अब इस देश के पास है सबसे तेज सुपर कंप्यूटर, है सामान्य कंप्यूटर से 1000 गुना तेज

अब इस देश के पास है सबसे तेज सुपर कंप्यूटर, है सामान्य कंप्यूटर से 1000 गुना तेज
जापान के सुपर कंप्यूटर फुगाकू को सबसे तेज कंप्यूटर का दर्जा मिला है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

जापान के सुपर कंप्यूटर फुगाकू (Japanese supercomputer Fugaku) को दुनिया के सबसे तेज कंप्यूटर का दर्जा मिला (world's fastest supercomputer) है. ये कंप्यूटर अब कोरोना वायरस (coronavirus) से जंग में भी काम आने जा रहा है. 

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22 जून को जापान में कंप्यूटर डेवलपर्स ने एक अहम घोषणा के तहत बताया कि उनका कंप्यूटर दुनिया के सबसे तेज कंप्यूटर्स की दौड़ में सबसे ऊपर पहुंच गया है. दुनिया के सबसे तेज 500 कंप्यूटरों की लिस्ट बनाने वाली साइट Top500 ने इसे सबसे तेज माना है. बता दें कि अमेरिका और जर्मनी ने सुपर कंप्यूटरों पर एक बेंचमार्क बनाया था. इसी आधार पर दुनियाभर के कंप्यूटरों को नापा-जोखा जाता रहा. अब जापान के इस नए कीर्तिमान से माना जा रहा है कि कोरोना के इलाज में भी कोई ठोस मदद मिल सकेगी.

फुगाकू को जापान की ही एक कंपनी रिकेन साइंटिफिक रिसर्च सेंटर ने बनाया. इसके साथ फ्यूजित्सू ने भी काम किया. फुगाकू की स्पीड का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कि ये एक सेकंड में 415 क्वाड्रिलियन की गणना कर सकता है. इसने ये भी पता लगा लिया है कि सांस से कैसे पानी की बूंदें (वॉटर ड्रॉपलेट्स) फैलती हैं. बता दें कि कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा सांस से निकली पानी की सूक्ष्म बूंदों से है, जो मास्क के साथ भी कई बार फैल जाती हैं.

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साल 2011 के बाद जापान के किसी कंप्यूटर को सुपर कंप्यूटर का दर्जा मिल सका है, इससे पहले पूरे 9 सालों तक लगातार ये खिताब कभी अमेरिका तो कभी जर्मनी के पास जा रहा था. इससे पहले के दो सालों तक अमेरिका के सुपर कंप्यूटर के पास ये दर्जा था. उसकी स्पीड भी फुगाकू के आगे कुछ नहीं है. द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक जापानी कंप्यूटर उससे 2.8 गुना तेज है. वहीं सामान्य कंप्यूटर, जिन्हें हम-आप जैसे लोग इस्तेमाल करते हैं, उनसे फुगाकू 1000 गुना तेज है.
इससे पहले के दो सालों तक अमेरिका के सुपर कंप्यूटर के पास ये दर्जा था (Photo-pixabay)


इस कंप्यूटर पर जापान की सरकार और वैज्ञानिक पिछले 6 सालों से काम कर रहे थे. जापान के कोबे शहर में इसपर दिन-रात काम चला. सेकंड्स में मुश्किल से मुश्किल चीजें हल कर सके, इसके लिए वैज्ञानिकों ने इसमें डेढ़ लाख प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाईं.

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जापान में वैज्ञानिकों की इतनी मेहनत का मतलब सिर्फ किसी प्रतियोगिता में आगे रहना नहीं था, बल्कि कई खास बातों के लिए इसे तैयार किया गया. जैसे जापान भूकंप के लिए काफी संवेदनशील है. वहां जब-तब इसके कारण बड़े नुकसान होते रहे हैं. जापान के अखबार Nikkei के अनुसार फुगाकू को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये भूकंप का भी अंदाजा लगा सके और साथ ही उससे हुए नुकसान की गणना कर सके. साथ ही ये सुनामी जैसी आपदाओं के वक्त का सही अंदाजा करते हुए ये सुझा सकता है कि कम से कम वक्त में लोगों और जरूरी चीजों को कैसे बचाया जाए.

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अब एक्सपर्ट ये उम्मीद कर रहे हैं कि कोरोना के मामले में भी फुगाकू से मदद मिल सकेगी. इसपर काम भी शुरू हो चुका है. ये भी माना जा रहा है कि फिलहाल वायरल बीमारियों के इलाज के लिए मौजूद 2000 से ज्यादा दवाओं में से भी ये पहचान कर सकेगा कि कौन सी दवा ज्यादा फायदेमंद है. इसके साथ ही वे दवाएं भी शामिल होंगी, जिनका अब तक क्लिनिकल ट्रायल नहीं हो सका है.

कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा सांस से निकली पानी की सूक्ष्म बूंदों से है (Photo-pixabay)


वैसे कोरोना के नया वायरस होने के कारण जानकारी के अभाव को पाटने के लिए भी साइंटिस्ट सुपर कंप्यूटर का सहारा ले रहे हैं. जापान से पहले अमेरिका के सुपर कंप्यूटर ने इसपर काम शुरू किया था. IBM के इस सुपरकंप्यूटर Summit ने कई तरह की जांच के जरिए पता लगाता है कि दवाओं की किस तरह की प्रॉपर्टी के जरिए वायरस को फैलने से रोका या नियंत्रित किया जा सकता है. इस खोज में 77 ऐसे केमिकल्स की पहचान हुई है जो कोरोना वायरस को जहां के तहां रोक देंगे. माना जा रहा है कि इनकी मदद से वायरस का टीका तैयार हो सकेगा.

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Oak Ridge National Laboratory के हेल्थ एक्सपर्ट्स की यह खोज विज्ञान पत्रिका ChemRxiv छप चुकी है. ये बताती है कि कैसे कोरोना वायरस इंसानी शरीर में अपने लिए होस्ट कोशिका चुनते हैं और कैसे धीरे-धीरे अपना संक्रमण फैलाते हैं. यही होस्ट कोशिका, जिसे विज्ञान की भाषा में spike कहा जा रहा है, इसकी पहचान के बाद सुपर संप्यूटर ने देखा कि किस तरह से दवाएं सीधे उस कोशिका से ही जुड़ जाएं ताकि संक्रमित कोशिका से दूसरी कोशिकाओं तक इंफेक्शन फैलने से रोका जा सके. बता दें कि इससे पहले भी सुपर कंप्यूटर्स ने ही अल्जाइमर्स जैसी बीमारी के इलाज की दिशा में अहम खोज की थी.
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