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World AIDS Day 2021: एड्स को लेकर क्या चेतावनी दे रहा है संयुक्त राष्ट्र

World AIDS Day 2021: एड्स को लेकर क्या चेतावनी दे रहा है संयुक्त राष्ट्र

एड्स (AIDS) के खिलाफ जंग में सबसे बड़ी समस्या उसके लिए किए जा रहे प्रयासों में असमानता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

एड्स (AIDS) के खिलाफ जंग में सबसे बड़ी समस्या उसके लिए किए जा रहे प्रयासों में असमानता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) पर संयुक्त राष्ट्र (United Nations), विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके सहयोगी संगठन ने एड्स और अन्य महामारियों (Endemics) के लिए किए जा रहे प्रयासों में असमानता को खत्म करने के लिए जोर देने की बात कही है. कहा जा रहा है कि अगर इस पर सही से काम नहीं हुआ तो 40 सालों से दुनिया के लिए खतरा बनी हुई महामारी को 2030 तक खत्म करना बहुत मुश्किल हो जाएगा.

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    दुनिया में कोविड-19 (Covid-19) महामारी ही ऐसी नहीं है जिसका कोई इलाज नहीं है. कई बीमारियां हैं जो संक्रमण से फैलती हैं और उनका इलाज या टीका अभी तक वैज्ञानिक नहीं खोज पाए है. पूरा संसार एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) मनाता है. इसे मनाने का उद्देश्य लोगों को इन संक्रमण के प्रति जागरुक बनाने के साथ ही इसकी वजह से मरे लोगों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देना है. कोविड-19 महामारी ने दुनिया को कई ऐसे सबक दिए हैं जो एड्स के खिलाफ काम करने के जरूरत पर बल देते हैं. इसके इलाज और बचाव के लिए संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने भी कुछ चेतावनी वाले आंकड़े जारी किए हैं.

    क्या है इस साल की थीम
    इस साल की थीम रखी गई है एंड इनईक्वेलिटीज. एंड एड्स यानि असमानता खत्म करें हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र और अन्य सहयोगी संगठन जरूरी एचआई सेवाओं की पहुंच के मामले में बढ़ती असमानता को खत्म करने के लिए उन लोगों पर विशेष ध्यान लगाना चाहते हैं जो इन सेवाओं की पहुंच से पीछे छूट रहे हैं.

    क्या है एड्स
    एड्स एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम का छोटा रूप है. यह ऐसा विकार है जो ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) के संक्रमण से फैलता है. इसके प्रभाव की बात करें तो यह इंसान की रक्षा प्रणाली को कमजोर कर देती है जिससे वह किसी दूसरी बीमारी से लड़ नहीं पाता है. यही वजह है कि एड्स पीड़ित हमेशा ही किसी दूसरी बीमारी से ही मरते हैं.

    क्या वाकई लाइलाज है एड्स
    सच यह है कि एड्स का पूरा इलाज अभी तक खोजा नहीं जा सका है. इसकी कोई वैक्सीन नहीं है और ना ही इसकी कोई एंटीबायोटिक बनी है.लेकिन यह भी सच है कि कुछ उपचार पूरी तरह से नहीं तो काफी हद तक प्रभावी भी है. फिर भी ये उपचार व्यक्ति का जीवन 20 साल से ज्यादा तक बढ़ा सकते हैं.

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    एचआईवी एड्स (HIV AIDS) को साल 2030 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    एड्स खत्म करने का लक्ष्य
    संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि एड्स और अन्य महामारियों के इलाज के प्रयासों में भारी असामानता को खत्म करना बहुत जरूरी है. इस असमानता के खिलाफ कड़े कदम ना उठाए गए तो हम साल 2030 तक एड्स को खत्म करने के लक्ष्य को गंवाने का जोखिम बना रहेगा. इससे सामाजिक आर्थिक समस्याएं और गहरी होती जाएंगी.

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    क्या है चेतावनी
    संयुक्त राष्ट्र के एड्स दिवस वाले वेब पेज पर संगठन ने याद दिलाया है कि एड्स का पहला मरीज सामने आने के 40 साल बीतने के बाद भी एचआईवी दुनिया के लिए खतरा बना हुआ है. आज दुनिया साल 2030 तक एड्स को खत्म करने के लक्ष्य को हासिल करने के प्रयासों से भटक गई है. ऐसा ज्ञान और उपकरणों की कमी के कारण नहीं है, बल्कि संरचनात्मक असमानताओं के कारण है जिनसे एचआईवी की रोकथाम और उपचार के लिए सिद्ध समाधान बाधित हो रहे हैं.

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    संयुक्त राष्ट्र (United Nations)का मानना है कि 2030 तक अब भी एड्स को खत्म किया जा सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    एक तरह का आपातकाल
    संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अगर हमें 2030 का लक्ष्य हासिल करना है तो असमानताओं को जल्द से जल्द खत्म करना ही होगा. इस तरह से हम एड्स आपातकाल का सामना कर रहे हैं. हम काम ना करना वहन नहीं कर सकते हैं. अगर वैश्विक नेताओं ने एड्स के खिलाफ प्रयासों में असमानता को खत्म करने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए तो हमें लाखों करोड़ों मौतें और देखनी होगी.

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    संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि अब भी 2030 एड्स को दुनिया से खत्म किया जा सकता है. हम जानते हैं कि कई जगह बहुत अच्छा काम हो रहा है, लेकिन हमें ऐसा सब जगह और हर एक के लिए करना है. हमारे पास कारगर रणनीति भी है जिस पर अगर नेता संयुक्त राष्ट्र में सहमत भी हो सकते हैं, लेकिन उसे पूरी तरह से लागू करना होगा. इसके लिए हमें समुदायिक नेतृत्व वाले लोगों पर केंद्रित संरचना की जरूरत होगी. वैक्सीन, दवाएं और स्वास्थ्य तकनीक तक सभी के लिए पहुंच वाली बनाने बनाने जैसे कई कदम उठाने होंगे.

    Tags: Research, Science, United nations, WHO

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