मृत महिला के गर्भाशय ट्रांसप्लांट से बच्ची का जन्म, पहली बार हुआ ऐसा

लगभग हर पांच सौ में से एक महिला के गर्भाशय में कोई न कोई दिक्कत होती है, जिसकी वजह से या तो वो प्रेगनेंट नहीं हो पाती या फिर प्रेगनेंसी के दौरान कोई दिक्कत होती है.

News18Hindi
Updated: December 5, 2018, 2:10 PM IST
मृत महिला के गर्भाशय ट्रांसप्लांट से बच्ची का जन्म, पहली बार हुआ ऐसा
प्रतीकात्मक फोटो
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Updated: December 5, 2018, 2:10 PM IST
बिना गर्भाशय की एक 32 बरस की ब्राजीलियन महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया है. लेंसेट मैगजीन में मंगलवार को छपी इस खबर ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया. इसकी वजह है महिला के शरीर में एक मृत महिला की बच्चेदानी का ट्रांसप्लांट किया जाना.

पहली बार किसी मृत महिला का गर्भाशय दूसरी महिला के शरीर में लगाया गया. मेडिकल साइंस में इसे ऐतिहासिक घटना की तरह देखा जा रहा है, जो दुनियाभर में गर्भाशय के बिना जी रही महिलाओं के लिए वरदान साबित हो सकता है. बता दें कि इससे पहले भी गर्भाशय यानी बच्चादानी ट्रांसप्लांट के 11 सफल मामले हुए हैं लेकिन मृत महिला के शरीर से बच्चेदानी लेने से लेकर बच्चे के जन्म तक की सफलता पहली बार ही मिली है. बच्ची अब सालभर की हो चुकी है और एकदम स्वस्थ है.

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क्या है पूरा मामला

मेडिकल जर्नल लेंसेट में 4 दिसंबर को आई जानकारी के मुताबिक, डॉक्टरों ने 45 साल की एक महिला का गर्भाशय निकाला. मृत महिला के पहले से तीन बच्चे हैं, जो कि सामान्य डिलीवरी से हुए. लगभग साढ़े 10 घंटे चले ऑपरेशन में सावधानी से मृतक का गर्भाशय निकाला गया और फिर एक अलग सर्जरी में 32 साल की उस औरत के भीतर ट्रांसप्लांट किया गया. महिला का गर्भाशय नहीं था लेकिन अण्डाशय था यानी आईवीएफ के जरिए बच्चा लाया जा सकता था. ये अपनी तरह का प्रयोग था, जिसपर सरकारी पैसा लगाया गया.



ट्रांसप्लांट के बाद पहली बार पीरियड्स
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सर्जरी सितंबर 2016 में हुई, जिसके महीनेभर के भीतर ही महिला को पहली बार पीरियड्स हुए. बच्चादानी ट्रांसप्लांट करने के 7 महीने बाद महिला का आईवीएफ ट्रीटमेंट हुआ, जिसमें तुरंत ही वो प्रेगनेंट हो गई. प्रेगनेंसी के दौरान लगातार महिला को दूसरी दवाओं के साथ-साथ इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं दी गईं ताकि महिला का शरीर बच्चेदानी को 'फॉरेन पार्टिकल' मानकर रिएक्ट न करे. डॉक्टरों की देखरेख में लगभग 35 सप्ताह के बाद एक स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ. जन्म के तुरंत बाद ही बच्चादानी हटा ली गई क्योंकि महिला को लगातार इम्यूनोसप्रेसिव पर रखना बहुत महंगा साबित होता और ये महिला की सेहत के लिए भी अच्छा नहीं था.

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किनके लिए साबित होगी वरदान
पूरी दुनिया में बहुत सी महिलाएं हैं जिनके गर्भाशय नहीं होता है. ऐसे में उनका मां बनना असंभव होता है और गोद लेना या फिर सरोगेसी ही विकल्प रह जाता है. वो भी कई तरह के नियमों के कारण अक्सर मुमकिन नहीं हो पाता. आजकल बच्चेदानी में गांठों की वजह से कमउम्र में ही बच्चेदानी हटाने की सर्जरी यानी हिस्टेरेक्टॉमी भी आम हो गई है. कमउम्र में ही महिलाओं में ये सर्जरी होने पर उनका मां बनने का सपना अधूरा रह जाता है. ट्रांस महिलाओं में भी खुद का बच्चा जन्म देने की ख्वाहिश रहती है.

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इन तमाम हालातों में ये सर्जरी उम्मीद देती है. सबसे अहम बात ये है कि मृत महिला की बच्चेदानी से बच्चे का जन्म हो सका, जो कि मेडिकल इतिहास में पहली घटना है. इससे पहले जीवित डोनर से गर्भाशय लेने के 11 मामले हुए हैं. मृत डोनर से बच्चेदानी लेने का एक ये भी फायदा है कि सर्जरी के बाद डोनर की सेहत पर अतिरिक्त पैसे या समय नहीं लगाना होगा और सारा ध्यान केवल नई मां और बच्चे पर दिया जा सकेगा.
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