World Environment Day 2021: प्रकृति की बहाली के लिए क्या चेतावनी दे रहा है UN

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि प्रकृति (Nature) और जलवायु के उपचार के लिए बहुत सारे शहरी इलाकों को जंगलों में पुनर्जीवित करना ही होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) पर संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि प्रकृति (Nature) को बहाल करने के लिए बड़े क्षेत्र में जंगलों को पुनर्जीवित करना होगा.

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    विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के मौके पर दुनिया एक बार फिर पृथ्वी के पर्यावरण का अवलोकन कर रही है. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खतरे और गंभीर होते जा रहे हैं और हमारे वैज्ञानिक अब बहुत ठोस और बड़ा कदम उठाने की सलाह एक चेतावनी के तौर पर देने लगे हैं. इस बार संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने कहा है कि दुनिया को प्रकृति और जलवायु संबंधी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए चीन के आकार के जंगलों को वापस हासिल करना ही होगा.

    काफी नहीं हैं प्रयास
    हाल ही में कुछ समय से यह माना जा रहा है कि वर्तमान पर्यावरण संरक्षण के प्रयास व्यापक जैवविविधता की हानि और पारिस्थितिकी तंत्र के ढहने को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. वैश्विक निकाय ने पारिस्थितिक तंत्र पुनर्बहाली दशक के शुरू होने के मौके पर प्रकृति में खेत, जंगल और दूसरे पारिस्थितिकी तंत्रों को बड़े पैमाने पर पुनर्जीवित करने की आपात आवश्यकता बताया.

    2030 तक करना होगा ये काम
    संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और खाद्य और कृषि संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारों को कम से कम एक अरब हैक्टेयर की जमीन साल 2030 तक फिर से बहाल करना होगा और इसी तरह का संकल्प महासागरों के बारे में भी लेना होगा. गार्जियन के अनुसार जितना प्राकृतिक संसासधन प्रकृति हर साल पुनर्जीवित कर सकती है इंसान उसका 1.6 गुना उपयोग कर रहा है.

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    रिपोर्ट के अनुसार दुनिया को चीन के बारबर का इलाका फिर से जंगल (Forest) में बदलना होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    पृथ्वी के सेहत प्राथमिकता में नहीं
    संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पृथ्वी की सेहत के तुलना में दुनिया में छोटे आर्थिक लाभों को प्राथमिकता दी जा रही है. उसका कहना है कि सरकारों, व्यापारियों और नागरिकों सहित पूरे समाज को शहरी क्षेत्रों फिर से जंगल बनाने के साथ घास के मैदानों, सवाना, समुद्री इलाकों को फिर से बहाल करना होगा.

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    क्या संभव है ये
    पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली के दशक के संयोजक टिम क्रिस्टोफरसन  ने कहा, “पुनर्बहाली को देश की भलाई केलिए किया जाने वाला अधोसंरचना निवेश की तरह देखा जाना चाहिए. बहुत से लोगों को 1अरब हेक्टेयर बहाल करने के बारे में सोचना एक कल्पना लगता होगा. हमने दशकों के अनुभव से सीखा है कि यह कैसे काम कर सकता है, लेकिन इस पैमाने पर नहीं जिसकी हम बात कर रहे हैं. हमारे पर अंतरिक्ष कार्यक्रम हैं आणविक हथियार हैं. यह सब सभव है.”

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    प्रकृति (Nature) की पुनर्बहाली कोई बहुत नामुमकिन काम नहीं हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    इतनी आबादी पहले से ही प्रभावित
    संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक इनगर एंडरसन और खाद्य संगठन के निदश लिखे आमुख के मुताबिक दुनिया का आधा सकल घरेलू उत्पाद प्रकृति पर निर्भर है और पारिस्थितिकी तंत्रों का अपरदन दुनिया की 40 प्रतिशत आबादी को पहले ही प्रभावित कर रहा है.

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    इस रिपोर्ट में माना गया है कि पुनर्बहाली का विज्ञान अभी नया  फिर और दूसरे संधारणीय कृषि तकनीकें जो पहले ही अच्छे से समझी जा चुकी हैं उन्हें बढ़ाया जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि वह सरकारों के साथ काम कर पुनर्बहाली की परियोजनाओं को प्रेरित करने का काम करता रहेगा. क्रिस्टोफरसन का कहना है कि इस  तरह के बड़े पैमाने पर बहाली आमतौर पर नहीं होती. इनके निवेश में बड़े अधोसंरचना परियोजनाओं की तरह जटिलता होती है.