नोबेल विजेता चर्चिल ने ऐसा क्या किया था, जिससे 30 लाख से ज्यादा भारतीय तड़प-तड़पकर मर गए

प्रोटेस्टर्स ने ब्रिटेन के पूर्व प्राइम मिनिस्टर विंस्टन चर्चिल की मूर्ति पर काले अक्षरों में लिखा- ये शख्स नस्लभेदी था
प्रोटेस्टर्स ने ब्रिटेन के पूर्व प्राइम मिनिस्टर विंस्टन चर्चिल की मूर्ति पर काले अक्षरों में लिखा- ये शख्स नस्लभेदी था

बंगाल में भूख से मरते लोगों को देखकर चर्चिल (Winston Churchill) ने कहा था- खरगोशों की तरह पैदा होते जाते हैं. अब मौत उनकी अपनी गलती है. 

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अमेरिका में अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत (death of George Floyd in America) के बाद से दुनिया के बहुत से देशों में हिंसक प्रदर्शन (violence protest in world) हो रहे हैं. लंदन (London) इनमें सबसे आगे है. इन्हीं प्रदर्शनों के बीच प्रोटेस्टर्स ने ब्रिटेन के पूर्व प्राइम मिनिस्टर विंस्टन चर्चिल (Winston Churchill) की मूर्ति पर काले अक्षरों में लिखा- ये शख्स नस्लभेदी (racist) था. और मूर्ति से तोड़फोड़ की. चर्चिल को साल 1942 में बंगाल (वर्तमान बांग्लादेश, भारत का पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा) में आई भुखमरी (great famine in West Bengal) के लिए जिम्मेदार माना जाता है, जिसकी वजह से 30 लाख से ज्यादा बंगालियों की जान गई थी. हालांकि मॉडर्न ब्रिटेन में अब भी चर्चिल को हीरो की तरह देखा जाता है, जबकि बहुत सी मांगें उठ रही हैं कि नरसंहार के बारे में भी ब्रिटिश स्कूलों में पढ़ाया जाए.



ब्रिटेन के ऑक्सफोर्डशायर में नवंबर 1874 में जन्मे चर्चिल को राजनेता और लेखक के तौर पर भी जाना जाता है, जिन्हें साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार भी मिला. वे साल 1940 से 1945 के बीच ब्रिटेन के पीएम रहे. उसी दौरान सेकंड वर्ल्ड वॉर में भी उन्होंने देश की अगुवाई की. 20वीं सदी के सबसे चर्चित लोगों में से एक चर्चिल युद्ध और साहित्य का मिलाजुला चरित्र था. माना जाता है कि चर्चिल की नीतियों के कारण भी अंग्रेजी काल में बंगाल में भीषण अकाल पड़ा, जिसमें 30 लाख से ज्यादा लोग तड़प-तड़पकर मर गए.
उस दौर की तस्वीरें दिल दहला देती हैं, जिसमें हड्डियों का ढांचा बने लोग आस से देख रहे हैं




क्यों पड़ा था बंगाल में अकाल
तब बंगाल में अनाज का उत्पादन काफी अच्छा था. उस दौरान विश्व युद्ध में बर्मा पर जापान ने कब्जा कर लिया था. इससे वहां से चावल का आयात रुक गया था. ये देखते हुए ब्रिटिश आर्मी ने चर्चिल के आदेश पर अपने लिए चावल की जमाखोरी कर ली. एक वक्त पर भरपेट खाने के बाद भी अनाज बचा पा रही जनता महंगे दामों पर अपना ही चावल खरीदने या मरने को मजबूर कर दी गई. इसके साथ ही देश के इस हिस्से में अनाज की आपूर्ति भी बंद कर दी गई क्योंकि अंग्रेजों को डर था कि कहीं अनाज जापानियों के हाथ न लग जाए.

अकाल की एक वजह ये भी थी कि ज्यादा धान उपजती देख ब्रिटिश शासकों ने अनाज उगाने पर रोक लगा दी और उसकी जगह किसानों को नील और अफीम की खेती को कहा. इसे निर्यात करके अंग्रेजों को मोटी रकम मिल पाती थी. इस वजह से भी खाद्यान्न का उत्पादन एकदम से गिर गया, जबकि भंडार में रखा अनाज अंग्रेजों के पास जमा हो चुका था. इसके नतीजे में साल 1943 में भयंकर अकाल पड़ा.

चर्चिल की खून की प्यास 30 लाख से ज्यादा भारतीयों की मौत से भी शांत नहीं हुई


कैसा था वो मंजर
सड़कों पर लोग भूख से मरने लगे. आज भी उस दौर की तस्वीरें दिल दहला देती हैं, जिसमें हड्डियों का ढांचा बने लोग आस से देख रहे हैं. लोग घास खाने पर मजबूर हो गए. ये भी कहा जाता है कि लोग नरमांस तक खाने लगे थे ताकि किसी तरह से जान बच सके. जब कुछ अधिकारियों ने बंगाल में मरते लोगों के लिए मदद की बात की जो चर्चिल ने क्रूरता से कहा- मुझे भारतीयों से नफरत है. वे गंदे लोग हैं, जिनका धर्म भी क्रूरता से भरा हुआ है. बंगाल की भुखमरी की खबर दुनियाभर में फैलने लगी और बहुत से देशों ने मदद की पेशकश की. जैसे अमेरिका और कनाडा चावल की भरपूर मात्रा वहां भेजना चाहते थे लेकिन चर्चिल ने मदद लेने से साफ इनकार कर दिया. वे नहीं चाहते थे कि भारतीय जिंदा ही बचें. इस दौरान जिंदा रहने के लिए हजारों औरतें वेश्यावृत्ति में आ गईं. माना जाता है कि उस दौर का अकाल न होता तो आज बंगाल की सूरत और ही होती.

चर्चिल की खून की प्यास 30 लाख से ज्यादा भारतीयों की मौत से भी शांत नहीं हुई. देश के विभाजन पर उन्होंने कहा था- मैं उन्हें (भारतीयों को) गृहयुद्ध में मरता देखना चाहता हूं. इस भूतपूर्व ब्रिटिश पीएम को अश्वेत नस्लों से भारी नफरत थी. साल 1896 में क्यूबा पर चिंता जताते हुए इसने लिखा था कि मुझे डर है कि ये देश भी एक और अश्वेत रिपब्लिक में न बदल जाए. यहां एक और से चर्चिल का मतलब था हैती देश, जिसने सबसे पहले खुद को गुलामी से आजाद किया था. चर्चिल की अगुवाई में ब्रिटिश सेना ने एथेंस में नरसंहार किया. दिसंबर 1944 में हुए इस नरसंहार में 30 लोग मारे गए और 130 के लगभग गंभीर रूप से घायल हुए.

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