़ेगा?
    सोयाबीन, सुअर का गोश्त, शराब और बिना जोड़ वाली स्टील पाइप सहित कुल 128 वस्तुओं के आयात शुल्क में छूट को चीन निरस्त करने पर विचार कर रहा है. काफी बड़े पैमाने पर अमेरिका से फल और अखरोट भी चीन जाते हैं.

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    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)


    क्या ट्रंप का कदम अप्रत्याशित है?
    नहीं. चूंकि ट्रंप वर्ष 2015 से ही ये बात कह रहे हैं लिहाजा ये कदम बिल्कुल अप्रत्याशित नहीं है. कोई भी देश व्यापार असंतुलन को बहुत लंबे समय तक बरकरार नहीं रख सकता. दूसरे इससे भी बड़ी बात बौद्धिक संपदा के चोरी की है, जिससे अमेरिका की कमाई कहीं ज्यादा है. अमेरिकी सरकार ने बौद्धिक संपदा चोरी को सात महीने जांच कराई थी. अमेरिका चीन पर नए निवेश प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है और वह चीन के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन में कार्रवाई करेगा.

    अमेरिका ने अगर ऐसा दूसरे देशों के साथ किया तो?
    - अमेरिका ने 1930 में ऐसा ही किया था. अपनी टैरिफ उसने बढ़ा दी थीं. उसके चलते दुनियाभर में मंदी आ गई थी. इसलिए अामतौर पर लोग इसे अमेरिका की बड़ी गलती के रूप में भी देख रहे हैं.

    फिलहाल क्या स्थिति है?
    दुनिया के सभी बड़े बाजारों में भूचाल आया है. व्यापारिक जंग की तमाम आशंकाओं के चलते शेयर बाजार टूट रहे हैं.

    संरक्षणवाद क्या है?
    जब सरकार अपने देश के उद्योगों को बढ़ाने के लिए विदेशी सामानों पर कई तरह की पाबंदियां लगाती हैं तो सरकार के इस क़दम को संरक्षणवाद कहते हैं.

    Tags: Donald Trump

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