कोरोना से बचाव का बड़ा माध्यम बनकर उभरा work from home, जर्मनी बना सकता है कानून

कोरोना से बचाव का बड़ा माध्यम बनकर उभरा work from home, जर्मनी बना सकता है कानून
जापान में वर्क फ्रॉम होम को स्थायी करने की तैयारी हो रही है. (प्रतीकात्मक फोटो)

लॉकडाउन (Lockdown) खत्म होने के बाद भी जर्मनी (Germany) में लंबे समय तक वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहित किया जा सकता है. सरकार एक ऐसा कानून (Law) लेकर आ सकती है जिसके मुताबिक अगर कर्मचारी चाहे तो स्थाई तौर वर्क फ्रॉम होम (Permanent work from home) का ऑप्शन चुन सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 29, 2020, 10:42 AM IST
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यूरोप के कई ताकतवर देश अब लॉकडाउन में ढील देने की तैयारी कर रहे हैं. देशों के सामने ये बड़ा चैलेंज है कि कोरोना वायरस को दोबारा फैलने से रोका जाए. लॉकडाउन की समाप्ति के बाद लोग बड़ी संख्या में घरों के बाहर निकलेंगे, ऐसे में कोरोना की सेकंड वेव आने का खतरा इन देशों पर बना हुआ है. पहले से टूटी हुई अर्थव्यवस्था के साथ देश एक और झटका खाने की स्थिति में नहीं हैं. इसलिए कई तरह के उपाय तलाशे जा रहे हैं जिससे लोग लॉकडाउन के बाद भी कम संख्या में बाहर निकलें. यूरोप की सबसे बड़ी इकॉनमी जर्मनी ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की सोची है.

जर्मनी के लेबर मिनिस्टर Hubertus Heil चाहते हैं कि घर से काम करने के तरीके को भविष्य में भी प्रोत्साहित किया जाए. उनका कहना है कि सरकार एक ऐसा कानून लेकर आ सकती है जिसके मुताबिक अगर कर्मचारी चाहे तो स्थाई तौर वर्क फ्रॉम होम का ऑप्शन चुन सकता है.

Hubertus Heil




जर्मनी के पोर्टल thelocal में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना को लेकर देश में सबसे पहले वर्क फ्रॉम होम का ऑप्शन ही चुना गया था. सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने के लिए देश की आबादी का करीब 12 फीसद हिस्सा वर्क फ्रॉम होम कर रहा था. लेकिन जब कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ा तो सख्त लॉकडाउन के आदेश दिए गए. सिर्फ बेहद जरूरी चीजों के लिए लोगों को बाहर निकलने की छूट थी. सख्त लॉकडाउन के दौरान देश की कुल आबादी का 25 फीसद हिस्सा वर्क फ्रॉम होम कर रहा है.
क्या होगा बदलाव
लेबर मिनिस्टर ने कहा है कि वो इसे लेकर नए कानून पर काम कर रहे हैं और जल्द ही पार्लियामेंट में पेश करेंगे. उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अगर वर्क फ्रॉम होम करना चाहे तो उसे छूट होगी. कोई चाहे तो स्थाई तौर पर घर से काम करे या फिर सप्ताह में एक-दो बार दफ्तर जाने का विकल्प भी चुन सकता है. हां, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ पेशे ऐसे हैं जिनमें ये कानून लागू नहीं होगा. इस कानून के लागू होने के लिए काम की प्रकृति भी निर्भर करेगी. पुलिस और मेडिकल जैसे प्रोफेशन में ऐसा कर पाना मुश्किल है. लेबर मिनिस्टर का कहना है कि सरकार जहां तक संभव हो सके घर से काम को प्रोत्साहित करेगी.

जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल


वर्क फ्रॉम होम बना बड़ा विकल्प
सोशल डिस्टेंसिंग कोरोना संकट से निकलने का फिलहाल सबसे बड़ा जरिया बनकर उभरा है. सोशल डिस्टेंसिंग को ही सख्ती से लागू करने के लिए दुनियाभर के ज्यादातर देशों ने लॉकडाउन का रास्ता अपनाया. सैकड़ों से लेकर हजारों की तादाद में कर्मचारियों से गुलजार रहने वाले दफ्तरों के लिए काम चालू रखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के मानक पर खरा उतरने का जरिया बना वर्क फ्रॉम होम. देश ही नहीं  दुनियाभर के कई देशों ने इस वर्क फ्रेम को अपनाया. यहां तक कि स्वीडन जैसे देश जहां कोरोना के प्रकोप के बीच भी लॉकडाउन नहीं किया गया, वहां भी वर्क फ्राम होम का विकल्प चुना गया.

अब यूरोप के कई देश लॉकडाउन में ढील की तैयारी कर रहे हैं. जर्मनी के अलावा स्पेन, फ्रांस और इटली भी लॉकडाउन के सख्त नियमों को हल्का करने की कोशिश कर रहे हैं. जर्मनी में कुछ दिनों पहले ये घोषणा की गई थी कि अब कोरोना के मद्देनजर देश के हालात नियंत्रण में हैं. स्वास्थ्य मंत्री Jens Spahn ने कहा था कि कोरोना के नए मामलों की संख्या में काफी कमी आई है. स्थिति अब नियंत्रण में है और अब हम कुछ सेक्टर्स में ढील देने के बारे में विचार कर सकते हैं. देश में स्कूल 4 मई से दोबारा खोले जाएंगे. मेगा स्टोर्स को अभी बंद रखा गया है लेकिन छोटी दुकानों को खोलने की शुरुआत कर दी गई है. नागरिकों से खास अपील की गई है कि लॉकडाउन के खुलने के बाद भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्ववत खयाल रखा जाए.

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