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कर्नाटक में क्यों हो रहा है जीसस की 114 फीट ऊंची प्रतिमा का विरोध

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Updated: January 14, 2020, 7:46 PM IST
कर्नाटक में क्यों हो रहा है जीसस की 114 फीट ऊंची प्रतिमा का विरोध
कर्नाटक में प्रस्तावित ईसा मसीह की प्रतिमा

कर्नाटक में जीसस की 114 फुट ऊंची प्रतिमा बनाने का प्रस्ताव था. इस पर काम शुरू भी हो गया था लेकिन आखिर कौन सी वजह है, जिसके चलते अब इस पर काम रोक दिया गया है

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  • Last Updated: January 14, 2020, 7:46 PM IST
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कुछ दिनों पहले कर्नाटक में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची जीसस (ईसा मसीह) की प्रतिमा बनाने की घोषणा हुई. फिर इस पर काम शुरू भी हो गया लेकिन भारी विरोध और विवाद के बाद इसका काम रोक दिया गया. अगर ये मूर्ति बनती तो ये ब्राजील की जीसस की प्रतिमा को पीछे छोड़ देती.

पिछले महीने इस प्रतिमा का निर्माण शुरू हुआ था. विवादों में घिरने के कारण कुछ दिन बाद ही उसे रोक दिया गया. ये प्रतिमा सफेद ग्रेनाइट से 114 फुट ऊंची बनाई जानी है, ये रियो की मूर्ति से ऊंचाई में थोड़ी कम है, हालांकि इसका आधार 'क्रिस्ट द रेडमीमर' से बड़ा रखने की योजना है.

ये प्रतिमा कर्नाटक के कनकपुरा में प्रस्तावित थी. हाल में करीब एक हजार लोगों ने हाथों में भगवा झंडा लेकर कनकपुरा में विरोध प्रदर्शन किया. हाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी इस प्रतिमा के निर्माण के विरोध में कर्नाटक राज्य सरकार को चेतावनी दी थी.

विरोध की क्या है वजह 

विरोध की वजह ये बताई जा रही है कि हैरोबेले नाम के ईसाई बहुल गांव में जिस पहाड़ी पर मूर्ति बनाने की योजना है, वहां हिंदू देवता का निवास है. हालांकि यहां कोई मंदिर नहीं है. राज्य की बीजेपी सरकार विपक्षी दल कांग्रेस पर सरकार में रहते हुए अवैध तरीके से जमीन आवंटित करने का आरोप लगा रही है.

क्राइस्ट की 114 फुट ऊंची प्रतिमा के निर्माण के विरोध में कर्नाटक में जुलूस


कर्नाटक में ईसाई आबादी कितनी कर्नाटक की साढ़े छह करोड़ की आबादी में ईसाई एक फीसदी से भी कम है. भारत में लंबे समय से मिशनरियों पर पैसे के बदले धर्म परिवर्तन के आरोप लगते रहे हैं. इसे लेकर कई हिंदू संगठन मिशनरीज का विरोध भी करते रहे हैं. पिछले साल ही एक हिंदू संगठन के छह सदस्यों को ईसाई तीर्थयात्रियों के समूह पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

हालांकि इस प्रतिमा विवाद के सामने आने के बाद कर्नाटक सरकार पर भेदभाव के आरोप लग रहे हैं. राज्य सरकार टीपू सुल्तान की जयंती पर भी बैन लगा चुकी है. मैसूर के राजा टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ी थीं.

क्या है धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति 
पिछले साल ही अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग ने कहा था कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता में गिरावट देखी जा रही है. हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था.

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First published: January 14, 2020, 7:15 PM IST
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