Explained: महिलाओं का वो वस्त्र, जो म्यांमार में सैन्य तानाशाही को डरा रहा है

महिलाएं सारोंग नाम के पारंपरिक कपड़े को सैनिकों के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं (Photo- cnbctv18)

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के विरोध (protest against military coup in Myanmar) में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इस बीच महिलाएं सारोंग (Sarong) नाम के पारंपरिक कपड़े को सैनिकों के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं.

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    म्यांमार में जनवरी के आखिर में घटनाक्रम तेजी से बदला और नई चुनी हुई सरकार को गिराते हुए सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया. फिलहाल वहां सर्वोच्च नेता आंग सान सू समेत सभी नेता हिरासत में हैं. इस बीच जनता सैनिक शासन के खिलाफ विद्रोह पर उतर आई. सड़कों पर सैनिकों और जनता में झड़पों के बीच एक नया ट्रेंड दिख रहा है. म्यांमार की महिलाएं एक खास कपड़े को शहर में जगह-जगह लटकी रही हैं. सारोंग नाम का ये कपड़ा सैनिकों को डरा भी रहा है.

    म्यांमार में आखिर अरब क्रांति जैसे हालात क्यों आ गए, ये समझने के लिए तनाव का कारण समझना होगा. इस देश में पहले से ही सैन्य शासन रहा लेकिन फिर नेता आंग सान सू के राजनीति में आने से हालात बदले. साल 2020 में आंग सान सू ची की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) ने भारी बहुमत से जीत हासिल की. इसके पीछे आंग सान सू ची की लोकप्रियता को कारण बताया गया. हालांकि सेना को शक था कि चुनाव में भारी गड़बड़ी हुई है और इसी वजह से उनकी पार्टी जीती.

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    फिलहाल म्यांमार में सर्वोच्च नेता आंग सान सू समेत सभी नेता हिरासत में हैं (Photo- news18 English via Reuters)


    सेना ने कथित धांधली की जांच की मांग की लेकिन इस मांग को पूरा करने से इनकार करते हुए नई चुनी व्यवस्था ने अपना काम शुरू कर दिया. इसके बाद 1 फरवरी को म्यांमार की सेना ने नव-निर्वाचित संसद की बैठक रोकते हुए नेताओं को गिरफ्तार कर लिया. बता दें कि साल 2011 से पहले इस देश में सेना का ही कब्जा था, यानी लोकतांत्रिक की बजाए सैन्य सरकार थी. अब तख्तापलट के बाद सरकार सेना प्रमुख मिन आंग लाइंग के हाथ में आ गई है.

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    इसके बाद से जनता विरोध में सड़कों पर उतर आई. यहां तक कि सैन्य सरकार उन्हें दबाने के लिए हिंसा का सहारा ले रही है. अब घटनाक्रम में एक नई बात दिख रही है. महिलाएं पहले से ही विरोध का हिस्सा रही थी लेकिन अब वे सैनिकों के अंधविश्वास का सहारा भी उन्हें डराने के लिए ले रही हैं. इसके तहत वे सारोंग नाम का कपड़ा शहर में जगह-जगह लटका रही हैं.

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    तख्तापलट के बाद सरकार सेना प्रमुख मिन आंग लाइंग के हाथ में आ गई है, इसी का विरोध हो रहा है- सांकेतिक फोटो


    सारोंग दरअसल स्त्रियों की कमर पर पहना जाने वाला वस्त्र है. स्थानीय मान्यता के अनुसार अगर कोई पुरुष इस वस्त्र के नीचे से गुजर जाए तो उसका पौरुष खत्म हो जाता है और वो नपुंसक हो जाता है. ये मान्यता म्यांमार में बहुत पक्की है. तो महिलाएं अब इसी डर को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं. वे शहरों के रिहायशी इलाकों में झंडियों की तरह सारोंग लटका रही हैं ताकि सैनिक डर के कारण वहां न आ सकें.

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    इसे सारोंग क्रांति कहा जा रहा है, जिसका असर भी दिख रहा है. सैनिक मर्दानी ताकत खत्म होने के डर से या तो ऐसे इलाकों में प्रवेश ही नहीं कर रहे, या फिर वे पहले इन कपड़ों को हटाते हैं. इतने में जनता को हटने के लिए काफी समय मिल जाता है. यहां तक कि महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान सारोंग से ही बैरिकेड भी बना डाले हैं ताकि सैनिक डरे रहें.

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    म्यांमार में सारोंग का इतिहास काफी पुराना है- सांकेतिक फोटो (flickr)


    म्यांमार में सारोंग का इतिहास काफी पुराना है. सीने से लेकर कमर तक लपेटा जाने वाला ये कपड़ा स्थानीय लोगों में काफी लोकप्रिय है. सारोंग वैसे अंग्रेजी के साथ कई भाषाओं का अपभ्रंश शब्द है, जिसका अर्थ है, ढांकने के लिए. साल 1834 में पहली बार इस शब्द का इस्तेमाल हुआ था. लगभग 1 मीटर चौड़ा और ढाई मीटर लंबा ये कपड़ा पहले महिलाओं के साथ ही पुरुष भी पहना करते थे लेकिन धीरे-धीरे ये महिलाओं तक ही सीमित हो गया. इसे फेमिनिन गुणों वाला माना जाने लगा और तभी ये मान्यता चल पड़ी कि अगर कोई पुरुष सारोंग के नीचे से निकल जाए तो उसकी ताकत चली जाती है.

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    दूसरी ओर म्यांमार में पौरुष के लिए एक खास शब्द है, जिसे हपोन कहते हैं. तो माना जाता है कि सारोंग के संपर्क में आने पर हपोन यानी पौरुष चला जाता है.

    तो अब बर्मीज महिलाएं इसी अंधविश्वास की मदद से सैनिकों को सीमा में रहने के लिए बाध्य कर रही हैं. वैसे सारोंग को केवल लैंगिक भेदभाव के वस्त्रों की तरह नहीं देखा जाता, बल्कि इसे सौभाग्य के प्रतीक की तरह भी देखा जाता रहा है. जैसे पुराने समय में बर्मीज अपने साथ युद्ध में जाते हुए अपनी मां या किसी बुजुर्ग स्त्री के सारोंग का टुकड़ा ले जाता करते थे. ऐसी मान्यता थी कि कपड़े का ये टुकड़ा आशीर्वाद की तरह रक्षा करेगा. अब यही सारोंग सैन्य तानाशाही के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है. पूरे म्यांमार में ये इतना फैल गया है कि इसे सारोंग क्रांति कहा जा रहा है.

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