World Autism Awareness Day 2021: क्या है ऑटिज्म और क्यों मनाया जाता है ये दिन

संयुक्त राष्ट्र साल 2012 से विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस (World Autism Awareness Day) मनाता आ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

संयुक्त राष्ट्र साल 2012 से विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस (World Autism Awareness Day) मनाता आ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

संयुक्त राष्ट्र हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस (World Autism Awareness Day) मनाता है. इसे ऑटिज्म स्पैक्ट्रम डिसऑर्डर (Autism Spectrum Disorders) के प्रति जागरुकता की अहमियत को देखते हुए मनाया जाता है.

  • Share this:
सयुंक्त राष्ट्र हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस (World Autism Awareness Day) मनाता है. इसका उद्देश्य लोगों में ऑटिज्म के प्रति जागरुकता बढ़ाना है. दुनिया भर में बहुत से संगठन ऐसे हैं जो ऑटिज्म स्पैक्ट्रम डिसऑर्डर (Autism Spectrum Disorder, ASD) के निदान और उपचार के लिए योगदान देते हैं. लेकिन जरूरत इस बात की ज्यादा है कि लोगों को इस अनोखे डिसऑर्डर के बारे में जानकारी हो.

क्या होता है ये ASD

ऑटिज्म स्पैक्ट्रम डिसऑर्डर में बहुत सी न्यूरोडेवलपमेंटल या तंत्रिका विकास संबंधी स्थितियां (Neurodevelopmental Conditions) होती है जिसमें ऑटिज्म और एस्परजर सिंड्रोम जैसी स्थितियां भी शामिल हैं. इन सभी स्थितयों को ऑटिज्म स्पैक्ट्रम डिसऑर्डर या एएसडी में शामिल माना जाता है. ऐसे विकारों से ग्रसित लोगों को सामाजिक संचार और अंतरक्रियाएं करने में परेशानी की अनुभव होता है. यहां तक कि उनके बर्ताव में भी सीमित, विशेष दोहराव, रुचि और क्रियाएं दिखाई देती हैं.

किस तरह के होते हैं लक्षण
इन विकारों के पीड़ित मरीजों के लक्षण, लड़कों में दो से तीन साल की उम्र में दिखने लगते हैं. लेकिन बहुत सारे बच्चों में बड़े होने तक इनकी विकारों की पहचान नहीं हो पाती है. इस स्थितियों में स्पैक्ट्रम का अर्थ विकार के प्रकार और लक्षणों की गंभीरता को दर्शाता है. जहां हलके लक्षण वाले लोगों को सहायता की जरूरत नहीं होती, तो वहीं मध्यम या गंभीर लक्षणों वालों को दैनिक जीवन में बहुत ज्यादा सहायता की जरूरत होती है.

United nations, Autism Awareness Day, ASD, Autism, World Autism Awareness Day 2021, Autism Awareness,
ऑटिज्म (Autism) दो से तीन साल की उम्र के लड़कों में ज्यादा पाया जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


जागरुकता बहुत ज्यादा जरूरी



इस लक्षणों में दैनिक कार्यों का ना कर पाना, संबंधों को बनाने और रोजगार कायम रखने में परेशानी शामिल हैं. ऑटिज्म में  सामाजिक अंतरिक्रिया में परशानी और सीमित और दोहराव वाला असामान्य बर्ताव देखने को मिलता है. इसके कारण पर्यावरणीय और अनुवांशिकी कारकों का मिश्रण होते हैं. ऑटिज्म की सबसे बड़ी चुनौती उसके लक्षणों की पहचान कर सही निदान और इलाज है. यही वजह है कि इसके प्रति जागरुकता की बहुत ही ज्यादा आवश्यकता है.

जानिए क्या है नॉन टाइम की अहमियत, आइंस्टीन और न्यूरोसाइंस तक मानते हैं जिसे

कब से मनाया जा रहा है इसे

संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने 1 नवंबर 2007 को विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस मनाने का संकल्प पास किया था. इसे सभा ने 18 दिसंबर 2007 को अपनाया था. इसे साल 2012 से मनाया जा रहा है यह संयुक्त राष्ट्र केवल सात आधिकारिक स्वास्थ्य विशेष दिनों में से एक है जिन्हें हर साल मनाया जाता है.

United nations, Autism Awareness Day, ASD, Autism, World Autism Awareness Day 2021, Autism Awareness,
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) इस तरहे के सात दिवस मनाता है जिनका संबंध स्वास्थ्य से है. (रॉयटर्स फाइल फोटो)


क्या है साल 2021 की थीम

इस साल विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस पर संयुक्त राष्ट्र की थीम ‘कार्यस्थल में शामिल करना: महामारी के बाद की दुनिया में  चुनौतियां और अवसर’ है.  संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने अपने संदेश में कहा है कि ऐसे में जब हम मिलकर कोविड-19 महामारी से ऊबर रहे हैं, हमारा प्रमुख लक्ष्य दुनिया को और ज्यादा शामिल करने वाली और आसान पहुंच वाली जगह बनाने पर होना चाहिए जिसमें अक्षम लोग भी शामिल हो सकें.

लैब में बने शुरुआती भ्रूण ने दिया विज्ञान और नैतिकता के बीच नए विवाद को जन्म

साल 2011 के जनगणना के अनुसार भारत में 7,862, 921 बच्चे ऐसे थे जो अक्षम थे. इनमें से 595, 089 बच्चों मानसिक रूप से अक्षम थे. एक अध्ययन के मुताबिक भारत में हर 66  बच्चों में से एक ऑटिज्म से पीड़ित है.  पिछले एक दशक में भारत में ऑटिज्म से पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन उसके मुताबिक जागरुकता की बहुत ज्यादा कमी है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज