क्या सर्दियों में नया सियाचिन बन जाएगा पूर्वी लद्दाख? जवानों को ठंड से बचाने के लिए खास इंतजामों की जरूरत

लद्दाख में भारतीय सैनिक. (फाइल फोटो)
लद्दाख में भारतीय सैनिक. (फाइल फोटो)

एक्सपर्टस पूर्वी लद्दाख की तुलना सियाचिन से करने लगे हैं. क्योंकि सर्दी के मौसम में यहां भी हालात गंभीर हो जाते हैं. बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो जाती हैं, जिससे सैनिकों तक जरूरी चीजें पहुंचाना मुश्किल हो जाता है. यहां पारा माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक कम हो जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 3:56 PM IST
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नई दिल्ली. भारत (India) में ठंड ने दस्तक दे दी है और गर्मियों में शुरू हुआ भारत-चीन विवाद (India- China Conflict) का अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है. सीमा पर तनाव के अलावा इस बार चिंता का एक विषय ठंड भी है, क्योंकि अभी अक्टूबर आधा ही गुजरा है और पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में पारा तेजी से गिरने लगा है. एक्सपर्ट्स ने पहले ही लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (Line of Actual Control) की तुलना सियाचिन (Siachen) से करनी शुरू कर दी है. खास बात है कि सियाचिन को धरती की सबसे मुश्किल जगहों में से एक माना जाता है. इसके अलावा यह दुनिया की सबसे ऊंची, खर्चीली और जोखिम भरी रणभूमि है.

पूर्वी लद्दाख में क्या हैं हालात?
पूर्वी लद्दाख के हालात भी सियाचिन से मिलते जुलते हैं. हालांकि, यहां का पारा (Temperature) सियाचिन जितना नीचे नहीं होता है. पूर्वी लद्दाख में सर्दियों के मौसम में पारा माइनस 20 डिग्री सेल्सियस (-20 Degree Celsius) तक गिर जाता है. जबकि, सियाचिन में 76 वर्ग किमी के इलाके में यह आंकड़ा माइनस 60 डिग्री सेल्सियस (-60 Degree Celsius) तक कम हो जाता है.

ऐसा माना जाता है कि 15 जून को चीनी सैनिकों से हुई झड़प (Clash) के दौरान हमारे कुछ जवान गलवान नदी (Galwan River) के जमा देने वाले तापमान का शिकार हो गए थे. यहां भारत को अच्छी खासी संख्या में आर्कटिक टेंट और सर्दियों के उपकरण खरीदने की जरूरत है. यहां जल्द ही बेस कैंप्स को रणभूमि से जोड़ने वाली सड़क बर्फ के कारण बंद हो जाएगी. जिसके कारण नई दिल्ली में राशन, केरोसीन हीटर, ईंधन और जरूरी दवाइयों का स्टॉक रखना जरूरी हो जाएगा. इसके अलावा जवानों को अपने बड़े हथियार, तोपों को भी बर्फबारी से पहले सड़क से हटाना होगा.
सियाचिन: खराब मौसम के कारण शहीद हुए कई सैनिक


1984 से लेकर अब तक सियाचिन में करीब एक हजार भारतीय सैनिक (Indian Soldiers) शहीद हो चुके हैं. इनमें से ज्यादातर की मौत का कारण खराब मौसम रहा है. करीब 24 हजार फीट ऊंची इस रणभूमि पर मौत का बड़ा कारण हाइपोथर्मिया है. हाइपोथर्मिया में इंसान के शरीर के अंदर की गर्मी तेजी से कम होने लगती है, जिसकी वजह से शरीर का तापमान गिरने लगता है. इसके अलावा ग्लेशियर, हिमस्खलन, दरारें, बर्फानी तूफान, हाइपॉक्सिया भी बड़े कारण हैं.

खर्चीला है यहां देश की सुरक्षा करना
इतनी ऊंचाई पर सामान की ढुलाई सबसे मुश्किल काम है. यहां हालात इतने खराब होते हैं कि हेलीकॉप्टर्स को भी अपनी उड़ने की सीमा को पार करना पड़ता है. ताकि, जवानों को सही समय पर चीजें उपलब्ध कराई जा सकें. एक अनुमान के मुताबिक, सियाचिन में शांति बनाए रखने के लिए भारत रोज 6 करोड़ रुपये खर्च करता है. सालाना हिसाब लगाए तो यह खर्च 2190 करोड़ रुपये तक हो सकता है. पूर्वी लद्दाख में भारत के करीब 50 हजार सैनिक तैनात हैं.

सियाचिन की तरह ही पूर्वी लद्दाख में भी खर्च बड़े स्तर पर होता है. एक अनुमान के अनुसार, 300 किमी तक फैली लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर तैनात 30 हजार सैनिकों पर 100 करोड़ रुपये रोज खर्च किए जाते हैं. जबकि, यहां सालाना खर्च 36,500 करोड़ रुपये हो सकता है.
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