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क्यों हीरे, मोती और सोने से ज्यादा कीमती होती है व्हेल की उल्टी

व्हेल की उल्टी कठोर और पत्थर की तरह ठोस सी होती है लेकिन उसकी असली पहचान है उससे आनी वाली बेहतर गंध
व्हेल की उल्टी कठोर और पत्थर की तरह ठोस सी होती है लेकिन उसकी असली पहचान है उससे आनी वाली बेहतर गंध

समुद्र के किनारे तटों पर अक्सर गोबरनुमा काला सा सुगंधित ठोस पदार्थ मिल जाता है. इसे व्हेल की उल्टी (whale Vomit) कहा जाता है. अगर ये किसी को मिल गया तो बाजार में वो इसे बेचकर मालामाल हो सकता है. इसकी कीमत हीरे, सोने से ज्यादा आंकी जाती है. लोग हैरान भी होते हैं कि इस उल्टी में ऐसी क्या खास बात होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 8:13 PM IST
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हाल ही थाईलैंड के एक शख्स को समुद्र के किनारे काला सा कठोर महकता हुआ पदार्थ दिखा, वो व्हेल की उल्टी थी, जो बाजार में 25 करोड़ की बिकी और उसने उसकी जिंदगी को बदल कर रख दिया. इसी तरह कुछ दिन पहले समुद्र तट पर घूमते हुए ताइवान के एक शख्स को कड़ा गोबर सरीखा पत्थर नजर आया. उससे एक अच्छी गंध आ रही थी.  उसने उसे जब बेचा तो ये करोड़ों में बिका.

दरअसल समुद्र के किनारे गाहेबगाहे मिलने वाले ये सुगंधित गोबरनुमा कठोर पदार्थ व्हेल की उल्टी होता है. कई बार ये भूरे और पीले रंग में भी हो सकता है. कई बार सफेद और काले पत्थर की तरह भी नजर आता है. इसके पारखी तुरंत इसे पहचान जाते हैं. ये अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत मंहगी बिकता है.

क्या आपको मालूम है कि व्हेल मछली की उल्टी सोने से भी ज्यादा महंगी बिकती है. जहां व्हेल मछलियां दिखती हैं, वहां कुछ ऐसे लोग भी नजर आने लगते हैं जो व्हेल मछली की उल्टी की तलाश में रहते हैं. ताकि वो उसे हासिल करके बाजार में बेच सकें और मालामाल हो जाएं.



अपने देश में भी उल्टी से बना ये पदार्थ मिलता रहता है. इससे संबंधित खबरें आती रहती हैं. हालांकि आपको बता दें कि आमतौर पर स्पर्म व्हेल से निकला ये अपशिष्ट पदार्थ ही कीमती होता है. हर व्हेल मछली की उल्टी ऐसी नहीं होती.
दुनियाभर के समुद्रतटों पर ये कभी भी और कहीं भी मिल सकती है, खासकर वहां ज्यादा जहां स्पर्म व्हेल नजर आती हैं. कई बार ये समुद्र के पानी के साथ बहते हुए भी किनारे तक आ जाती हैं और हवा मिलने के साथ कठोर होती जाती हैं


माना जाता है कि व्हेल की उल्टी कुछ ही समय में ठोस पत्थर का रूप ले लेती है. फिर ये जितनी पुरानी होती जाती है, उतनी ही बेशकीमती भी हो जाती है.

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आखिर यह पत्थर है क्या?
कई वैज्ञानिक इसे व्‍हेल की उल्‍टी बताते हैं तो कई इसे मल बताते हैं. यह व्‍हेल के शरीर के निकलने वाला अपशिष्‍ट होता है जो कि उसकी आंतों से निकलता है और वह इसे पचा नहीं पाती है. कई बार यह पदार्थ रेक्टम के ज़रिए बाहर आता है, लेकिन कभी-कभी पदार्थ बड़ा होने पर व्हेल इसे मुंह से उगल देती है. वैज्ञानिक भाषा में इसे एम्बरग्रीस कहते हैं.

स्पर्म व्‍हेल मछली, जिसकी उल्टी या अपशिष्ट बहुत कीमती होता है. इसका पूरा एक बाजार है. इंटरनेट पर भी इसकी खरीदी-बिक्री होती है. माना जा रहा है कि समय के साथ ये और महंगी होती चली जाएगी.


एम्बरग्रीस व्हेल की आंतों से निकलने वाला स्‍लेटी या काले रंग का एक ठोस, मोम जैसा ज्वलनशील पदार्थ है. यह व्हेल के शरीर के अंदर उसकी रक्षा के लिए पैदा होता, ताकि उसकी आंत को स्क्विड(एक समुद्री जीव) की तेज़ चोंच से बचाया जा सके.

आम तौर पर व्हेल समुद्र तट से काफी दूर ही रहती हैं, ऐसे में उनके शरीर से निकले इस पदार्थ को समुद्र तट तक आने में कई साल लग जाते हैं. सूरज की रोशनी और नमकीन पानी के संपर्क के कारण यह अपशिष्ट चट्टान जैसी चिकनी, भूरी गांठ में बदल जाता है, जो मोम जैसा महसूस होता है.

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व्हेल की पेट से निकलने वाली इस एम्बरग्रीस की गंध शुरुआत में तो किसी अपशिष्ट पदार्थ की ही तरह होती है, लेकिन कुछ साल बाद यह बेहद मीठी हल्‍की सुगंध देता है. इसे एम्बरग्रीस इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह बाल्टिक में समुद्र तटों पर मिलने वाले धुंधला एम्बर जैसा दिखता है. यह इत्र के उत्पादन में प्रयोग किया जाता है और इस वजह से काफी कीमती होता है. इसकी वजह से इत्र की सुगंध काफी समय तक बनी रहती है. इसी वजह से वैज्ञानिक एम्बरग्रीस को तैरता सोना भी कहते हैं. इसका वज़न 15 ग्राम से 50 किलो तक हो सकता है.

परफ्यूम के अलावा कहां इस्तेमाल?
एम्बरग्रीस ज्यादातर इत्र और दूसरे सुगंधित उत्पाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. एम्बरग्रीस से बना इत्र अब भी दुनिया के कई इलाकों में मिल सकता है. प्राचीन मिस्र के लोग एम्बरग्रीस से अगरबत्ती और धूप बनाया करते थे. वहीं आधुनिक मिस्र में एम्बरग्रीस का उपयोग सिगरेट को सुगंधित बनाने के लिए किया जाता है. प्राचीन चीनी इस पदार्थ को "ड्रैगन की थूकी हुई सुगंध" भी कहते हैं.

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यूरोप में ब्लैक एज (अंधकार युग) के दौरान लोगों का मानना ​​था कि एम्बरग्रीस का एक टुकड़ा साथ ले जाने से उन्हें प्लेग रोकने में मदद मिल सकती है. ऐसा इसलिए था क्योंकि सुगंध हवा की गंध को ढक लेती थी, जिसे प्लेग का कारण माना जाता था.

इस पदार्थ का भोजन का स्वाद बढ़ाने के और कुछ देशों में इसे सेक्स पावर बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. मध्य युग के दौरान यूरोपीय लोग सिरदर्द, सर्दी, मिर्गी और अन्य बीमारियों के लिए दवा के रूप में एम्बरग्रीस का उपयोग करते थे.
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