World Haemophilia Day 2021: जानिए कितनी खतरनाक है ये ‘शाही’ बीमारी

हीमोफीलिया (Haemophilia) के बारे में लोगों में बहुत जागरुकता की जरूरत है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

हीमोफीलिया (Haemophilia) के बारे में लोगों में बहुत जागरुकता की जरूरत है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

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  • Last Updated: April 17, 2021, 6:45 AM IST
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पूरी दुनिया में 17 अप्रैल का दिन विश्व हिमोफीलिया दिवस (World Haemophilia Day) के रूप में मनाया जाता है. इस दिन को लोगों के प्रति हीमोफीलिया रोग और रक्त बहने संबंधी अन्य विकारों (Bleeding Disorders) के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए मनाया जाता है. हीमोफीलिया रक्त से जुड़ी एक खतरनाक अनुवांशिक (Hereditary) बीमारी है जिसमें चोट लगने के बाद खून बहने लगता है तो बंद नहीं होता है और इस वजह से यह जानलेवा साबित हो जाता है.

लेकिन 17 अप्रैल ही क्यों

वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया (WHF) के संस्थापक फ्रैंक केनेबल की 1987 में संक्रमित खून के कारण एड्स होने से मौत हो गई थी. इसके दो साल बाद फ्रैंक के जन्म दिन 17 अप्रैल 1989 को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाने की शुरुआत हुई. तभी से हर साल 17 अप्रैल को यह दिवस मनाया जाता है.

क्यों कहा जाता था इसे शाही बीमारी
हीमोफीलिया के बारे में दुनिया मे लोगों को सही और पूरी जानकारी नहीं है. शाही बीमारी कही जाने वाले इस रोग के बारे में ससे पहले तब पता चला था जब ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के वंशज एक के बाद एक इस बीमारी की चपेट में आने लगे थे. इसी वजह से इसे शाही बीमारी भी कहा जाने लगा था और लोग यह मानने भी लगे थे कि यह कुलीनों को होने वाला रोग है.

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हीमोफीलिया (Haemophilia) के रोगियों में खून का थक्का जमने में परेशानी होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


एक अनुवांशिक विकार



हीमोफीलिया एक अनुवांशिक विकार है जिसे पैतृक रक्तस्राव भी कहते हैं. यह रोग आमतौर पर केवल पुरषों में ही होता है लेकिन औरतें इसकी संवाहक यानि करियर हो सकती हैं. यानी औरतों को ये रोग तो नहीं होता है, लेकिन उनके जरिए उनकी संतानों को जरूर हो जाता है. यानि अगर पिता को यह रोग है, तो माता को नहीं होगा, लेकिन उसके जरिए उनके लड़के को ये रोग होगा, लेकिन लड़की को नहीं होगा पर उसकी संतानों को होने की संभावना बनी रहती है.

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क्या है ये रोग

आमतौर पर जब भी हमारे शरीर के किसी हिस्से को चोट लगती है  और उससे खून बहने लगता है तो शरीर सामान्य प्रक्रिया के तहत वहां खून का थक्का जमाने के प्रयास करता है. लेकिन

हीमोफीलिया में शरीर के बाहर बहता हुआ रक्त जम नहीं पाता है. इसके कारण चोट या दुर्घटना में यह जानलेवा साबित होती है क्योंकि रक्त का बहना जल्द ही बंद नहीं होता.

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समय के साथ हीमोफीलिया (Haemophilia) के इलाज के बहुत विकल्प उपलब्ध होने लगे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


भारत में कम हैं इसके रोगी

इसके बारे में कहा जाता है कि इस रोग का कारण एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है, जिसे 'क्लॉटिंग फैक्टर' कहा जाता है. यह फैक्टर बहते हुए रक्त के थक्के जमाकर उसका बहने से रोकता है. भारत में इस रोग से पीड़ित रोगियों की संख्या कम है. यह बीमारी रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी से होती है. थ्राम्बोप्लास्टिक में ही खून को शीघ्र थक्का कर देने की क्षमता होती है. खून में इसके न होने से खून का बहना बंद नहीं होता है.

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बहुत हैं इलाज के विकल्प

ऐसा नहीं है कि रोगियों में थक्का जमता ही नहीं है, बल्कि थक्का बहुत ज्यादा देर से बनता है और उससे पहले ही रोगी की हालत गंभीर हो जाती है. कई बार इस बीमारी की वजह से लीवर, किडनी, मांसपेशियों जैसे अंदरूनी अंगों से भी रक्तस्राव होने लगता है. इसके इलाज के रूप में कई तरह की दवाएं और खून को बदलने जैसे विकल्प हैं. बताया जाता है कि इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को हेपेटाइटिस ए और बी का टीका लगावने से फायदा होता है.
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