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क्या सबसे शक्तिशाली सैन्य कमांडर होंगे बिपिन रावत, जानें CDS के पावर

बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ हैं

सीडीएस (CDS) के पद को लेकर कई तरह के सवाल हैं. मसलन सीडीएस के पास क्या अधिकार होंगे, क्या ये तीनों सेना प्रमुखों के ऊपर का पद है..

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    जनरल बिपिन रावत (General Bipin Rawat) देश के पहले चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ (CDS) बन चुके हैं. उन्होंने अपना कार्यभार संभाल लिया है. वो देश के पहले फोर स्टार जनरल हैं. नए साल में रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) और तीनों सेना से संबंधित ये नए तरह का बदलाव है, जिसे समझे जाने की जरूरत है.

    सीडीएस के पद को लेकर कई तरह के सवाल हैं. मसलन सीडीएस के पास क्या अधिकार होंगे, क्या ये तीनों सेना प्रमुखों के ऊपर का पद है, क्या अब सीडीएस के हाथ ही तीनों सेना की जिम्मेदारी होगी और बाकी देशों में सीडीएस का क्या काम होता है और उनके पास कितने अधिकार होते हैं?

    नए सीडीएस के पास होंगी दो अहम और बड़ी जिम्मेदारी
    नए सीडीएस बिपिन रावत के पास दो बड़ी जिम्मेदारी होगी. पहली- वो चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी (Chiefs of Staff Committee) के स्थायी चेयरमैन होंगे. तीनों सेना प्रमुख इस कमिटी के सदस्य होते हैं. पहले की व्यवस्था में तीनों सेना प्रमुखों में से सबसे सीनियर प्रमुख को इसका चेयरमैन बनाया जाता था. बारी-बारी से वरिष्ठता के आधार पर चेयरमैन बदलते जाते थे. अब सीडीएस स्थायी तौर पर इसके चेयरमैन होंगे. चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख के तौर पर सीडीएस की भूमिका मिलिट्री के अंतर्गत होगी.

    सीडीएस की दूसरी बड़ी जिम्मेदारी होगी- वो मंत्रालय में डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर (DMA) के प्रमुख होंगे. सीडीएस की तरह ये डिपार्टमेंट भी नया बना है. डिफेन्स मिनिस्ट्री में चार डिपार्टमेंट हैं- डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस, डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रॉडक्शन, डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट और डिपार्टमेंट ऑफ एक्स सर्विसमेन वेलफेयर. इन सबके प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी होते हैं.

    अब नया बना डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर इन सारे डिपार्टमेंट्स को कंट्रोल करेगा, सारे डिपार्टमेंट्स की समस्याएं देखेगा. जिसके प्रमुख होंगे सीडीएस. डीएमए प्रमुख के तौर पर सीडीएस बिपिन रावत की भूमिका रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत होंगी.

    will bipin rawat be the most powerful military commander know the power of chief of defence staff cds
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ बिपिन रावत


    सीडीएस के बाद भी तीनों सेना प्रमुखों की भूमिका कम नहीं हुई है
    सीडीएस नाम का नया पद बनने के बाद आमतौर पर ऐसा समझा जा रहा है कि ये तीनों सेना प्रमुखों के ऊपर का पद होगा. हालांकि ऐसा नहीं है. तीनों सेना प्रमुख पहले की तरह रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को अपनी सलाह देते रहेंगे. सरकार ने ये भी साफ किया है कि सीडीएस किसी भी तरह के मिलिट्री कमांड नहीं देंगे. एक मसले पर सीडीएस सेना के तीनों प्रमुखों से ज्यादा प्रभुत्व वाले साबित हो सकते हैं. वो है- सेना में प्रमोशन, पोस्टिंग और अनुशासन संबंधित सारी कार्रवाई अब डिफेंस मिलिट्री अफेयर के अंतर्गत आएगा और सीडीएस इसके प्रमुख होंगे.

    सीडीएस के पास किस तरह के काम होंगे
    सीडीएस के पास तीन साल का कार्यकाल होगा. इस दौरान वो तीनों सेनाओं के जॉइंट ऑपरेशन, लॉजिस्टिक सपोर्ट, ट्रांसपोर्ट, ट्रेनिंग, सपोर्ट सिस्टम, संचार और रिपेयर और मेंटेनेंस के कामों को देखेंगे. डिफेंस ऑफ मिलिट्री अफेयर्स के चीफ होने के नाते सीडीएस सेना के संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और तालमेल के लिए काम करेंगे.

    सीडीएस का पद कैबिनेट सचिव के स्तर का होगा. लेकिन औपचारिक तौर पर वो एक ऐसे डिपार्टमेंट के प्रमुख होंगे जो किसी सचिव द्वारा संचालित होगा.

    दूसरे देशों में क्या है सीडीएस की स्थिति
    अमेरिका, ब्रिटेन, रुस, आस्ट्रेलिया और चीन जैसे देशों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की तरह का पद होता है. लेकिन इन देशों में इस पद पर बैठे अधिकारियों के अधिकार और काम-काज के तरीके में अंतर है. अमेरिका में इस पद को चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी (CJCSC) कहा जाता है. अमेरिका में सीजेसीएससी के पास बहुत अधिक अधिकार होते हैं.

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    साउथ ब्लॉक में जनरल बिपिन रावत


    इस पद पर बैठे सैन्य अधिकारियों को विधायी शक्तियां और दूसरे विलक्षण अधिकार मिले होते हैं. ये सेना का सबसे सीनियर अधिकारी और राष्ट्रपति का मिलिट्री एडवाइजर होता है. वो नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, होमलैंड सिक्योरिटी काउंसिल और डिफेंस सेक्रेट्री को निर्देश दे सकता है.सीजेसीएससी के पद पर बैठा अधिकारी सिर्फ सैन्य संचालन का आदेश नहीं दे सकता है. इसके अधिकार सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति के पास होते हैं.

    इसी तरह से चीन में इस तरह के पद पर बैठै सैन्य अधिकारी के पास बहुत अधिक अधिकार होते हैं. ये सेंट्रल मिलिट्री कमिशन के जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट का कमांडर होता है. सेंट्रल मिलिट्री कमिशन चीन की सेना पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) को संचालित करती है. पीएलए के हेडक्वाटर्स इसके अंतर्गत आते हैं. 2016 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिलिट्री रिफॉर्म के जरिए इस तरह की व्यवस्था की थी.

    इसी तरह से चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ ऑफ द रसियन आर्म्ड फोर्सेज, रुस की सेना का सुप्रीम कमांडर होता है. रुस में ये 1812 से व्यवस्था चली आ रही है.

    भारत ने कहां से ली है ऐसी व्यवस्था
    भारत ने ब्रिटेन से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की व्यवस्था अपनाई है. सीडीएस ब्रिटेन में आर्म्ड फोर्सेज का प्रमुख होता है. ब्रिटेन में इस पद पर बैठा सैन्य अधिकारी सबसे सीनियर मिलिट्री सलाहकार होता है. ये रक्षामंत्री और प्रधानमंत्री को रक्षा मामलों पर सलाह दे सकता है. ब्रिटेन में ये पद 1959 में बना था.

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