इसरो के ऑफिस में कैसा है काम करने का माहौल और कितनी है सैलरी

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Updated: September 12, 2019, 3:24 PM IST
इसरो के ऑफिस में कैसा है काम करने का माहौल और कितनी है सैलरी
इसरो का रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र

दुनिया की टॉप फाइव स्पेस एजेंसियों में एक है भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानि इसरो. अब इसरो का एक बड़ा ढांचा देशभऱ में काम कर रहा है. युवा वैज्ञानिक कैसा महूसस करते हैं यहां के कामकाजी माहौल को

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चंद्रयान-2 मिशन के बाद युवाओं में इसरो के प्रति क्रेज बढ़ा है. इसरो की इमेज पेशेवर और सम्मानजनक  वैज्ञानिक संस्थान की रही है. जो लगातार नए मानदंड स्थापित कर रहा है. इसरो फिलहाल दुनिया की टॉप फाइव स्पेस एजेंसीज में शामिल है. स्वाभाविक है कि उसकी नौकरी, सुविधाएं और कामकाजी माहौल को लेकर भी तमाम जिज्ञासाएं और सवाल हाल के दिनों में उपजे हैं.

वैसे इसरो खुद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के जरिए हर साल वैज्ञानिकों की अपनी खेप तैयार करता है लेकिन बाहर से भी वैज्ञानिकों के साथ दूसरी भूमिकाओं में नियुक्ति करता है. इसरो को केवल वैज्ञानिक ही नहीं बहुत ढेर सारे अलग कामों के लिए अलग तरह की क्षमता वाले लोगों की जरूरत पड़ती है. सभी का सेलरी पैटर्न अलग है. वैसे यहां जब किसी नए साइंटिस्ट की नियुक्ति होती है तो उसे केंद्रीय सरकार के सातवें वेतन आयोग के अनुसार साइंटिस्ट का वेतनमान मिलता है और साथ में परिलब्धियां और भत्ते.


इसरो में काम करना गौरव की बात भी है. जब आप कहीं जाते हैं. लोगों से मिलते जुलते और जहां रहते हैं, वहां जब लोग आप इसरो में काम करते हैं तो लोगों की आंखों में खुद सम्मानभाव पैदा होते देखा जा सकता है.

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हालांकि हर जगह का माहौल भी अलग होता, जहां ढलने में समय लगता है. वैसा ही इसरो के साथ भी है. हालांकि यहां के सेंटर्स के डिपार्टमेंट्स का माहौल ना तो सरकारी है और ना ही कारपोरेट. हर नए भर्ती होने वाले को रेंडम तरीके से अलग डिपार्टमेंट्स और शहरों में भेजा जाता है. जरूरी नहीं कि आपको सीधे डिजाइनिंग या लांच - व्हीकल या सेटेलाइट डिपार्टमेंट में ही जगह मिले.

इसरो का यूआर रॉव स्पेस सेंटर, जहां सेटेलाइट और अन्य अहम मिशन का संचालन होता है

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क्या होता नियुक्ति के समय
इंजीनियरिंग युवाओं के बीच खासतौर पर पॉपुलर सोशल साइट कोरा पर कई ने इसरो में अपने काम के अनुभव बांटे हैं. इसरो में काम कर रहे अरित्रा सरकार लिखते हैं, आप वाकई भाग्यशाली होंगे अगर आपको इसरो में नियुक्ति के साथ पसंद का काम और सेंटर अलाट हो जाए. यहां रेंडम तरीके से लोगों के डिपार्टमेंट तय होते हैं. नए नियुक्त होने वालों को जानकारी भी नहीं होती कि इसरो के एक सेंटर में कितने अलग डिपार्टमेंट साथ काम कर रहे होते हैं.

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बेशक डिजाइनिंग और लांच-व्हीकल-सेटेलाइट पर काम करने वाले डिपार्टमेंट मुख्य भूमिका में होते हैं लेकिन बाकि डिपार्टमेंट उनके सपोर्टिंग ग्रुप के तौर पर काम करते हैं. अलग तरह से भूमिकाओं को अंजाम देते हैं. पक्का मानिए कि इसरो का सेलेक्शन प्रोसेस आसान तो कतई नहीं है.

अमूमन इसरो के सेंटर्स देश में जिन शहरों में हैं, उन्हें देश के बेस्ट शहर नहीं कहा जा सकता. आमतौर पर इसरो के ज्यादातर केंद्र दक्षिण में हैं, लिहाजा उत्तरी भारतीय लोगों को जरूर इससे दिक्कत होती है.

आफिस का कामकाज और समय
इसरो के आफिसों की शुरुआत सुबह 09.00 बजे होती है जो आमतौर पर पांच बजे तक होती है. लेकिन कुछ लोग आफिस में देर तक रुककर काम करते रहते हैं. जिन दिनों टेस्टिंग और लांच ज्यादा होते हैं, उन दिनों काम भी बढ़ जाते हैं, हालांकि इसरो में अब लांच के काम लगातार ही बढ़ रहे हैं.

केरल के शार में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र


हफ्ते में पांच दिनों की वर्किंग है और दो दिन का सप्ताहांत. यहां कोई काम ऐसा नहीं , जो आपको घर ले जाकर करना हो. आफिस में मोबाइल साथ ले जाने की अनुमति नहीं होती. हां, जरूरी नहीं कि हर कोई वर्किंग आवर्स के समय का कडाई से पालन करे, वो उसे अपनी तरह से एडजस्ट कर सकते हैं.

कामकाजी माहौल कहीं बेहतर
इसरो में काम करने वाले एक युवा वैज्ञानिक साबरी श्रीकुमार ने कोरा पर लिखा, यहां वर्क कल्चर शानदार है. आपको ब्राइट लोगों के साथ काम करने को मिलता है. यहां का कामकाजी माहौल दूसरे सरकारी डिपार्टमेंट्स से कहीं बेहतर है.  तबादले कम होते है.

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सुविधाओं की बात करें यहां कैंटीन खासी सस्ती है. आवास और परिवहन सुविधाएं हैं. बच्चों की पढाई मुफ्त है. हेल्थ कवर और छुट्टियां बेहतर हैं. यानि कहा जा सकता है कि ये ऐसी जगह है जहां कामकाज के बाद आपके पास परिवार के लिए भी काफी समय है.

वैसे नए रिक्रूट जब यहां आते हैं तो खुद को उन्हें यहां अलग तरीके से ढालना होता है, क्योंकि यहां काम के तौरतरीके तय हैं. आम भारतीय आफिसों की तरह हर मंजूरी की प्रक्रिया है.

त्रिवेंद्रम में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर


सेलरी और भत्ते आकर्षक
शुरुआत में जब आप इसरो में ज्वाइन करते हैं तो एक नए साइंटिस्ट की सेलरी और परिलब्धियां वाकई आकर्षक होती हैं लेकिन बाद में ग्रेड इंक्रीमेंट बहुत आकर्षक नहीं होते. प्रोमोशन टाइम बाउंड हैं. प्रोमोशन में आगे बढना आसान नहीं होता, ये काफी कंपटीटीव है.





ये सेलरी विवरण इसरो में अवसर या नौकरियां पब्लिश करने वाली एक साइट के अनुसार हैं. हालांकि इसरो में जो अलग पद और काम हैं, उनके वेतन और भत्ते अलग-अलग है.

नौकरी छोड़ भी देते हैं युवा साइंटिस्ट
बहुत से युवा साइंटिस्ट शुरुआती सालों में ही यहां की नौकरी छोड़ भी देते हैं. इसमें ज्यादातर ऐसे होते हैं जो यहां के अभ्यस्त नहीं हो पाते. ज्यादातर ऐसे होते हैं, जिन्हें डिजाइन बेस्ट डिपार्टमेंट नहीं मिलता. या वो हायर एजुकेशन की योजना बना रहे हों. आमतौर पर इसरो में काम कर चुके युवा साइंटिस्टों या इंजीनियर्स को विदेशों की नामी यूनिवर्सिटीज में आसानी से प्रवेश मिल जाता है. वैसे बहुत से युवा इसरो केेंद्रों के लोकेशन के कारण भी जॉब छोड़ देते हैं.

तेजी से आगे बढ़ रहा है इसरो. जिस पेशेवर तरीके से इसरो ने पिछले कुछ सालों में काम किया है, उससे ये स्पेस के क्षेत्र में एक बड़ी ताकत में तब्दील हो चुका है


तेजी से आगे बढ़ रहा है इसरो
इसमें कोई शक नहीं कि इसरो एक तकनीक संस्थान है, जो लगातार आगे बढ़ रहा है. ये देश ही दुनियाभर के बेहतरीन एडवांस स्पेस टैक्नॉलॉजी सेंटर में है. यहां के वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता के चलते ही इसका ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है.

ब्राइट लोगों के साथ काम करने का मौका
इसरो में काम करने वाले एक और साइंटिस्ट ने कोरा पर लिखा है कि अगर आप इसरो में काम करना चाहते हैं तो यहां बहुत ढेर सारे अवसर हैं. यहां बहुत से ब्राइट लोग हैं, जो आपके काम मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं. हर जगह की तरह इसरो में भी आपको आगे बढने में समय लगेगा. अगर कोई यहां अपनी सामर्थ्य दिखाता है तो उसे ज्यादा से ज्यादा जिम्मेदारियां भी मिलती हैं.



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First published: September 10, 2019, 7:47 PM IST
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