क्यों WHO ने फिर दी चेतावनी, महामारी बन सकता है कोरोना

कुछ सैलानियों की ओर से इस संबंध एम्बेसी में की गई शिकायत के बाद में मामला केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय तक पहुंच गया है.

डब्ल्यूएचओ और यूएन ने क्यों COVID-19 से जूझने की पूरी तैयारी करने की चेतावनी दी और ये भी जानें कि किन वर्गों के लिए ज़्यादा खतरनाक है कोरोना वायरस.

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    चीन के बाद दुनिया के और देशों में आमद दर्ज करा चुका कोरोना वायरस (Corona Virus) का खतरा कितना जानलेवा हो सकता है? इसके जवाब में अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) की मानें तो दुनिया एक आशंकित महामारी की चपेट में आ सकती है. आइए जानें कि डब्ल्यूएचओ ने यह बयान जारी करते हुए और क्या अहम बातें की हैं और कोरोना वायरस का खतरा किन वर्गों में ज़्यादा है.

    डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रॉस एडहैनॉम ने जिनेवा में कहा 'हालांकि दुनिया में बड़े पैमाने पर मौतें नहीं देखी जा रही हैं लेकिन सभी देशों को एक संभावित महामारी से जूझने के लिए हर तरह की तैयारी करना चाहिए'. संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने भी यही चेतावनी देते हुए ये भी कहा कि इसे काबू करना अभी मुमकिन दिख रहा है. एडहैनॉम ने ये भी कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वायरस के कारण होने वाली बीमारी में भिन्नता देखी जा रही है.

    यूरोप में फैला कोरोना वायरस
    कोरोना वायरस के कारण COVID-19 बीमारी यूरोप में फैलती दिख रही है. डीडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के मुताबिक इटली में इससे अब तक छह मौतों और 220 संक्रमण मामलों की पुष्टि हो चुकी है. वहीं, फ्रांस में 12, जर्मनी में 16, यूके में 13, स्पेन में 2 और फिनलैंड, स्वीडन व बेल्जियम में एक—एक मामला सामने आया है. चीन और दक्षिण कोरिया के बाद इटली में COVID-19 के सबसे ज़्यादा मामले देखे गए हैं.

    ये है दुनिया का अपडेट
    एशिया में ईरान में खतरा बढ़ा है और अब तक 12 मौतें कोरोना वायरस के कारण होने की खबरें हैं जबकि 60 से ज़्यादा संक्रमण केस सामने आ चुके हैं. वहीं, यूएसए में 14 ताज़े मामले सामने आए हैं. चीनी शहर वुहान से आए जहाज़ में सवारों में पहले ही यहां 39 मामले सामने आ चुके थे.

    बुज़ुर्गों और बीमारों को ज़्यादा खतरा
    COVID-19 का खतरा उम्रदराज़ों और उन्हें ज़्यादा बताया गया है, जो पहले ही किसी बीमारी से जूझ रहे हैं. इस वर्ग में COVID-19 बीमारी के गंभीर रूप के विकसित होने की आशंकाएं ज़्यादा हैं. द साइंटिस्ट की एक ताज़ा रिपोर्ट में कोरोना वायरस के करीब 45 हज़ार मामलों के विश्लेषण से तैयार डेटा के हवाले से कहा गया है कि इस वायरस से संक्रमण से ग्रस्त लोगों में मृत्यु दर 10.5 फीसदी है. डायबिटीज़, कैंसर और सांस संबंधी गंभीर रोगों के मरीज़ों को ज़्यादा खतरा बताया गया है.

    वृद्धों को भी इस वायरस से संक्रमण का खतरा ज़्यादा है जबकि ये भी कहा गया है कि इस वर्ग में संभव है कि कई की जांच भी न हो पाये. वहीं डब्ल्यूएचओ के पिछले हफ्ते जारी बयान के मुताबिक बच्चों में भी यह संक्रमण देखा जा रहा है लेकिन, नौ साल से कम उम्र के बच्चों में अब तक कहीं भी संक्रमण का मामला नहीं है.

    महिलाओं से ज़्यादा पुरुषों को खतरा
    द साइंटिस्ट की रिपोर्ट की मानें तो कोरोना वायरस महिलाओं के बजाय पुरुषों के लिए ज़्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. विश्लेषण के डेटा के हवाले से कहा गया है कि SARS-CoV-2 से संक्रमण के मामलों में मृत्यु दर पुरुषों में 2.8 फीसदी देखी गई जबकि महिलाओं में 1.7 फीसदी. हालांकि डेटा के विश्लेषण में ये भी कहा गया है कि इन आंकड़ों के बावजूद यह कहना जल्दबाज़ी है कि यह रोग लिंगभेद करता है. अभी और देशों के और मरीज़ों की स्थिति का अध्ययन करने की ज़रूरत होगी.

    इसलिए COVID-19 है बीमारी का नाम
    कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी को यह नाम दिया गया है जिसमें Co का मतलब कोरोना, VI का मतलब वायरस, D का मतलब डिसीज़ और 19 का मतलब साल 2019 है. यानी 2019 में सामने आए कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी. इसके लक्षण सर्दी के कारण होने वाले रोगों और निमोनिया जैसे ही सामान्य रूप से देखे जाते हैं लेकिन ये घातक साबित हो सकते हैं.
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