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महाराजा रणजीत सिंह पर था सास का इस कदर असर, बगैर पूछे नहीं करते थे कोई काम

महाराजा रणजीत सिंह पर था सास का इस कदर असर, बगैर पूछे नहीं करते थे कोई काम

शूरवीर भी थी ये महिला, करती थी सैनिकों की टुकड़ी का नेतृत्व

शूरवीर भी थी ये महिला, करती थी सैनिकों की टुकड़ी का नेतृत्व

शूरवीर भी थी ये महिला, करती थी सैनिकों की टुकड़ी का नेतृत्व

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    हमारे देश के महान शासकों में से एक रहे हैं राजा रणजीत सिंह. रणजीत सिंह की बहादुरी और उनके बेहतर शासन के चलते उन्हें शेर-ए-पंजाब के नाम से भी जाना जाता है. अंग्रेजों को नाकों चने चबवाने वाले इस शेर एक सिर पर भी एक हाथ था. यह था एक महिला का, जिसे रणजीत सिंह अपनी गुरु मां मानते थे और माताजी कह कर संबोधित करते थे. यह महिला और कोई नहीं उनकी सास सदा कौर थीं, जो खुद एक महारानी थीं और कन्हइया मिस्ल की सिपहसालार थीं.



    जब रणजीत सिंह की सास बनीं सदा कौर
    सदा कौर के पति और कन्हइया मिस्ल के वारिस गुरबक्‍श सिंह जब शुककरचकिया मिसल के हाथों मारे गए तो सदा कौर के चारों तरफ खतरा मंडरा रहा था. इसी समय में रणजीत सिंह की तलवार की चमक के साथ ही उनके राज कौशल की चर्चा भी पूरे सिंध में हो रही थी. सदा कौर ने दूर की सोच अपनी बेटी महताब कौर की शादी का रिश्ता रणजीत सिंह को भेजा. रणजीत सिंह ने भी इसको स्वीकार किया. इसके बाद सदा कौर रणजीत सिंह की संर‌क्षिका बन गईं.

    नीति से लेकर युद्ध भूमि तक बोलती थी तूती
    सदा कौर एक बेहतरीन राजनीतिज्ञ थीं. रणजीत कौर उन्हें गुरु माता मानते थे और बिना उनकी सलाह के कोई भी निर्णय नहीं लेते थे. उनकी राजनीतिक सूझबूझ के चलते ही रणजीत ने लाहौर को जीता था. सदा कौर राजनीतिक समझ के साथ ही एक कुशल योद्धा भी थीं. युद्ध के दौरान वह कन्हइया मिस्ल के 8000 सैनिकों का नेतृत्व खुद किया करती थीं. उनके शौर्य और युद्ध कौशल से अंगरेज भी कांपते थे.



    जब मिला लाहौर पर कब्जा करने का मौका
    काबुल के बादशाह जमान 16वीं शताब्दी में लगातार अपनी ताकत को बढ़ा रहा था. ऐसे में उसकी नजर लाहौर पर भी थी. लेकिन लाहौर पर हर दिन होते हमलों और लगातार बदलते शासकों के चलते उसे भी वहां जाने में डर था. ऐसे में उसने रणजीत सिंह को लाहौर पर कब्जा करने को कहा. इस दौरान छेत सिंह लाहौर के शासक थे लेकिन लगातार भांग और रामगढ़िया सरदारों के लड़कों ने इस पर हमला कर लगभग इसे काबू में कर लिया था.

    इस समय लाहौर पर इस दौरान हर दिन के होने वाले युद्ध से परेशान लाहौर की जनता ने भी रणजीत सिंह के शासक बनने पर सहमति जताई. लेकिन रणजीत सिंह के लिए यह आसान नहीं था. क्योंकि न ही लाहौर की जनता ने उसका साथ युद्ध में देने की बात कही थी और न ही जमान अपनी सेना मदद के लिए भेज रहा था. रणजीत सिंह को तीन सेनाओं का सामना करना पड़ रहा था.

    सदा कौर की कुशलता से लाहौर के राजा बने रणजीत सिंह
    इस मुश्किल घड़ी में रणजीत सिंह ने सदा कौर की सलाह ली. यह सदा कौर के लिए भी आसान नहीं था. लेकिन बिना डरे सदा कौर ने रणजीत सिंह को कहा लाहौर पर हमला होगा. कौर ने रणजीत से पूछा कि आपके पास कितनी सेना है. इस पर रणजीत सिंह ने बताया कि 3000 सैनिक तैयार है. सदा कौर के पास इस दौरान 2000 सैनिकों की फौज थी. सदा कौर ने कहा कि 5000 की कुल फौज के साथ हम लाहौर पर हमला करेंगे. रणजीत सिंह डरे हुए थे और उन्हें पता था कि यदि युद्ध हुआ तो हार निश्‍चित है. उन्होंने सदा कौर को कहा, माताजी हमारी सेना जैसे ही कूच करेगी हम पर आक्रमण हो जाएगा. इसके बाद सदा कौर ने कहा कि नहीं हम अमृतसर जाएंगे. सैनिकों को कहें कि वहां हम पवित्र सरोवर में स्नान करेंगे.

    इसके बाद सेना सहित रणजीत और सदा कौर अमृतसर पहुंचे और डेरा डाला. यह बात आग की तरह फैल गई. इसके बाद वहीं पर देर रात तक सदा कौर ने रणजीत सिंह और सेना कमांडरों के साथ बैठक की और इसके तुरंत बाद सेना ने लाहौर की तरफ कूच किया. लाहौर के दरवाजे पर पहुंची सेना को देख वहां मौजूद दोनों कबीलों के लड़ाकों ने भागने में भलाई समझी. इसके बाद मुश्‍किल थी छेत सिंह के किले पर कब्जा करना. लाहौर के गेट जनता ने रणजीत सिंह के ल‌िए खोल दिए थे. सेना ने खुशी के चलते गोलियां चलाना शुरू कर दिया. इसके बाद सदा कौर ने किले के दरवाजे पर जाकर दरबान से कहा कि उन्हें छेत सिंह से अकेले में मिलना है.

    छेत सिंह ने उन्हें किले के अंदर आने को कहा. बेखौफ सदा कौर बिना सिपाहियों या हथियार के अकेली छेत सिंह से मिलने पहुंच गईं. वहां उन्होंने छेत सिंह से कहा कि दोनों कबीलों को हमारी सेना ने मार दिया है. मैं आपकी भलाई चाहती हूं, इसलिए आप किला छोड़ दें, आपकी जागीरें आपकी ही रहेंगी बस लाहौर रणजीत सिंह का होगा. ऐसा नहीं करने पर उन्हें मार दिया जाएगा. इसके दो घंटे बाद छेत सिंह ने किले की चाबियां रणजीत सिंह के हवाले कर दीं. इस तरह बिना एक बूंद खून बहाए सदा कौर ने रणजीत सिंह को लाहौर की गद्दी संभलवा दी.



    जब सेना ने कर दिया रणजीत सिंह का विरोध
    लाहौर जीतने के बाद एक मौका ऐसा भी आया जब रणजीत सिंह की सेना ही उनके विरोध में खड़ी हो गई और कोई भी युद्ध लड़ने से मना कर दिया. इसका कारण था उनका खजाना सियालकोट में था और उसे अंग्रेजों की सेना ने घेर रखा था. वहां जाना असंभव था. ऐसे में सेना को कई महीनों से वेतन नहीं मिला था. इसके साथ ही लाहौर में भी सेना को लूट नहीं करने दी गई थी. ऐसे में उन्होंने एक बार फिर सदा कौर के सामने यह समस्या रखी. सदा कौर ने सिर्फ एक दिन की मौहलत मांगी.

    सदा कौर को एक बात पहले से पता थी कि मीर मानुस का खजाना लाहौर के महल में कहीं है और उसका पता एक 100 साल के व्यक्ति को है जो लाहौर में ही कहीं रहता है. सदा ने पूरे दिन उसकी खोज की और वह उसे मिल गया. इसके बाद सदा ने उसे लेकर रणजीत के पास आईं. उस व्यक्ति ने खजाने का पता रणजीत सिंह को दे दिया. उसकी बताई जगह से लाखों का खजाना मिला.

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    Tags: Army, British Raj, India, Lahore, Politics, Punjab, Soldier, War

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