Coronavirus: दुनिया के सबसे तेज सुपर कंप्यूटर ने खोज निकाली कोरोना वायरस की काट!

खोज में 77 ऐसे केमिकल्स की पहचान हुई है जो कोरोना वायरस को जहां के तहां रोक देंगे

खोज में 77 ऐसे केमिकल्स की पहचान हुई है जो कोरोना वायरस (coronavirus) को जहां के तहां रोक देंगे. माना जा रहा है कि इनकी मदद से वायरस का टीका (vaccine of coronavirus) तैयार हो सकेगा.

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    चीन (China) के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस (Coronavirus) अब तक 170 से ज्यादा देशों में फैल चुका है. जिस तेजी से वायरस फैल रहा है, वैज्ञानिकों पर दबाव है कि वे अपनी खोज में और तेजी लाएं. इसी कड़ी में दुनिया के सबसे तेज सुपर कंप्यूटर (world's fastest supercomputer) Summit ने एक अहम खोज करने का दावा किया है. IBM के इस सुपरकंप्यूटर ने कई तरह की जांच के जरिए पता लगाता है कि दवाओं की किस तरह की प्रॉपर्टी के जरिये वायरस को फैलने से रोका या नियंत्रित किया जा सकता है.

    Oak Ridge National Laboratory के हेल्थ एक्सपर्ट्स की यह खोज विज्ञान पत्रिका ChemRxiv छपी है. ये बताती है कि कैसे कोरोना वायरस इंसानी शरीर में अपने लिए होस्ट कोशिका चुनते हैं और कैसे धीरे-धीरे अपना संक्रमण फैलाते हैं. यही होस्ट कोशिका, जिसे विज्ञान की भाषा में spike कहा जा रहा है, इसकी पहचान के बाद सुपर संप्यूटर ने देखा कि किस तरह से दवाएं सीधे उस कोशिका से ही जुड़ जाएं ताकि संक्रमित कोशिका से दूसरी कोशिकाओं तक इंफेक्शन फैलने से रोका जा सके.

    अगला कदम यह होगा कि वे सुपर कंप्यूटर के जरिए दोबारा इस प्रक्रिया की जांच करें


    ओक रिज के शोधकर्ता Micholas Smith ने जनवरी में ही इसका एक मॉडल तैयार किया. समिट सुपर कंप्यूटर की मदद से ये देखा गया कि कोरोना वायरस में पाए जाने वाले प्रोटीन दवाओं से कैसे प्रतिक्रिया करते हैं. कंप्यूटर ने 8 हजार से भी ज्यादा दवाओं के साथ ये जांच की. इन 8 हजार से ज्यादा दवाओं में से 77 ऐसी दवाओं की पहचान की. ये 77 केमिकल इस आधार पर चुने गए कि वे स्पाइक यानी होस्ट कोशिका से कितनी जल्दी और कितनी आसानी से जुड़ पाते हैं.

    अब वैज्ञानिकों का अगला कदम यह होगा कि वे सुपर कंप्यूटर के जरिए दोबारा इस प्रक्रिया की जांच करें. एक ओर जहां कोरोना वायरस की पहचान और उसके टीके के संबंध में दुनियाभर के वैज्ञानिक खोज में लगे हुए हैं और यहां तक कि अमेरिका में इसका पहला ह्यूमन क्लनिकल ट्रायल शुरू हो चुका है, ऐसे में सुपर कंप्यूटर की ये नई खोज टीके या दवा की ओर काफी अहम खोज साबित हो सकती है. Oak Ridge National Laboratory Center for Molecular Biophysics के डायरेक्टर Jeremy Smith कहते हैं कि कंप्यूटर के जरिए हमारी खोज का फिलहाल ये दावा कतई नहीं कि हमने कोरोना का इलाज खोज लिया है. लेकिन ये पक्का है कि हमारी रिसर्च की मदद भविष्य में इलाज खोजा जा सकेगा.

    ये दुनिया के किसी भी सबसे तेज कंप्यूटर से 1 मिलियन गुना ज्यादा ज्यादा तेज है


    समिट कैसे सामान्य कंप्यूटर से अलग है
    अमेरिका के Department of Energy ने साल 2014 में इसपर काम शुरू किया था. इस सुपर कंप्यूटर के पास 200 petaflop की ताकत है यानी आसान भाषा में समझें तो ये दुनिया के किसी भी सबसे तेज कंप्यूटर से 1 मिलियन गुना ज्यादा ज्यादा तेज है. इससे पहले भी ये कंप्यूटर अल्जाइमर्स जैसी बीमारी के इलाज की दिशा में खोज कर चुका है. अब शोधकर्ताओं की टीम समिट पर दोबारा इन 77 रसायनों की जांच करेगी कोरोना वायरस के इलाज के लिए बेहतर मॉडल बनाया जा सके.

    फिलहाल कोरोना वायरस का टीका खोजने में जुटे डॉक्टर मरीजों के इलाज में दवाओं का कई तरह का कांबिनेशन इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें पैरासिटामोल के अलावा कई जगहों पर सर्दी-खांसी में काम आने वाली दवाएं भी अलग-अलग सॉल्ट के साथ दी जा रही हैं. कहीं-कहीं Hiv की दवाओं को भी इनके साथ दिया जा रहा है लेकिन डॉक्टर फिलहाल किसी भी इलाज के बारे निश्चित तौर पर नहीं कह पा रहे हैं.

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