साबुन से हाथ धोना क्यों है कोरोना से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका

साबुन से हाथ धोना क्यों है कोरोना से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका
कोरोना काल में लोगों की जिंदगियां बचाने वाले इस साबुन की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है.

कोरोना (Corona Virus) या किसी अन्य सामान्य वायरस के स्ट्रक्चर पर साबुन से हाथ धुलने का काफी प्रभाव होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2020, 2:28 PM IST
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कोरोना वायरस को लेकर जितने भी बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं उनमें साबुन से हाथ धोना से सबसे अहम है. सरकारी विज्ञापनों में भी लगातार इस बात को दोहराया जा रहा है. आखिर साबुन से हाथ धुलने में ऐसा क्या खास है जो ये कोरोना के खिलाफ सबसे कारगर हथियार बन गया है. आइए जानते हैं क्या है इसकी सच्चाई...

वायरस का स्ट्रक्चर
ज्यादातर वायरस का स्ट्रक्चर मूलत: तीन चीजों से बना होता है. आरएनए, प्रोटीन और लिपिड. ये तीनों परतों के फॉर्म में वायरस का निर्माण करते हैं. लिपिड बाहरी परत का निर्माण करता है और वायरस के स्ट्रक्चर को बनाए रखने में मदद करता है. लेकिन वायरस के स्ट्रक्चर में लिपिड की ये बाहरी परत ही सबसे कमजोर कड़ी होती है. अब चूंकि बाहरी परत ही इसकी सबसे कमजोर कड़ी है इस वजह से इस स्ट्रक्चर को तोड़ने के लिए किसी ज्यादा तेज केमिकल की जरूरत नहीं पड़ती है. आम प्रचलन में चल रहे सामान्य साबुन में मौजूद केमिकल्स इसे खत्म करने के लिए पर्याप्त होते हैं.

सतह पर कैसे प्रभावी होता है ये वायरस
ज्यादातर वायरस, जिनमें कोरोना भी शामिल है, 50-200 नैनोमीटर के बीच होते हैं. सच कहा जाए तो नैनो पार्टिकल्स की तरह है. जब किसी व्यक्ति की छींक, खांसी से निकले हुए कण सतह पर गिरते हैं तो उसमें मौजूद पानी तो सूख जाता है लेकिन वायरस बने रहते हैं. लकड़ी, कपड़े और त्वचा पर ये वायरस ज्यादा आसानी से और ज्यादा समय तक बने रहते हैं. इसके विपरीत स्टील और प्लास्टिक पर अपेक्षाकृत वायरस कम प्रभावी होती हैं. खुरदुरी सतह पर वायरस सबसे कम काम करता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ये पूरी तरह से सेफ है. वायरस से लिए सबसे आइडियल जगह त्वचा है.





अब अगर आप किसी कपडे़, लकड़ी, स्टील या प्लास्टिक की ऐसी जगह को छूएंगे जहां पर कोरोना वायरस पार्टिकल पड़ा हो तो वो आपके हथेलियों से चिपक जाएगा. लेकिन इसका मतलब नहीं कि आपको संक्रमण हो गया है. अगर फिर आपने हथेलियों से नाक या मुंह को छुआ तो फिर ये वायरस आपके भीतर फैल सकता है.

यहां से शुरू होता है साबुन का रोल
ज्यादातर लोगों में देखा जाता है कि वो अपना चेहरा हर कुछ मिनट के अंतराल पर छूते रहते हैं. आपने खबर पढ़ी होगी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते महीने के दौरान अपना चेहरा नहीं छुआ. ट्रंप को ये आदत थी कि वो हर कुछ समय अंतराल पर अपने चेहरे को छूते थे.

एक बार जब वायरस आपके हाथों पर आ जाता है तो आप हाई रिस्क जोन में होते हैं. इस समय आपका सिर्फ पानी से हाथ धोना काफी नहीं है. साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है. साबुन में एमीफिफिल्स जैसी चीजें शामिल की जाती हैं जो वायरस के स्ट्रक्चर को खत्म करने का काम करती हैं. ये साबुन के कण वायरस की बाहरी लेयर पर मौजूद लिपिड की लेयर को समाप्त करते हैं. जिससे वायरस समाप्त हो जाता है. हाथ धुलने के दौरान भी आपको खयाल रखना होगा कि साबुन आपकी हथेलियों और कलाई पर पूरी तरह लगा है या नहीं.

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क्या होता है सैनेटाइजर का रोल
हाल ही में खबर आई कि कोरोना वायरस फैलने के बाद बाजार से हैंड सैनेटाइजर्स एक दम से गायब होने लगे. सैनेटाइजर भी कोरोना से लड़ाई में कारगर है लेकिन उतना नहीं जितना साबुन होता है. इसका कारण ये है कि सेनेटाइजर आपकी हथेलियों और अंगलियों के कई हिस्सों तक ठीक से नहीं पहुंच पाता. जबकि साबुन से हाथ धुलने पर पानी की वजह से यह हर कोने तक ठीक से पहुंच जाता है.
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