• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • #Gandhi150 : जब शंकराचार्य ने अंग्रेजों से कहा गांधी को देश से निकाल दो

#Gandhi150 : जब शंकराचार्य ने अंग्रेजों से कहा गांधी को देश से निकाल दो

हिंदू महासभा ने यह भी तय किया था कि गांधी जहां-जहां अस्पर्शयता का विरोध करने जायेंगे, वहां उन्हें काले झंडे दिखाए जायेंगे.

हिंदू महासभा ने यह भी तय किया था कि गांधी जहां-जहां अस्पर्शयता का विरोध करने जायेंगे, वहां उन्हें काले झंडे दिखाए जायेंगे.

हिंदू महासभा ने यह भी तय किया था कि गांधी जहां-जहां अस्पर्शयता का विरोध करने जायेंगे, वहां उन्हें काले झंडे दिखाए जायेंगे.

  • Share this:
    (20वीं शताब्दी के सबसे निर्मम और हिंसक दौर में, जब विश्व दो-दो विश्वयुद्ध की त्रासदियों से गुजर रहा था. भारत में एक महात्मा ने सत्य और अहिंसा को लोगों के मन में पुन:स्थापित किया. इस महात्मा को आगे चलकर भारत ने अपना राष्ट्रपिता माना और दुनिया ने उसकी तुलना ईसा मसीह और महात्मा बुद्ध से की. इस साल 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी को इस दुनिया में आए 150वां साल होने को है. इस मौके पर हम आपको गांधी से जुड़ी तमाम जानकारियां '#गांधी150' सीरीज में दे रहे हैं. पिछली सारी कहानियों के लिए यहां क्लिक करें.)

    महात्मा गांधी सभी धर्मों के आदर की बात कहते थे. उन्होंने अपनी शाम की प्रार्थना सभा में भी सभी धर्मों के भजन और गीत गाने की परंपरा शुरू की थी. वे चाहते थे कि ऐसे ही सारे ही धर्मों की अच्छाइयों को लोग स्वीकार करें और उसके हिसाब से आचरण करें. महात्मा गांधी बहुत धार्मिक थे और आध्यात्म को हमेशा राजनीति से ऊपर रखते थे. लेकिन उनकी आध्यात्मिकता के चलते उन्हें बहुत से तत्कालीन नेताओं जैसे अंबेडकर आदि की आलोचना का शिकार भी होना पड़ता था.

    ऐसे में जब महात्मा गांधी का वैचारिक संवाद एक ओर अंबेडकर जैसे एक्टिविस्ट से चल रहा था. तो दूसरी ओर संकीर्ण हिंदुत्ववादी भी उनसे उलझे हुए थे. हालांकि गांधी उनसे संवाद से पूरी तरह बचते थे. इसका कारण था कि गांधी उन्हें धर्मांध और मूर्ख मानते थे.

    हाल ही में इतिहासकार रामचंद्र गुहा की एक नई किताब आई है. जिसका नाम है गांधी : द इयर्स दैट चेंज्ड इंडिया. इसी किताब के बारे में एक इंटरव्यू के दौरान गुहा ने कहा, "अंबेडकर के समर्थकों से आज आप बात करें तो वे कहेंगे कि जाति के प्रश्न पर गांधी इतना धीरे चल रहे थे कि वे कभी जाति व्यवस्था को खत्म नहीं कर पाते. वहीं अगर आप उस दौर के हिंदुत्ववादियों की बातें पढ़ें तो उन्हें कहते हुए पाएंगें कि गांधी छुआछूत और जाति के प्रश्न पर बहुत तेजी से काम कर रहे थे."

    इस सीरीज की पुरानी कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दी गई तस्वीर पर क्लिक करें-



    गांधी से निपटने के लिए हिंदुत्ववादियों ने बनाए कई प्लान
    जैसा कि बताया गया हिंदुत्ववादी गांधी से चिढ़े हुए थे. उनका कहना था कि अस्पर्शयता का जिक्र हमारे पुराणों में है और एक 'बनिया' जिसे संस्कृत भी नहीं आती हमारी श्रृद्धा को अपने हिसाब से डालना चाहता है? आप इससे गांधी की मनोस्थिति समझ सकते हैं कि कैसे उन्हें एक ओर आधुनिक आलोचक अंबेडकर और दूसरी ओर शंकराचार्य जैसे लोगों से एक साथ निपटना पड़ रहा था.

    रामचंद्र गुहा लिखते हैं कि हिंदू रुढ़िवादी उनके जाति और अस्पृश्यता विरोधी कामों के चलते उनका विरोध करते थे. एक बार तो शंकराचार्य ने गांधी के बारे में ब्रिटिशों पर दबाव भी बनाया था कि गांधी को देश से निकाल दिया जाना चाहिए. हिंदू महासभा ने यह कार्यक्रम भी बनाया था कि गांधी जहां-जहां भी अस्पर्शयता के विरोध में सभा या रैली करने जायेंगे, वहां पर उन्हें काले झंडे दिखाए जायेंगे.

    यह भी पढ़ें : #Gandhi150 : कैसे गांधी हत्या के बाद भी दुनिया भर के आंदोलनों से जुड़े रहे?

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज