बेहद प्रभावशाली है इस बार विश्व प्रतिरक्षण सप्ताह की थीम

बेहद प्रभावशाली है इस बार विश्व प्रतिरक्षण सप्ताह की थीम
भारत के 12 से 23 महीनों के करीब 62 फीसदी बच्चे पूरी तरह से प्रतिरक्षा प्रणाली पर खरे उतर रहे हैं. सभी को डीटीपी के तीनों टीके लग रहे हैं.

भारत के 12 से 23 महीनों के करीब 62 फीसदी बच्चे पूरी तरह से प्रतिरक्षा प्रणाली पर खरे उतर रहे हैं. सभी को डीटीपी के तीनों टीके लग रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2019, 9:41 PM IST
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यह पहले ही साबित हो चुका है कि टीकाकरण हर साल लाखों लोगों की जान बचाने का एक किफायती और सुरक्षित तरीका है. लेकिन इसके बाद भी दुनियाभर में 2 करोड़ से ज्यादा बच्चे बिना टीकाकरण के ही रह जा रहे हैं.

क्या है विश्व प्रतिरक्षण सप्ताह
दुनियाभर के बच्चों में टीकाकरण की कमी महसूस करते हुए, विश्व स्वास्‍थ्य संगठन (WHO) ने अप्रैल के आखिरी सप्ताह को विश्व प्रतिरक्षण सप्ताह (World Immunization Week) के तौर मनाने का निर्णय लिया है. इसमें दुनियाभर में टीकाकरण के महत्व, प्रतिरक्षण के महत्व को लेकर जागरुकता फैलाई जाएगी. ताकि बच्चों का जीवन बचाया जा सके.

इस अभियान से इतना कुछ पाने का है लक्ष्य
डब्‍ल्यूएचओ ने इस साल की थीम साथ में हुए सुरक्षितः टीकाकरण ने किया काम! (‘Protected Together: Vaccines Work!’) को रखा है. इसमें उन लोगों का भी सम्मान होगा जिन्होंने पहले से टीकाकरण की दिशा में काफी काम किया है और उन लोगों का भी जो अभियान से नये-नये जुड़ रहे हैं.



साथ ही इस साल के अभियान में यह भी लक्ष्य रखा गया है कि कैसे तकनीकी और फंड अथवा निवेश के समावेश से टीकाकरण की दर को बढ़ाया जा सकता है.

क्यों जरूरी है टीकाकरण?
पिछले कई सालों से लगातार ये देखा जा रहा है कि पूरी दुनिया में टीकाकरण के जरिए खसरा, टेटनस, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया और पर्टुसिस जैसी बीमारियों से बच्चों को बचाया जा सकता है. लेकिन उसी के साथ यह भी देखा जा रहा है कि भारी संख्या में बच्चों तक इन बीमारियों का टीका पहुंच ही नहीं पा रहा है. इसके पीछे बच्चों के परिवारों में जागरुकता और कई बार उनका गरीब होना आड़े आ रहा है.

टीकाकरण अभियान के कुछ मुख्य विंदु
1. साल 2000 से 2016 के बीच खसरा से होने वाली करीब 84 फीसदी मौतों पर लगाम लगाने में सफलता मिली.

2. दुनियाभर में साल 2017 में 85 फीसदी बच्चों को डीटीपी के तीनों टीके लगाए गए. हालांकि इसके बाद भी दुनिया में करीब 2 करोड़ बच्चे इससे महरूम रहे गए.

3. साल 2014 में ही डब्‍ल्यूएचओ ने भारत को पोलिया-मुक्त देश घोष‌ित कर दिया था. जबकि पूरी दुनिया में साल 1988 की तुलना में अब करीब 99 फीसदी तक लगाम लग चुकी है.

4. एक आंकड़े के अनुसार दुनिया के कुल 207 देशों में से 162 में रूबेला का टीका उपलब्‍ध हो गया है.

5. भारत के 12 से 23 महीनों के करीब 62 फीसदी बच्चे पूरी तरह से प्रतिरक्षा प्रणाली पर खरे उतर रहे हैं. सभी को डीटीपी के तीनों टीके लग रहे हैं.
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