क्या बिहार चुनाव की तरह West Bengal में भी महिला वोटर करेंगी जीत तय?

संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) को लागू करने के साथ-साथ राजनीतिक और धार्मिक पहचान एवं विकास भी निर्णायक मुद्दा बनकर उभरा है. (सांकेतिक फोटो)

संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) को लागू करने के साथ-साथ राजनीतिक और धार्मिक पहचान एवं विकास भी निर्णायक मुद्दा बनकर उभरा है. (सांकेतिक फोटो)

West Bengal Assembly Election 2021: महिला मतदाताओं की लगातार बढ़ती संख्या अब चुनावी रणनीतियां बदलने लगी है. यही कारण है कि पश्चिम बंगाल में हो रहे चुनाव में सत्ता की दावेदार दोनों प्रमुख पार्टियां, भाजपा (BJP) और टीएमसी (TMC) उन्हें लुभाने की पुरजोर कोशिश में हैं.

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पश्चिम बंगाल (West Bengal) में आज 31 सीटों पर तीसरे चरण की वोटिंग जारी है. इससे पहले दो चरणों में भारी मतदान हो चुका है. इधर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार राज्य में महिला वोटरों (women voters in West Bengal) की संख्या में हुई बढ़त नतीजों में अहम हो सकती है. बता दें कि यही पैटर्न बिहार विधानसभा चुनावों में भी देखने में आया था, जिसे देखते हुए सत्ता के दोनों प्रमुख दावेदार, भाजपा (BJP) और टीएमसी (TMC) महिला वोटरों पर ध्यान दे रहे हैं.

क्या है पश्चिम बंगाल में महिला वोटरों के हालात

राज्य के 7.32 करोड़ मतदाताओं में से 3.73 करोड़ पुरुष और 3.59 करोड़ महिलाएं हैं. यानी महिला वोटरों की संख्या 49 फीसदी से ज्यादा हैं. ऐसे में जाहिर है कि न तो भाजपा और न ही टीएमसी इस समूह को नजरअंदाज कर सकती है. यही कारण है कि 8 मार्च को महिला दिवस के रोज से ही साइलेंट वोटर माने जाने वाले इस तबके को लुभाने की कोशिश होनी लगी.

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राज्य की मुख्यमंत्री और टीएमसी नेता ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने महिला सुरक्षा का जिक्र करते हुए पश्चिम बंगाल को बीजेपी-शासित राज्यों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित बताया. दूसरी ओर भाजपा ने लगभग 85 साल की महिला की पिटाई का मुद्दा उठाते हुए महिला सुरक्षा को घेरा.

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टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने महिला सुरक्षा का जिक्र करते हुए पश्चिम बंगाल को बीजेपी-शासित राज्यों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित बताया




कैसे काम करता है इन वोटरों का गणित

पश्चिम बंगाल में हमेशा से ही साइलेंट वोटरों का गणित चलता रहा है. यहां बता दें कि साइलेंट वोटर वो हैं, जो राजनैतिक वाद-विवाद में उलझे हुए या राजनैतिक चर्चा करते नहीं दिखते, लेकिन चुनावी बाजी को पलटने में जिनका सबसे बड़ा हाथ होता है. आमतौर पर महिलाओं और बुजुर्गों को चुप्पा वोटरों की श्रेणी में रखा जाता है. इनका एक पक्का राजनैतिक मत होता है लेकिन अक्सर ये राजनैतिक गणित बिठाते हुए हाशिये पर रहते हैं.

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ऐसे दिखा बंगाल में बदलाव

बंगाल में साल 2011 के असेंबली चुनाव में लगभग 84 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था और ममता की सरकार बनी थी. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी राज्य में महिला वोटरों की संख्या 82 फीसदी से ज्यादा रही. तब भी टीएमसी ने बढ़त बनाए रखी. इसके बाद साल 2016 के असेंबली चुनाव में एक बार फिर लगभग 83 फीसदी महिलाओं ने वोट दिया और एक बार फिर ममता की सरकार बनी. हालांकि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पश्चिम बंगाल में पहली बार बड़ा फायदा मिला और टीएमसी पहले की अपेक्षा पीछे होने लगी.

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पश्चिम बंगाल में हमेशा से ही साइलेंट वोटरों का गणित चलता रहा है


बीजेपी क्या वादे कर रही 

अब पश्चिम बंगाल चुनाव में दोनों ही प्रमुख पार्टियां मान रही हैं कि महिला मतदान यहां निर्णायक हो सकता है. और यही कारण है कि उन्हें लुभाने में नेता लगे हुए हैं. भाजपा ने अपने मेनिफेस्टो में महिलाओं को ध्यान में रखकर कई घोषणाएं कीं. इसके तहत सरकारी नौकरी में उनके लिए 33 फीसदी रिजर्वेशन से लेकर फ्री ट्रांसपोर्ट और केजी से लेकर पीजी तक की निःशुल्क शिक्षा शामिल है. साथ ही केंद्र की योजनाओं पर भी पार्टी बात कर रही है, जो महिलाओं को ध्यान में रखते हुए है, जैसे उज्ज्वला योजना.

टीएमसी के पास क्या हैं वादे

दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पक्ष में टीएमसी ने बंगाल की बेटी जैसा नारा दिया ताकि वे सीधे महिलाओं से जुड़ सकें. इसके अलावा इस पार्टी के पास कन्याश्री, रूपाश्री और मातृत्व शिशु देखभाल जैसी योजनाएं हैं, जो महिला वोटरों को आकर्षित कर सकती हैं. इनके तहत लड़कियों को शिक्षा और शादी के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. साथ ही दोनों पार्टियों ने महिलाओं को टिकट भी दिया है. टीएमसी ने 50 महिलाओं को टिकट दिया, जबकि बीजेपी ने 32 महिला उम्मीदवार खड़े किए हैं.

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बिहार विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं ने सारा गणित बदलकर रख दिया था


बिहार में हो चुका है खेला

इस बीच बार-बार बिहार विधानसभा चुनावों का जिक्र भी आ रहा है कि कैसे वहां पिछली बार महिला मतदाताओं ने सारा गणित बदलकर रख दिया. यहां याद करें कि ज्यादा चुनावी जानकारों ने अगली सरकार तेजस्वी यादव के महागठबंधन की होने की बात कही थी लेकिन बाद में बाजी पलट गई. बिहार में 119 विधानसभा क्षेत्रों में महिला वोटर भारी संख्या में वोट डालने गईं, जिसे पहले नजरअंदाज कर दिया गया था. और आखिरकार इन्हीं वोटों ने एनडीए को जीत दिलाई. आंकड़ों के मुताबिक वहां 59.9 फीसदी महिलाओं ने वोट किया जबकि 54.7 फीसदी पुरुषों ने. यानी पुरुष मतदाता महिलाओं से कम रहे. जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर महिलाओं का धन्यवाद भी किया था.

फिलहाल ये तो पक्का नहीं कि कौन सी पार्टी पश्चिम बंगाल में अपना परचम फैलाएगी लेकिन पार्टियों के घोषणापत्र और महिलाओं को आकर्षित करने की उनकी कोशिश को देखते हुए ये जरूर साफ है कि जीतेगा वही, जिसके पक्ष में महिला मतदाता होंगी.
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