क्यों चांद की वजह से हो जाती हैं दो-दो ईद, जानिए वजह

इस बार भी कश्मीर और केरल में 13 मई को ईद मनाई जा रही है जबकि बाकी हिस्सों में 14 मई को

इस बार भी कश्मीर और केरल में 13 मई को ईद मनाई जा रही है जबकि बाकी हिस्सों में 14 मई को

देश में इस बार दो-दो ईद मनाई जा रही है. कश्मीर और केरल में 13 मई को ईद मनाई जा रही है तो देश के बाकी हिस्सों में ये 14 मई को मनाई जाएगी. हर साल ही ऐसा देखने को मिलता है. ऐसा क्यों होता है. चांद और ईद का क्या रिश्ता है और साथ ही जानिए कि उर्दू कैलेंडर यानि हिजरी का चांद से क्या रिश्ता है.

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हर बार ईद का चांद या तो बहुत देर से नजर आता है या फिर तय दिन नजर नहीं आता बल्कि अगले दिन दिखता है. दरअसल ईद ऐसा त्योहार है, जो चांद को देखकर ही मनाया जाता है. चांद की स्थिति को हमेशा मुस्लिम समुदायों में मतभेद सामने आ जाता है. जिसकी वजह से दो-दो ईद हो जाती हैं. भारत में इस बार भी कश्मीर और केरल में ईद 13 मई को मनाई जा रही है जबकि देश के दूसरे हिस्सों में 14 मई को.

आखिर ऐसा क्यों होता है? ईद और चांद का क्या रिश्ता है. ईद उर्दू कैलेंडर यानि हिजरी के हिसाब से मनाई जाती है. उर्दू कैलेंडर का 9वां महीना रमज़ान का होता है जो आमतौर पर 29 या 30 दिनों का होता है. इसके बाद 10वां महीना शव्वाल शुरू होता है, जिसकी पहली तारीख को ही ईद मनाई जाती है.

उर्दू कैलेंडर का हर महीना चांद को देखकर शुरू होता है. जब नया चांद दिखाई देता है तो ही नया महीना शुरू होता है. इसी नए चांद को देखकर ईद (शव्वाल) का महीना शुरू होता है. कभी-कभी इसी चांद को लेकर मुसलमानों में मतभेद हो जाता है, जिसकी वजह से लोग अलग अलग धड़ों में बंट जाते हैं और दो ईद हो जाती है. अक्सर ईद के चांद को लेकर मुसलमानों में गफलत रही है.

नए चांद को देखकर ईद (शव्वाल) का महीना शुरू होता है. कभी-कभी इसी चांद को लेकर मुसलमानों में मतभेद हो जाता है.

कैसे तय होता है नया चांद

पृथ्वी जब सूर्य का चक्कर लगाती है तो एक चक्कर पूरा होने में 365 दिन और कुछ घंटे लगते हैं. जिसकी वजह से 365 दिनों वाला साल हर चौथे वर्ष लीप ईयर हो जाता है. तब फरवरी में एक दिन बढ़ जाता है. लीप ईयर का साल 366 दिनों का हो जाता है.

ठीक इसी तरह चांद भी पृथ्वी का चक्कर लगाता है. विज्ञान के अनुसार अगर पृथ्वी अपनी जगह ठहरी रहे. चांद परिक्रमा करता रहे तो 27 दिन में चांद पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेता है. लेकिन चांद के साथ साथ पृथ्वी भी घूमती है. जिसकी वजह से पृथ्वी और चांद का एक चक्कर 29 दिन और कुछ घंटों में पूरा होता है. एक चक्कर को पूरा हो जाने के बाद जो चांद दिखता है उसे नया चांद कहा जाता है.



क्यों घट जाता है ईद का दिन

ईद कभी जुलाई में होती है तो कभी मई-जून में या फिर अन्य महीनों में. इसकी बड़ी वजह ये है कि उर्दू कैलेंडर में 355 या 356 दिन होते हैं, ये 10 दिनों का फर्क ही ईद को हर साल 10 दिन घटा देता है जिससे ये अलग अलग महीनों में पड़ती रहती है.

चांद से रोशन हो ईद तुम्हारी हमको नसीब हो दीद तुम्‍हारी खुशी से भर जाए आंगन तुम्हारा हर शिकायत हो दूर तुम्हारी बस यही है दुआ हमारी आप सभी को ईद की दिली मुबारकबाद सदा हंसते रहो फूलों की तरह दुनिया के सारे गम जाओ भूल आज दुआओं में असर दिखेगा दुआ होगी तुम्‍हारी कुबूल तुम्हें मुबारक हो ईद ईद मुबारक 2021
उर्दू कैलेंडर एक इस्लामिक कैलेंडर है. जिसको हिजरी के तौर पर जाना जाता है. इसकी शुरुआत पैगंबर मोहम्मद साहब ने सउदी अरब के मक्का शहर को छोड़कर मदीना शहर में बसने पर हुई.

क्या है हिजरी यानि उर्दू कैलेंडर

उर्दू कैलेंडर एक इस्लामिक कैलेंडर है. जिसको हिजरी के तौर पर जाना जाता है. इसकी शुरुआत पैगंबर मोहम्मद साहब ने सउदी अरब के मक्का शहर को छोड़कर मदीना शहर में बसने पर हुई. उसी साल से हिजरी की शुरुआत हुई. वर्तमान में 1442 हिजरी चल रहा है. मोहर्रम उर्दू कैलेंडर का पहला महीना होता है, इसी महीने की पहली तारीख से उर्दू कैलेंडर शुरू होता है. इसमें भी 12 महीने होते हैं जिसमें रमज़ान 9वें महीने में और ईद दसवें महीने की पहली तारीख व बकरीद 12 वें महीने की दसवीं तारीख को मनाई जाती है.

भारत में कैसे मनती है ईद

भारत के कई शहरों में अलग अलग चांद कमेटियां गठित हैं. सबसे असरदार ऐलान लखनऊ या दिल्ली की शाही जामा मस्जिद से होता है. देश में भी मुस्लिम समुदाय दो धड़े में बटा हुआ है. एक शिया समुदाय और दूसरा सुन्नी. दोनों की ही चांद कमेटियां अलग हैं.

भारत के कई शहरों में अलग अलग चांद कमेटियां गठित हैं. सबसे असरदार ऐलान लखनऊ या दिल्ली की शाही जामा मस्जिद से होता है.

इन चांद कमेटियों में हर राज्य में नुमाइंदे होते हैं. वो दो काबिल लोगों की चांद देखने की गवाही पर इसका फैसला करते हैं. फिर चांद दिखने या नहीं दिखने का ऐलान कर देते हैं.

दूसरे देशों में क्या है स्थिति

दुनिया के तमाम मुस्लिम देशों में भी चांद कमेटियां गठित हैं. वही चांद से जुड़े फैसले लेती हैं. हालांकि अब वैज्ञानिक आधार पर चांद की स्थिति का पहले से आंकलन करके उर्दू कैलेंडर छापा जाता है. अधिकतर मुस्लिम देशों में ईद की तारीख पहले ही घोषित कर दी जाती है. उसी के अनुसार ईद मनायी भी जाती है.

सऊदी अरब और ईरान में उर्दू कैलेंडर के हिसाब से ही ईद मनायी जाती है. इन देशों में सभी समुदाय एक साथ ही ईद मनाते हैं लेकिन पाकिस्तान और भारत में अक्सर दो ईद हो जाती है. पाकिस्तान में भी चांद को लेकर खूब मतभेद सामने आते हैं.

क्या है वैज्ञानिक आधार

मौजूदा जमाने में सैटेलाइट और अंतरिक्ष के ज़रिए चांद की स्थिति का बखूबी आंकलन किया जा सकता है. ये पता लग जाता है कि चांद अपना चक्कर कब और किस समय पूरा करेगा. इसी तरह नए चांद को माना जाता है.

वैसे चांद की स्थिति को बताने वाली एक वेबसाइट भी है. कई देश इसी से चांद दिखने या नहीं दिखने का फैसला लेते हैं. इस वेबसाइट का नाम मून शाइटिंग है.

भारत में ही क्यों हो जाती है दो ईद

भारत में भी केरल और जम्मू कश्मीर दो ऐसे राज्य हैं जहां 13मई को ईद मनाई जा रही है. जबकि देश के अन्य हिस्सों में ये शुक्रवार यानि 14 मई को होगी. ऐसा इसलिए होता है कि जम्मू कश्मीर और केरल अपने फैसले लखनऊ अलग हटकर खुद लेते हैं. वैसे अधिकतर राज्य लखनऊ के चांद कमेटी के फैसले को ही मानते हैं.

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