World Coconut Day : नारियल सुपरफूड है या नुकसानदेह-क्या है असलियत

World Coconut Day : नारियल सुपरफूड है या नुकसानदेह-क्या है असलियत
नारियल सुपरफूड है, ये बात साबित भी हो चुकी है लेकिन यूरोपीय देशों में कुछ रिसर्च जानबूझकर इसके बारे में भ्रांतियां फैला रही हैं

जब से नारियल (Coconut) को सुपरफूड (Super Food) घोषित किया गया है, तब यूरोपीय देशों (European countries) और अमेरिका में इसको लेकर कुछ रिसर्च ये साबित करने में लगी हैं कि खाने के तेल के रूप में इसका इस्तेमाल खतरनाक है. हालांकि इन रिसर्च को जब तथ्यों की कसौटी पर रखें तो खारिज हो जाती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 2, 2020, 2:37 PM IST
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नारियल का तेल कहां नहीं इस्तेमाल होता? सिर में मालिश हो या फटे होंठों पर लगाना हो या फिर चाहे खाना ही क्यों न पकाना हो, नारियल के तेल की जगह हर घर में रसोई से लेकर बाथरूम तक होती है. दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल में तो यह बहुत बड़ी जरूरत है. नारियल को सुपर फूड भी माना जाता है. हालांकि जब पिछले दिनों हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने इस पर सवाल उठाते जहर बताया तो खुद इस रिसर्च पर ही सवाल खड़े हो गए. हमारे देश में तो नारियल के तेल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है.

हार्वर्ड विश्विद्यालय के टी एच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की एपिडेमोलॉजिस्ट करिन माइकल्स ने करीब तीन साल पहले नारियल तेल को 'प्योर पॉयज़न' बता डाला. उन्होंने कहा कि यह जहर है. इसे खाने में बिलकुल शामिल नहीं करना चाहिए. फिर उन्होंने कई जगह लेक्चर में इस दावे को बार-बार उठाया. दरअसल ये पूरी रिसर्च सैचुरेटेड और अनसैचुरेटेड फैट की लड़ाई का हिस्सा है. जिसे हमें समझने की भी जरूरत है.

सैचुरेटेड फैट को लेकर नारियल के पक्ष-विपक्ष में तर्क
ऐसा माना जाता है कि नारियल के तेल में सैच्युरेटेड फैट की काफी अधिक मात्रा होती है, ये खराब नहीं बल्कि अच्छी बात है. ये काफी हेल्दी है. तलने-भुनने के लिए नारियल के तेल को अच्छा माना जाता है.  कहते हैं कि नारियल तेल शरीर में उतनी आसानी से नहीं जमता जितना कि अन्य तेल इसलिए खाने में इसका इस्तेमाल वजन कम करने के लिए किया जाता है.




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हार्वर्ड के प्रोफेसर ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि नारियल के तेल में सैच्युरेटेड फैट के उच्च अनुपात से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है. इसलिए कार्डियोवैस्कुलर बीमारी का खतरा ज्यादा होता है. नारियल के तेल में 80% से अधिक सैच्युरेटेड फैट होता है जो कि मीट में होने वाले फैट से भी 60% अधिक होता है.

नारियल तेल को खाने में शामिल करने के खिलाफ चेतावनी जारी करते हुए ब्रिटिश न्यूट्रिशन फाउंडेशन ने कहा, 'नारियल तेल को खाने में इस्तेमाल करना सेहत के लिए फायदेमंद है इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.'

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की सीनियर डायटिशन विक्टोरिया टेलर कहती हैं, नारियल के तेल में 86 प्रतिशत सैच्युरेटेड फैट होता है जो मक्खन में मौजूद सैच्युरेटेड फैट से एक तिहाई ज्यादा है.

नारियल तेल को खाने में इस्तेमाल को लेकर इसके पक्ष और विपक्ष में बड़ी बहस दुनिया में छिड़ी हुई है.


क्यों ये रिसर्च कमियों से भरपूर है
ये पूरी रिसर्च सैचुरेटेड  और अनसैचुरेटेड फैट की लड़ाई पर टिकी है. आप इसे ऐसे समझिये जैसे यह देसी घी और महंगे रिफाइंड आयल की लड़ाई है. देसी घी सैचुरेटेड फैट है और रिफाइंड अनसैचुरेटेड. पश्चिमी सभ्यता या खानपान में सैचुरेटेड को नुकसानदेह  ही माना गया है. नारियल का तेल इस पूरे सैचुरेटेड फैट पर चल रहे कैंपेन का एक हिस्सा है.

देसी घी और नारियल का तेल भारतीयों के लिए एक जैसी इसलिए हैं, क्योकि दोनों प्राकृतिक हैं लेकिन तेल का बाजार प्रोसेस्ड यानि अनसैचुरेटेड फैट खरीदने पर ज़ोर देता है.

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सैचुरेटेड फैट क्या है?
कोई भी फैट, जो कमरे के तापमान में भी जमा रहता है, वह सैचुरेटेड फैट है. इसका अधिक मात्रा मे इस्तेमाल आपकी सेहत और दिल के लिए नुकसानदेय हो सकता है.

अनसैचुरेटेड फैट क्या है?
अनसैचुरेटेड फैट कमरे के तापमान में तरल रहता है. अगर संतुलित मात्रा में इसका इस्तेमाल किया जाए तो हार्ट के लिए अच्छा होता है. इसके इस्तेमाल को लेकर अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की न्यूट्रीशन कमेटी ने दिशानिर्देश दिए हैं. आप जितनी कुल कैलोरी खाते हैं उसका 25-35% से कम हिस्सा ही फैट का होना चाहिए. सैचुरेटेड फैट कुल कैलोरी का 7% से कम होना चाहिए.

आरोप लगते रहे हैं कि जब भी अमेरिकी या युरोपियन देशों में इस तरह के रिसर्च होते हैं, वे एक मार्केटिंग प्रोपेगंडा के तहत किसी दूसरे प्रोडक्ट को बेचने या बाज़ार में लाने के लिए किये जाते हैं. खासकर दवाइयों के साथ ऐसा बिलकुल होता है.

आरोप लगते रहे हैं कि जब भी अमेरिकी या युरोपियन देशों में इस तरह के रिसर्च होते हैं, वे एक मार्केटिंग प्रोपेगंडा के तहत किसी दूसरे प्रोडक्ट को बेचने या बाज़ार में लाने के लिए किये जाते हैं.


सैचुरेटेड फैट दुनिया के लिए हानिकारक कब हो गया?
20 वीं शताब्दी की शुरुवात में, अमेरिका में दिल की बीमारी की एक बहुत बड़ी महामारी आई. लोग इससे मरने लगे. शोधकर्ताओं ने रिसर्च में पाया कि सैचुरेटेड फैट खाने से रक्त प्रवाह में कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि होती है. ये उस समय एक महत्वपूर्ण खोज थी, क्योंकि वे यह भी जानते थे कि उच्च कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारी के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ था.

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इससे कुछ धारणाएं तय हुईं-  यदि सैचुरेटेड फैट कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है और कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग  का कारण बनता है, तो इसका मतलब यह होना चाहिए कि सैचुरेटेड फैट हृदय रोग का कारण बनता है.  हालांकि, उस समय, ये मनुष्यों में किसी भी प्रयोगात्मक सबूतों पर आधारित नहीं था.

अब चाहे वह नारियल का तेल हो या देसी घी या कोई और सैचुरेटेड फैट. अगर ठीक मात्रा में इस्तेमाल किया जाए यानी 2 चम्मच रोज़ तो यह बेहद फायदेमंद होता है. अगर ज़्यादा तो कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है. इस तरह ये ज़हर तो कतई नहीं है.
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