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within 30 minutes indian army capture royal palace and sikkim became 22 state of india

30 मिनट में सैनिकों ने किया राजमहल पर कब्जा, फिर आज ही सिक्किम बना 22वां राज्य

सिक्किम की राजधानी (shutterstock)

सिक्किम की राजधानी (shutterstock)

15 मई, 1975 को तत्‍कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के हस्ताक्षर के साथ ही सिक्किम भारत का 22वां राज्य बन गया. हालांकि सिक्किम को भारत में मिलाने की नामग्‍याल राजवंश का शासन समाप्त हो गया. दरअसल इसकी कोशिश भारत ने अपनी सेना के जरिए करीब एक महीना पहले शुरू की थी. सिक्किम का भारत में विलय कतई आसान नहीं था लेकिन इंदिरा गांधी ने तब ये कर दिखाया था

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    जब भारत आजाद हुआ तो उसने सिक्किम के चोग्याल से विलय पर साइन करने के लिए कहा लेकिन अगले करीब ढ़ाई दशकों तक सिक्किम इससे इनकार करता रहा. आखिर अप्रैल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बड़ा फैसला लिया. उन्होंने  उत्तर पूर्व के इस राज्य को देश में मिलाने का फैसला कर लिया. ये काम चोग्याल यानि सिक्किम के राजा की तमाम धमकियों के बावजूद किया गया. 06 अप्रैल को भारतीय सेनाओं ने राजमहल पर कब्जा किया. फिर संवैधानिक तौर पर संसद में सिक्किम को मिलाने पर मुहर लगवाई गई. 16 मई 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली के हस्ताक्षर के बाद ये भारत का 22वां राज्य बन गया.

    सिक्किम के भारत में विलय सबसे बड़ी भूमिका रॉ की रही. कहा तो यही ये भी जाता है कि इस पूरे मिशन को रॉ ने बखूबी अंजाम दिया था. आजादी के समय सिक्किम अलग रियासत थी. वहां चोग्याल वंश का राज था. 1947 में सरदार पटेल ने बाकी रियासतों की तरह सिक्किम को भी भारत में मिलना चाहा था लेकिन उस समय चीन का पेंच फंसा हुआ था.

    क्योंकि तब नेहरू को लग रहा था कि अगर भारत विलय के लिए सिक्किम पर आक्रामक हुआ तो चीन वैसा ही कुछ तिब्बत के साथ कर देगा. लिहाजा विलय नहीं हुआ. फिर 1950 में भारत और सिक्किम के बीच एक संधी हुई. अब सिक्किम भारत का प्रोटेक्टोरेट राज्य बन गया. मतलब कि राज्य तो चोग्याल चलाएंगे लेकिन उसके रक्षा और विदेश मामलों को भारत देखेगा.

    भारतीय सैनिकों ने 6 अप्रैल 1975 की दोपहर तक सिक्किम के राजा को राजमहल में बंदी बना लिया था.

    सिक्किम के राजा ने भूटान जैसे दर्जे की मांग की
    1964 में नेहरू के निधन के बाद सिक्किम के राजा पलडेन नामग्याल ने मांग की कि अब सिक्किम को भी भूटान जैसा दर्जा दिया जाए. यानि उसे आजाद देश माना जाए. तब तक इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बन चुकी थीं. उन्होंने नामग्याल की बातों को अनसुना कर दिया. इसके बाद इंदिरा गांधी बांग्लादेश के खिलाफ युद्ध और कांग्रेस की अंतर्कलह से जूझ रही थीं.

    तब इंदिरा ने रॉ के चीफ को बुलाया
    71 के युद्ध में जीत के बाद इंदिरा गांधी ने एक दिन रॉ के चीफ आरएन काव को तलब किया. उन्होंने काव से पूछा, क्या तुम सिक्किम का कुछ कर सकते हो?इंदिरा सिक्किम को पूरी तरह मिलाना चाहती थीं. सिक्किम के राजा के रंगढंग उन्हें बहुत चालाकी भरे लग रहे थे. दूसरे सिक्किम रणनीतिक तौर पर बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण राज्य होता जा रहा था.

    ये था रॉ का प्लान सिक्किम
    इसके बाद कॉव ने एक प्लान बनाकर उसको इंदिरा के सामने पेश किया. प्लान चोग्याल राजशाही को धीरे-धीरे कमजोर करने का था. इसमें सियासी रणनीति की ज्यादा जरूरत थी. स्थानीय पार्टियों की मदद ली गई. सिक्किम नेशनल कांग्रेस के लीडर क़ाज़ी लेनडुप दोरजी ने पहले से ही राजशाही के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी थी. जनता भी आमतौर पर राजशाही को लेकर असंतुष्ट होती जा रही थी.

    सिक्किम में चुनाव हुए
    असंतोष बढ़ने लगा. 1974 में विधानसभा के चुनाव कराए गए. हालांकि चोग्याल राजशाही इस पर कतई राजी नहीं थी. काजी की अगुवाई में उनकी पार्टी जीती और सरकार बनी. फिर विधानसभा में इस सरकार ने ‘द गवर्नमेंट ऑफ़ सिक्किम ऐक्ट 1974’ सदन में पेश किया. जिसके पारित होते ही सिक्किम भारत का एशोसिएट स्टेट बन गया.

    30 मिनट के आपरेशन में राजमहल पर भारतीय सैनिकों का कब्जा
    अब राजशाही को अंदाज हो गया था कि क्या होने जा रहा है. उसने अतंरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिश शुरू की. रॉ के प्लान के तहत सिक्किम में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हुए. फिर 06 अप्रैल 1975 में भारतीय सेना ने राजमहल पर कब्जा करके राजा को अपने नियंत्रण में ले लिया.राजा बहुत नाराज हुआ. धमकियां दीं लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ.

    भारतीय सैनिकों को राजमहल में तैनात 243 गार्डों को काबू में करने में बमुश्किल 30 मिनट लगे. दोपहर 12.45 बजे तक सिक्किम का आजाद देश का दर्जा खत्‍म हो चुका था. चोग्याल को महल में ही नजरबंद कर दिया गया.

    फिर तेज घटनाक्रम
    फिर अगले कुछ दिन बहुत तेज घटनाक्रम वाले रहे. पूरे सिक्किम में विधान सभा की देख रेख में एक रेफ़्रेंडम कराया गया. 97 % जनता ने भारत में विलय के पक्ष में मत दिया. फिर भारतीय संसद में इससे संबंधित प्रस्ताव पास किया गया. राज्यसभा में यह बिल 26 अप्रैल को पास हुआ और 15 मई, 1975 को जैसे ही राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने इस बिल पर हस्ताक्षर किए, चोग्याल राजवंश का शासन समाप्त हो गया.

    Tags: Indira Gandhi, North East, Sikkim

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