इतिहास रचने वाले इन फुटबॉलर्स ने देखी हैं अपनों की हत्याएं

वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची क्रोएशिया टीम महज दो -ढाई दशकों में तैयार हुई है. ये उस छोटे से देश की टीम है, जिसकी आबादी महज 41 लाख है

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 12, 2018, 5:20 PM IST
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 12, 2018, 5:20 PM IST
आबादी में दिल्ली का पांचवां हिस्सा ठहरने वाला क्रोएशिया फुटबॉल की दुनिया में एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है. ये वही देश है जिसने मुश्किल से 27 साल पहले खूनी गृह युद्ध देखा. 1991 में जब क्रोएशिया ने खुद को यूगोस्लाविया से अलग कर स्वतंत्र देश घोषित किया, तब वहां खूनखराबे का आलम था. क्रोएशिया की मौजूदा फुटबाल टीम के आधे से ज्यादा खिलाड़ी तब छोटे छोटे बच्चे थे. उन्होंने उन दिनों अपनी आंखों के सामने वो सब देखा, जो वो कभी भूल नहीं पाते.

क्रोएशिया के 56,594 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को देखा जाए तो ये भारत के हिमाचल या उत्तराखंड के बराबर बैठता है लेकिन तरक्की के मामले में ढाई दशकों में ही गजब की छलांग ली है. ये दुनिया के बेहद खूबसूरत देशों में शुमार होता है.

फुटबाल में ताकत
क्रोएशिया को 1991 में आजादी मिली लेकिन आजादी से पहले ही वहां क्रोएशिया फुटबाल फेडरेशन का गठन हो चुका था. फुटबॉल क्रोएशियाई लोगों का हमेशा से पसंदीदा खेल था. जब यूगोस्लाविया फुटबॉल की बड़ी ताकत था, तब बड़ी संख्या में इस टीम में क्रोट खिलाड़ी ही हुआ करते थे. आजाद होते ही क्रोएशिया ने वर्ल्ड फुटबॉल के मैप पर अपनी मौजूदगी दिखानी शुरू कर दी.

वर्ल्ड कप में क्रोएशिया
क्रोएशिया ने पहली बार 1998 में वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया. पहली बार में ही उन्होंने सेमीफाइनल में पहुंचकर तहलका मचा दिया. उस वर्ल्ड कप में वो तीसरे नंबर पर थे. इस टीम के हीरो डेवन सूकर थे. उसके बाद से अब तक क्रोएशिया की टीम केवल एक बार 2010 में वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई लेकिन पिछले वर्ल्ड कप तक वो ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ पा रहे थे.
इस वर्ल्ड कप में क्रोएशिया ने फिर कमाल कर दिया है. एक से एक दिग्गज टीमों को पछाड़ते हुए उन्होंने फाइनल में जगह बना ली है.

सेमीफाइनल में जीत के बाद खुशी मनाती क्रोएशियाई टीम


हालांकि यूएफा यूरोपीयन लीग में क्रोएशिया को शीर्ष टीमों में गिना जाता है लेकिन इस प्रतियोगिता में वो कभी क्वार्टर फाइनल स्टेज से आगे नहीं जा पाई. इस लिहाज से उनका फाइनल में पहुंचना बहुत बड़ी उपलब्धि ही कही जाएगी.

मौजूदा वर्ल्ड कप में सफर

ग्रुप स्टेज
- नाइजीरिया को 2-0 से हराया
- अर्जेंटीना को 3-0 से हराया
- आयरलैंड को 1-0 से हराया
प्री क्वार्टर फाइनल
- क्रोएशिया 1 - डेनमार्क 1
(पेनाल्टी में 3-2 से जीते)
क्वार्टर फाइनल
- क्रोएशिया 2 रूस 2
(पेनाल्टी में 4-3 से जीते)
सेमीफाइनल
- क्रोएशिया 2 इंग्लैंड 1
(एक्स्ट्रा टाइम में जीते)

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बहुत असरदार तरीके से FIFA WC 2018 के फाइनल में पहुंचा है क्रोएशिया


वर्ल्ड कप का सफर दर्द से जुड़ा भी
क्रोएशिया का फुटबाल में बड़ी ताकत के रूप में उदय होने का रास्ता उस दर्द से भी गुजरता है, जो उन्होंने 80 और 90 दशक के दौरान गृह युद्ध की उथल पुथल में झेला. उस दौर में बाल्कन देशों में उसी तरह हिंसक पलायन हुआ, जिस तरह भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान हुआ था. बड़े पैमाने पर जानें गईं. बाल्कन गृह युद्ध में करीब डेढ़ लाख लोगों की जान गई थी

तब क्रोएशिया में खून बह रहा था और बर्बादी का दौर
ठीक ऐसा ही क्रोएशिया के निवासियों के साथ हुआ. बहुत से परिवार बर्बाद हो गए. क्रोएशिया की मौजूदा टीम के कम से कम 14 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो क्रोएशिया के उस दौर में पैदा हुए या बच्चे थे. उन्होंने इसे सीधे सीधे झेला. बाकि खिलाड़ियों में ज्यादातर का जन्म क्रोएशिया की आजादी के तुरंत बाद से सालों में तब हुआ जब ये देश अस्थिरता और उथल पुथल के बाद खुद को सामान्य करने में लगा था. इस टीम के ज्यादातर खिलाड़ी उसी दर्दनाक दौर से गुजरते हुए आज वहां तक पहुंचे हैं.

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क्रोएशिया महज ढाई दशक पहले जबरदस्त खूनखराबे और गृह युद्ध से गुजरते हुए नया राष्ट्र बना है


शुरुआती दौर में इस देश में इस टीम को तैयार करना भी कोई कम मुश्किल भरा नहीं था. 90 के मध्य में तब जो क्रोएशिया की टीम तैयार हुई, वो उनकी गोल्डन टीम कही जाती है. हालांकि मौजूदा टीम उससे कहीं आगे निकल चुकी है. जब उनका देश और परिवार उन पर फख्र कर सकते हैं. लेकिन उनका संघर्ष और समय के खिलाफ आगे बढ़ना दुनियाभर के तमाम लोगों के एक सबक भी है.

यूरोपीय टीमों में क्रोएशियाई खिलाड़ी
मौजूदा क्रोएशिया टीम के खिलाड़ी टॉप यूरोपीय क्लबों रियाल मैड्रिड, बार्सिलोना, लीवरपुल, मोनाको, इंटर मिलान और जुवेंटस से खेलते हैं. इसमें मोर्डिक, रेक्टिक और मेंडजुकिक ऐसे खिलाड़ी के रूप में उभरे हैं, जिन्हें यूरोप का हर बड़ा क्लब लेना चाहता है. क्रोएशिया के फुटबॉलर्स में टैलेंट कूट कूटकर भरा है.. मौजूदा क्रोएशियाई टीम सबसे को सबसे मुश्किल टीम माना जा रहा है.

किन खिलाड़ियों ने गृहयुद्ध झेला
लुका मोर्डिक, मारिया मेंडजुकिक और देजन लोरेन के परिवारों को बाल्कन गृहयुद्ध के दौर में पलायन करना पड़ा. उनके परिवारों ने बहुत मुश्किल हालात का सामना किए. इस मारकाट में उन्होंने अपने पारिवारिक जन भी गंवाए. मोर्डिक के बाबा को विरोधियों ने फांसी पर लटका दिया था. लोरेन के अंकल की हत्या कर दी गई. मेंडजुकिक ऐसे बच्चों के साथ बड़े हुए और पढ़े, जिसमें कई के पिता की सिविल वार में हत्या कर दी गई थी. इन तीनों के परिवारों को अपनी जड़ों से उखड़ कर सुरक्षित क्रोएशिया में पलायन करना पड़ा.
लोरेन का परिवार बोस्निया के एक गांव से भागकर क्रोएशिया पहुंचा. किसी तरह से उनका परिवार भागकर जर्मनी पहुंचा लेकिन वहां उन्हें शरण देने से मना कर दिया गया. तब वो वापस क्रोएशिया आ गए. सालों तक उनका बहुत बदहाल और गरीबी में रहा. तब घर के पैसे चुकाने के लिए लोरेन का पसंदीदा स्की बूट बेचना पड़ा.

देजन लोरेन आज भी उन भयावह दिनों को याद करके सिहर जाते हैं. सिविल वार में उनके अंकल की हत्या कर दी गई. परिवार को पलायन करना पड़ा


लोरेन ने खुद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री में कहा
उस छोटे से गांव बहुत भयावह चीजें हो रही थीं..लोगों को क्रूरता से मारा जा रहा था. मेरे अंकल को लोगों से सामने चाकू घोंपकर मार दिया गया. लोग देखते रह गए..मैं उसके बारे में कभी बात नहीं करता, क्योंकि उस पर बात करना वाकई मुश्किल है. मेरे परिवार का एक सदस्य जा चुका था..वो दौर बहुत मुश्किल था..

उस छोटे से गांव बहुत भयावह चीजें हो रही थीं..लोगों को क्रूरता से मारा जा रहा था. मेरे अंकल को लोगों से सामने चाकू घोंपकर मार दिया गया. लोग देखते रह गए..मैं उसके बारे में कभी बात नहीं करता, क्योंकि उस पर बात करना वाकई मुश्किल है. मेरे परिवार का एक सदस्य जा चुका था..वो दौर बहुत मुश्किल था..
क्रोएशिया खिलाड़ी इवान पेरिसिक का परिवार भी उसी गरीबी और डर से गुजरा. उनका परिवार क्रोएशिया के ग्रामीण क्षेत्र एक मुर्गी के दड़बे में छिप गया.
मोर्डिक और मेंडजुकिक के परिवारों को दरबदर होना पड़ा. उनका बचपन अनिश्चितता में गुजरा. उन दिनों वो पुरानी और फटी फुटबाल से खेला करते थे. इन हादसों ने इस खिलाड़ियों को बचपन में ही ज्यादा बड़ा कर दिया. मोर्डिक जब पहली बार रियाल मैड्रिड़ खेलने गए तो उनके साथी खिलाड़ी अक्सर उनपर छींटाकशी करते थे. गरीबी और प्रतिकूल हालात ने उन्हें आगे बढने की इच्छाशक्ति दी.

क्रोएशिया के स्टार प्लेयर मोर्डिक के बाबा की सर्ब सैनिकों ने हत्या कर दी. बचपन में उन्होंने बहुत गरीबी देखी


मोर्डिक याद करते हैं
वो मुश्किल समय था. वो समय मुझे हमेशा याद आते हैं. लड़ाई ने मुझे मजबूत बनाया. जब आपने अपने सामने युद्ध और संहार देखा हो तो दूसरी समस्याएं बहुत छोटी हो जाती हैं.


क्रोएशिया टीम के गोलकीपर 33 साल के डेनिजेल सुबासिक तब सात साल के थे, जब लड़ाई शुरू हो गई. रोज बम गिरा करते थे. टीम के शानदार फुटबॉलर इवान रेक्टिक का परिवार भी जर्मनी और स्विटजरलैंड में शरणार्थियों की तरह रहा. जब रेक्टिक ने स्विट्जरलैंड की जगह क्रोएशिया से खेलने का फैसला किया तो उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिलीं.

क्रोएशिया टीम जीत के बाद नेशनल फ्लैग के साथ खुशी मनाती हुई


यूरोप के सबसे मजबूत लोग
वैज्ञानिकों का कहना है कि क्रोट्स यूरोप के सबसे लंबे और मजबूत लोग होते हैं. वहां आमतौर पर पुरुष पांच फीट 11 इंच और महिलाएं की औसत ऊंचाई पांच फीट पांच इंच होती है. क्रोएशिया के डरनिस कस्बे में पुरुषों की औसत लंबाई छह फीट डेढ इंच तक होती है.
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