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क्या अब चली जाएगी कुलदीप सेंगर की विधायकी, कितनी सजा होगी

News18Hindi
Updated: December 16, 2019, 5:23 PM IST
क्या अब चली जाएगी कुलदीप सेंगर की विधायकी, कितनी सजा होगी
उन्नाव रेप केस के आरोपी विधायक सेंगर

कुलदीप सेंगर को अदालत ने आईपीसी की धारा 376 और POCSO अधिनियम की धारा 5 (सी) के तहत दोषी ठहराया गया है. क्या अब वो विधायक पद के अयोग्य हो जाएंगे. जिन धाराओं में उन्हें दोषी पाया गया है, जानिए उसमें आमतौर पर कितनी सजा होती है

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उन्नाव रेप कांड में दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है. उन्नाव से बीजेपी के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार दिया गया है. अब इसके बाद कानूनी तौर पर क्या होगा?  उनकी विधायकी पर इस फैसले से क्या असर होगा? उन्हें कम से कम कितनी सजा होगी? आइए जानते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2013 में लिली थामस बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई करते हुए फैसला दिया था कि अगर कोई विधायक, सांसद या विधान परिषद सदस्य किसी भी अपराध में दोषी पाया जाता है तो इसके चलते उसे कम से कम दो साल की सजा होती है वो तुरंत अयोग्य हो जाएगा यानी जनप्रतिनिधि नहीं रहेगा. उस योग्यता को वो तुरंत गंवा देगा.

अब कुलदीप सिंह सेंगर के साथ भी यही होगा. क्योंकि बलात्कार के मामले में अगर अदालत ने उसे दोषी करार दे दिया है तो किसी भी तरह के मामले में कम से कम पांच साल की सजा होती है. अगर उसे ये सजा हुई तो वो तुरंत विधायकी गंवा देगा.

क्या सीट पर बना रह सकता है

पहले दोषी जनप्रतिनिधि तब तक सीट पर रहता है, जब तक कि निचली अदालत से दोषी ठहराने के बाद वो तमाम ऊपरी अदालतों में अपील करता था और वहां उसका मामला चल रहा होता था लेकिन अब ऐसा नहीं है.

कोर्ट ने ये भी प्रावधान किया था कि अगर कोई जनप्रतिनिधि आर्थिक से लेकर किसी भी तरह के अपराध में दोषी पाया जाता है और उसे दो साल या ज्यादा की सजा होती है तो वो सजा के दौरान पांच साल के कार्यकाल वाला कोई चुनाव भी नहीं लड़ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 में फैसला दिया था, जिसके तहत अगर कोई जनप्रतिनिधि दोषी करार दिया गया और उसे दो साल की सजा हुई तो वो पद के अयोग्य हो जाएगा
कब तक कर सकते हैं अपील 
हालांकि सेक्शन 8(4) के जन प्रतिनिधि कानून के तहत कोई भी जनप्रतिनिधि किसी अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद तीन महीने के भीतर ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस फैसले को पलटने के लिए कानून लाने का प्रयास किया था.

यूपीए ने जनप्रतिनिधियों को बचाने की कोशिश की थी
सरकार ने वर्ष 2013 में जनप्रतिनिधि कानून में संशोधन के लिए एक बिल 30 अगस्त 2013 में राज्यसभा में पेश किया. जिसे तत्कालीन कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने पेश किया. इसमें प्रावधान था कि जन प्रतिनिधि दोषी करार दिए जाने के तुरंत बाद अयोग्य नहीं होंगे. इस बारे में केंद्र सरकार ने एक रिव्यू पिटीशन भी सुप्रीम कोर्ट में फाइल किया लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया.

इसके बाद 24 सितंबर को एक अध्यादेश के जरिए सरकार ने इस बिल को फिर प्रभाव में लाने की कोशिश की लेकिन तब कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी का मानना था कि ये अध्यादेश एकदम फालतू है, इसे नहीं लाया जाना चाहिए. इसके बाद सरकार ने इसे समेट लिया. हालांकि माना जा रहा था कि सरकार चारा घोटाले में दोषी ठहराए जा चुके लालू यादव को बचाने का प्रयास कर रही है. सरकार ने राहुल गांधी के रुख के पांच दिनों के भीतर बिल और अध्यादेश दोनों वापस ले लिया.

कितने जनप्रतिनिधि अब तक अयोग्य हुए हैं
इस बिल को आने के बाद से अब तक 11 सांसद और विधायक विभिन्न अपराधों में दोषी ठहराए जा चुके हैं, जिसमें जयललिता और लालू यादव शामिल हैं.

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कुलदीप सिंह सेंगर बीजेपी के तीसरे विधायक हैं, जिन्हें अदालत ने दोषी करार दिया है और वो पद के अयोग्य साबित हो सकते हैं. अगर वो अयोग्य साबित हुए तो ना तो चुनाव लड़ पाएंगे और ना ही विधायक पद पर रह सकेंगे.


दोषी ठहराए गए बीजेपी के तीसरे विधायक 
कुलदीप सिंह सेंगर बीजेपी के तीसरे जनप्रतिनिधि हैं, जो अयोग्य साबित होंगे. सबसे पहले बीजेपी के महाराष्ट्र के विधायक बिजली चोरी में दोषी ठहराए गए थे तो उसके बाद मध्य प्रदेश में विधायक आशारानी को अपनी नौकरानी के लिए आत्महत्या के हालात पैदा करने का दोषी पाया गया था. सेंगर पार्टी के तीसरे विधायक हैं. बीजेपी अयोग्य हुए जनप्रतिनिधियों के सूची में तीन विधायकों के साथ टॉप पर है. जेडीयू, आरजेडी, अन्नाद्रमुक, शिवसेना, झारखंड पार्टी और कांग्रेस के विधायक अयोग्य करार दिये जा चुके हैं.

सेंगर को कितनी सजा हो सकती है
कुलदीप सिंह सेंगर को चूंकि बलात्कार के मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया है. उन्हें धारा 376 के तहत सजा होगी. किसी भी महिला के साथ बलात्कार करने के आरोपी पर धारा 376 के तहत जब मुकदमा चलाया जाता है. जिसमें अपराध सिद्ध होने की दशा में दोषी को कम से कम पांच साल व अधिकतम 10 साल तक कड़ी सजा दिए जाने का प्रावधान है. कई मामलों में अदालत पर्याप्त और विशेष कारणों से सजा की अवधि को कम कर सकती है.

पास्को में कितनी सजा 
कुलदीप सेंगर को अदालत ने आईपीसी की धारा 376 और POCSO अधिनियम की धारा 5 (सी) के तहत दोषी ठहराया गया. पास्को एक्ट अपने आपमें गंभीर एक्ट है. जिसमें सात साल की सजा से लेकर उम्रकैद भी हो सकती है.

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First published: December 16, 2019, 4:30 PM IST
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