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अपने आखिरी वक्त में दयालु क्यों हो गया था सद्दाम हुसैन

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Updated: November 5, 2019, 9:33 AM IST
अपने आखिरी वक्त में दयालु क्यों हो गया था सद्दाम हुसैन
सद्दाम हुसैन को 2006 में फांसी दी गई थी

एक किताब में सद्दाम हुसैन (Saddam Hussein) के आखिरी दिनों को ब्यौरा लिखा गया है. इस किताब में सद्दाम हुसैन के कई दिलचस्प किस्से हैं...

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इराक (Iraq) के तानाशाह सद्दाम हुसैन (Sddam Hussein) को आज ही के दिन फांसी की सजा सुनाई गई थी. इराक की स्पेशल ट्राइबनल कोर्ट ने सद्दाम हुसैन को पूरी मानवता का अपराधी करार दिया था. उस पर 148 शियाओं के मौत के घाट उतारने का दोष साबित हुआ था. 1982 में सद्दाम हुसैन ने इराकी शहर दुजैल में अपने विरोधियों की हत्या करवाई थी.

अमेरिकी सेना ने सद्दाम हुसैन को एक गुफा से पकड़ा था. सद्दाम हुसैन पर अदालती प्रक्रिया चली. जब सद्दाम हुसैन को फांसी की सजा सुनाई गई तो उसने कोर्ट से गुजारिश की थी कि फांसी पर लटकाने की बजाए उसे गोली मार दी जाए. सद्दाम हुसैन का कहना था कि वो इराकी मिलिट्री कमांडर की हैसियत रखता है. मिलिट्री ओहदे की वजह से उसे फांसी पर लटकाने की बजाए गोली मारी जाए. हालांकि कोर्ट ने उसकी अपील ठुकरा दी. सद्दाम हुसैन को फांसी पर ही लटकाया गया.

एक किताब में सद्दाम हुसैन के आखिरी दिनों का ब्यौरा

एक किताब में सद्दाम हुसैन के आखिरी दिनों का दिलचस्प ब्यौरा मिलता है. विल बार्डेनवेरपेर की किताब ‘दी प्रिजनर इन हिज पैलेस: सद्दाम हुसैन, हिज अमेरिका गार्ड्स एंड वॉट हिस्ट्री लीव्ज अनसेड’ में सद्दाम हुसैन के अंति दिनों का ब्यौरा है.

अपने आखिर दिनों में सद्दाम हुसैन अमेरिकी सिंगर मैरी जे ब्लिज के गाने सुनता, अपनी पसंदीदा सिगार पीता, मफिन खाता और जेल के अमेरिकी सुरक्षाकर्मियों को कहानियां सुनाता. जेल के अंदर सद्दाम हुसैन ने सुरक्षाकर्मियों से दोस्ती कर ली थी.

सद्दाम हुसैन के अंतिम दिनों के ब्यौरे को उसकी सुरक्षाकर्मियों की बातचीत के आधार पर लिखा गया. इसमें सद्दाम हुसैन के व्यवहार और उससे जुड़े अनुभव हैं.

Why was saddam hussein kind in his last days interesting story of iraqi dictator
सद्दाम हुसैन

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सद्दाम हुसैन की सुरक्षा में तैनात होते थे सुपर 12

तीन दशकों तक इराक पर शासन करने वाले सद्दाम हुसैन को 69 वर्ष की उम्र में 2006 में फांसी पर चढ़ा दिया गया था. सुनवाई शुरू होने के पहले सद्दाम जब बगदाद में था, तब अमेरिकी सैनिकों का 551वीं मिलिट्री पुलिस कंपनी उसकी निगरानी में तैनात था. इस कंपनी को सुपर 12 कहा जाता था.

अमेरिकी सेना के 12 जाबांज सद्दाम हुसैन की सुरक्षा में तैनात किए गए थे. सद्दाम हुसैन उन सैनिकों को इराक के किस्से सुनाया करता था. किताब में सैनिकों के हवाले से लिखा गया है कि छह महीने होते-होते वो सद्दाम हुसैन से जुड़ाव महसूस करने लगे थे. सद्दाम हुसैन भी उनसे काफी अच्छा व्यवहार करता था. अमेरिकी सैनिकों और सद्दाम हुसैन के बीच ये संबंध उसके आखिरी वक्त तक बना रहा.

अपनी दिनचर्या को लेकर पाबंद था सद्दाम हुसैन

किताब में सद्दाम हुसैन की जेल के भीतर पूरी दिनचर्या के बारे में बताया गया है. जेल में बंद सद्दाम हुसैन अपने कमरे के एक कोने में धूल के छोटे से ढेर पर उग आई घास को पानी देना पसंद करता था. वो पौधों की रोज देखभाल करता था. घास की वो इस तरह से सेवा करता था मानों वो कोई फूल या फल हों.

अपने खाने को लेकर भी सद्दाम हुसैन संवेदनशील था. वो कई हिस्सों में नाश्ता लेता था. पहले आमलेट खाता, फिर मफिन और उसके बाद ताजे फल. आमलेट अगर ठीक से नहीं बना हो तो वो खाने से मना कर देता था. सद्दाम हुसैन को मिठाइयां बहुत पसंद थीं.

जब सद्दाम अपने बेटे पर बेहद गुस्सा हुआ था

अमेरिकी सुरक्षाकर्मियों से सद्दाम हुसैन अपनी निजी जिंदगी के किस्से भी शेयर किया करता था. कई सुरक्षाकर्मी ऐसे थे, जिनके बच्चे थे. सद्दाम हुसैन उन्हें पिता के बतौर अपने अनुभवों की कहानियां सुनाता था. सद्दाम हुसैन वक्त का पाबंद और अनुशासन को पसंद करने वाला था. एक सुरक्षाकर्मी से उसने अपने बेटे की एक दिलचस्प कहानी शेयर की थी.

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सद्दाम हुसैन


सद्दाम हुसैन के एक बेटे का नाम उदया था. एक बार उसके बेटे उदय ने बड़ी गलती कर दी. सद्दाम को काफी गुस्सा आया. दरअसल उदय ने गोलीबारी कर दी थी. गोलीबारी में कई लोग मारे गए थे और कई जख्मी हुए थे. सद्दाम हुसैन इस बात पर इतना नाराज हुऐ कि उसने अपने बेटे की सभी कारें जला दीं. उन कारों में रॉल्स रॉयस, फरारी और पोर्शे जैसी महंगी कारें भी थीं.

जेल में सद्दाम हुसैन रेडियो सुना करता था. रेडियो पर जब भी मेरी जे ब्लिज का गाना आता, वो पूरे ध्यान लगाकर सुनने लगता. सद्दाम हुसैन एक्सरसाइज बाइक चलाता, जिसे वो पोनी कहा करता था. अमेरिकी सुरक्षाकर्मियों ने बताया था कि एक वक्त बड़े-बड़े महलों में रहने वाला सद्दाम हुसैन जेल में छोटी-छोटी बातों में खुशियां ढूंढ़ा करता था.

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First published: November 5, 2019, 9:33 AM IST
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