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दुनिया की पहली फ्लाइंग कार ने स्लोवाकिया में नापे दो शहर, क्या भारत भी है दौड़ में?

अब उड़ने वाली कार का सपना सच होने जा रहा है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

अब उड़ने वाली कार का सपना सच होने जा रहा है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

स्लोवाकिया में पहली उड़ने वाली कार (first ever flying car in Slovakia) ने दो शहरों के बीच उड़ान भरकर तहलका मचा दिया. कार रनवे पर दौड़ते हुए कुछ ही मिनट में उड़ने वाली कार बन जाती है.

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    दुनिया की पहली उड़ने वाली कार बन चुकी है. एयरकार नामक कंपनी की बनाई इस कार ने जून के अंत में स्लोवाकिया के दो शहरों नित्रा और ब्रातिस्‍लावा के बीच उड़ान भरी, जिसमें उसे केवल 35 मिनट लगे. कार चलते हुए 3 मिनट से भी कम समय में फ्लाइंग कार में बदल जाती है और इसमें 200 किलोग्राम तक वजनी लोग बैठकर आराम से यात्रा कर सकते हैं.

    कैसे काम करती है कार 
    अब तक हमने साइंस फिक्शन या फिर कार्टून में ही उड़ने वाली कार देखी लेकिन अब ये सपना हकीकत बनने जा रहा है. दरअसल एक कार के सफल परीक्षण के बाद से इस दिशा में कई ऐतिहासिक बदलाव हो सकते हैं. दो शहरों के बीच उड़ान भरने के बाद से फ्लाइंग कार की चर्चा हो रही है कि ये क्या है और कैसे काम करती है.

    क्या है कार की खासियत 
    फ्लाइंग कार में 160 हार्स पावर का BMW का इंजन लगा है, उसकी निर्माता कंपनी एयरकार ने अपनी कार की खासियत बताते हुए ये बात भी कही. यानी अगर कार को चलना नहीं, बल्कि उड़ना है तो जाहिर तौर पर उसका इंजन काफी मजबूत होना चाहिए. हालांकि कार की खासियत ये है कि वो उसी सामान्य पेट्रोल से चलती है, जिससे बाकी कारें.

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    कार लगभग 8200 फुट की ऊंचाई पर, करीब 1000 किमी तक उड़ान भर सकती है- सांकेतिक फोटो (flickr)


    कितनी है रफ्तार 
    एक बार टैंक भरवाने पर पर कार लगभग 8200 फुट की ऊंचाई पर और करीब 1000 किमी तक उड़ान भर सकती है. उड़ने में मदद के लिए कार में एक पैराशूट और एक प्रोपेलर लगा हुआ है. वैसे तो ये कार लगभग 170 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से उड़ती है लेकिन कंपनी इस स्पीड को लगभग दोगुना करने की बात भी कर रही है.

    फ्लाइंग कार अपनी खूबियों के कारण भारी फेरबदल कर सकती है
    इससे शहरों की सड़कों पर दबाव कम हो सकता है. इससे सड़क हादसे भी घट जाएंगे और कई बातें आसान होंगी. हालांकि इसकी एक कमी भी है. फिलहाल इस कार को सीधे सड़क से आसमान में नहीं उड़ाया जा सकता, बल्कि इसके लिए रनवे की जरूरत पड़ती है. साथ ही लैंडिंग के लिए भी कार को रनवे चाहिए. यानी कार अभी इस्तेमाल में लानी शुरू भी हो सके तो केवल उन्हीं जगहों से उन पॉइन्ट्स तक यात्रा कर सकती है, जहां हवाई अड्डा हो.

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    फिलहाल फ्लाइंग कार को उड़ान भरने और लैंडिंग के लिए रनवे चाहिए होता है- सांकेतिक फोटो


    कारोबारी दिखा रहे दिलचस्पी 
    जरूरत को देखते हुए फ्लाइंग कार के बारे में बहुत से लोग बात कर रहे हैं. बड़े कारोबारी इसके निर्माण में दिलचस्पी ले रहे हैं. इसी बीच साल 2019 में, सलाहकार कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने भविष्यवाणी की थी कि साल 2040 तक ये सेक्टर लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर का हो जाएगा. यानी कई कारें कमर्शियल तौर प लॉन्च हो चुकी होंगी और मांग बढ़ती जाएगी.

    सुपर कार की बात 
    एलन मस्क ने ही ट्विटर पर टेस्ला की एक सुपर कार की बात की, जो उनके मुताबिक साल 2022 तक लॉन्च हो सकती है. इससे पहले जापान की एक कंपनी ने भी साल 2020 में फ्लाइंग कार का जिक्र किया था. घोषणा के कुछ ही समय बाद कंपनी स्काईड्राइव को जापान के सरकारी बैंक से लंबी-चौड़ी फंडिंग का एलान हुआ. कंपनी के मुताबिक वो साल 2023 तक कार को कमर्शियल तौर पर ला सकेगी.

    ओला में दिखाया था भ्रामक वीडियो
    कई देश अपनी-अपनी उड़ने वाली कार की बात कर रहे हैं. इस बीच भारत में भी ओला ने Ola AirPro नाम से एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार की बात की. पूरी तरह से ऑटोमेटिक इस कार के प्रोटोटाइप का एक वीडियो भी वायरल हुआ था. इसमें बेहतरीन तकनीक का दावा किया गया. बाद में लोगों को पता चला कि 1 अप्रैल को आया ये वीडियो अफ्रैल फूल प्लान का हिस्सा था. कुल मिलाकर भारत को अभी अपनी फ्लाइंग कार के लिए काफी इंतजार करना होगा.

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