सभ्यता से दूर वो द्वीप, जहां ब्रिटेन के Prince Philip को ज्वालामुखी का देवता माना गया

वनुआतु द्वीप के आदिवासी

वनुआतु द्वीप के आदिवासी

ब्रिटेन से दूर वनुआतु द्वीप के आदिवासी साठ के दशक से प्रिंस फिलिप को ईश्वरीय अवतार मानते हुए उनसे फसलों की बढ़त और ज्वालामुखी जैसी आपदाओं से बचाने की प्रार्थना करते रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2021, 11:37 AM IST
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ब्रिटेन से हजारों किलोमीटर की दूरी पर दक्षिणी प्रशांत महासागर में एक द्वीप समूह है, वनुआतु. ब्रिटेन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पति प्रिंस फिलिप की मौत का सदमा दुनिया के इस कोने में भी दिख रहा है. यहां के याओहनानेन आदिवासी प्रिंस को भगवान मानते थे और अब ये पूरा समुदाय शोक में डूबा हुआ है. वहां अब निधन पर होने वाली सभी पारंपरिक रस्में निभाई जा रही हैं.

ब्रिटेन में शोक का माहौल

प्रिंस फिलिप का 99 साल की उम्र में शुक्रवार को विंडसर कैसल में निधन हो गया था. इसके बाद से ब्रिटेन में शाही सदस्य के देहांत की रस्में चल रही हैं. इसी बीच वहां से हजारों किलोमीटर दूर एक छोटे से द्वीप में भी प्रिंस फिलिप के लिए रस्में हो रही हैं. याओहनानेन आदिवासियों का समूह भले ही प्रिंस से कभी नहीं मिला, लेकिन वो उन्हें ईश्वरीय अवतार मानता है. इसकी वजह भी बड़ी दिलचस्प है.

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कैसे हुआ प्रिंस का प्रभाव 

साठ के दशक में पोर्ट वेले के दौरे पर आए प्रिंस के पोस्टर इस द्वीप ने लोगों ने देखी थी. इस तस्वीर का उनपर ऐसा असर हुआ कि वे तुरंत ही प्रिंस को अपने ताकतवर पूर्वजों का कोई अवतार मान बैठे. उन्हें यकीन हो गया कि उनके पूर्वज ने नए जन्म में किसी विदेशी रानी समेत दुनिया में अपना परचम लहरा दिया है. तब से ही वहां पर उन्हें पूजा जा रहा है.

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प्रिंस फिलिप का 99 साल की उम्र में शुक्रवार को विंडसर कैसल में निधन हो गया




चल पड़ा प्रिंस फिलिप मूवमेंट 

बीबीसी ने भी अपनी एक रिपोर्ट में मानव विज्ञानी किर्स हफमेन ने हवाले से यही बता बताई कि आदिवासी प्रिंस फिलिप को अपने किसी शक्तिशाली पूर्वज या ईश्वर का अवतार मानते थे. प्रिंस को लेकर उनका यकीन इतना गहराने लगा कि द्वीप पर एक तरह से अभियान ही चल पड़ा, जिसके तहत लोग उनकी तस्वीरें रखने और रस्मों के दौरान उन्हें याद करने लगे. इस मूवमेंट को इतिहास में प्रिंस फिलिप मूवमेंट भी कहा जाता है.

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खुफिया ढंग से आदिवासियों से मिले थे प्रिंस 

हालांकि कहीं-कहीं इससे अलग बातें भी मिलती हैं. सीबीएस न्यूज के मुताबिक साल 1974 में प्रिंस फिलिप और महारानी एलिजाबेथ द्वीप पहुंचे थे. इस दौरान प्रिंस ने आदिवासियों के साथ बैठकर उनका पारंपरिक पेय भी पिया था और नाच में भी हिस्सा लिया था. यहां तक कि साल 2007 में भी वे खुफिया तरीके से इस कबीले के 5 लोगों से मिले थे. तब कबीले के लोग टीवी पर एक रिअलिटी शो Meet the Natives में हिस्सा लेने ब्रिटेन पहुंचे थे.

Vanuatu tribe mourns over death of prince
आदिवासी प्रिंस फिलिप को अपने किसी शक्तिशाली पूर्वज या ईश्वर का अवतार मानते थे (Photo- flickr)


जाहिर है कि दशकों तक जिस शख्स को यहां पूजा गया, उसके निधन का असर होना ही था. तो यहां पर उनके मानने वाले वे तमाम रीति-रिवाज करेंगे, जो वहां होती हैं.

किस तरह की रस्में होंगी 

इसके तहत वहां पारंपरिक नृत्य किया जाएगा और प्रिंस को याद करते हुए उनकी यादगार चीजें सजाई जाएंगी, जैसे उनकी तस्वीर. इस दौरान आदिवासी समूह के पुरुष सदस्य कावा नाम का पेय पियेंगे, जो वहां का पारंपरिक पेय है. ये किसी उत्सव या फिर जन्म-मृत्यु जैसे खास मौकों पर पिया जाता है. इस दौरान काफी बड़ी मात्रा में सुअरों का मांस पकाया जाता है और पूरे कबीले के लोग छोटे-छोटे टुकड़ों में साथ मिलकर भोजन करते हैं. रॉयटर्स की खबर के मुताबिक इस मौके के बारे में कबीले के एक प्रमुख सदस्य ने बताया कि भले ही प्रिंस फिलिप नहीं रहे, लेकिन कबीले के लोग शाही परिवार की मां (महारानी एलिजाबेथ द्वितीय) से हमेशा जुड़े रहेंगे.

कैसा है द्वीप पर जीवन

अब जानते हैं कि आखिर कैसा है ये द्वीप और यहां के लोगों का जीवन. वनुआतु वैसे 82 द्वीपों का समूह है, जिसमें से लगभग 60 द्वीप पर बसाहट है. ये सारे ही द्वीप ज्वालामुखी और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए संवेदनशील हैं. यही कारण है कि यहीं की आबादी उतनी घनी नहीं.

Vanuatu tribe mourns over death of prince
पारंपरिक नृत्य करती हुई वनुआतु स्त्रियां


जंगलों में बसे हुए हैं 

यहां के लोग घने जंगलों में रहते हैं और तकनीक से उनका दूर-दूर तक नाता नहीं है. वे आमतौर पर ट्रेडिशनल कपड़े पहनते हैं, लेकिन युवा पीढ़ी कुछ आधुनिक कपड़े भी पहनने लगी है. माना जाता है कि ये समूह आधुनिकता से कुछ सैकड़ा नहीं, बल्कि लगभग 3000 साल पीछे चल रहे है. यहां के लोग अपने रीति-रिवाजों को कास्टम (kastom) कहते हैं और उनका पालन जरूरी मानते हैं.

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ऐसा है खानपान 

खाने-पीने की बात करें तो द्वीप पर फसलों से लेकर साग-भाजी की पैदावार होती है और वे किसी भी तरह से बाहरी दुनिया पर निर्भर नहीं. यहां पैदा होने वाली चीजों में नारियल, केला, शकरकंद, गन्ना, हरी सब्जियां और कई तरह के मौसमी फल हैं. इसके अलावा चावल और टिनबंद चीजों को वे लग्जरी मानते हैं जो किसी खास मौके पर ही खरीदी जाती हैं. बता दें कि यहां की युवा पीढ़ी बाहर जाकर सामान लाती और उसे कबीले में बेचती है. द्वीप के आसपास भी कई द्वीप हैं, जहां विदेशियों का आना-जाना रहता है. इससे इस द्वीप पर भी लोग बाहरी संसार की कुछ जानकारी रखने लगे.
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