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ज्वालामुखियों के लिए तैयार हो जाना चाहिए हमें, ऐसा क्यों कह रहे हैं वैज्ञानिक?

ज्वालामुखियों के लिए तैयार हो जाना चाहिए हमें, ऐसा क्यों कह रहे हैं वैज्ञानिक?

ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruptions) के नुकासान बहुत घातक और दूरगामी होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruptions) के नुकासान बहुत घातक और दूरगामी होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ज्वलामुखी विस्फोटों (Volcanic Eruptions) के प्रभाव के प्रति दुनिया में सही तरह की जागरूकता नहीं है. इनसे होने वाले विनाश को लेकर लोगों में काफी गलतफहमियां और कम गंभीरता है. पृथ्वी पर आए सभी महाविनाश (Mass Extinction) ज्वालामुखी विस्फोटों के दौर में ही हुए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया (World) के लोग और तमाम देशों की सरकारें अगले विशाल ज्वालामुखी विस्फोट से निपटने के लिए ना तो तैयार हैं और ना ही गंभीर हैं.

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हाइलाइट्स

ज्वालामुखी विस्फोट से बहुत विनाशकारी नुकासन होता है.
ज्वालामुखी प्रस्फोट के प्रति लोगों में कम गंभीरता है.
विशाल ज्वालामुखी विस्फोटों से निपटने की ठोस योजना नहीं है.

पृथ्वी (Earth) पर विनाश की आशंका की खबरों वायरल होने में देर नहीं लगती. हर हफ्ते कोई क्षुद्रग्रह या उल्कापिंड पृथ्वी की ओर आता है और इस बात के आंकलन होने लगते हैं कि क्या होगा अगर यह पिंड पृथ्वी से टकरा जाए. डायनासोर के विनाश के समय एक विशाल क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराया था, लेकिन तब हुए महाविनाश (Mass Extinction) का प्रमुख कारण उस समय बढ़ी हुई ज्वालामुखी (Volcanic Eruptions) गतिविधियां थीं. एक ज्वालामुखी विस्फोट कितना विनाशकारी हो सकता है इसका लोगों को सही अनुमान नहीं है. नए लेख में विशेषज्ञों ने चेताया है कि दुनिया वास्तव में विशाल ज्वालामुखियों के विस्फोटों  से निपटने के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं है जो कि चिंताजनक है.

कोई तैयारी नहीं
दरअसल ज्वालामुखी की घटनाओं के प्रभावों को समझना आसान काम नहीं है और इनके प्रभाव काफी लंबे समय तक दिखाई देते हैं. सच यही है कि अभी तक पृथ्वी पर जितने भी महाविनाश हुए हैं, उनका संबंध विशाल ज्वालामुखी विस्फोटों के दौर से जरूर रहा है. लाखों करोड़ों सालों से जमा मैग्मा विशाल ज्वालामुखी उत्सर्जन में निकलता है जो बहुत ही ज्यादा घातक होता है.

अगली आपदा की तैयारी की जरूरत
वैज्ञानिकों ने नेचर में प्रकाशित लेख में चेताया है कि दुनिया अगले बड़े प्रस्फोट के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं है. शोधकर्ताओं ने इस मामले में कई कदम सुझाए हैं और अगली विशाल आपदा की तैयारी के साथ साथ सक्रिय ज्वालामुखियों की निगारानी के लिए निवेश को बढ़ाने की मांग भी की  है. उनका यह भी कहना है कि इस मामले में जनशिक्षा और जाकरूकता की भी बहुत ज्यादा जरूरत है.

अगले सौ सालों में
विशेषज्ञों का कहना है कि इन विस्फोटों से निकलने को तैयार मैग्मा के प्रबंधन की तैयारी की भी जरूरत है. सभी उपायों के लिए संसाधनों की जरूरत है, जबकि पहले ही काफी देर हो चुकी है. इस लेख के सहलेखक लारा मनि का कहना है कि बर्फ में छिपे उत्सर्जन की आवृति के संकेतों के लंबे समय के आंकड़े सुझाते हैं कि  छह में से एक संभावना इस बात की अगले सौ सालों में 7 की तीव्रता का एक विस्फोट हो जाएगा. इतिहास में इस तरह के विशाल उत्सर्जनों ने जलवायु परिवर्तन के साथ सभ्याताओं को खत्म करने का काम किया है.

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दुनिया की सरकारें क्षुद्रग्रह (Asteroids) के टकराव से निपटने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

क्षुद्रग्रह और ज्वालामुखी?
ऐसा नहीं है कि केवल  आम जनता और गूगल ट्रेंड ही  किसी क्षुद्रग्रह के पृथ्वी की ओर आने और उसके टकराव की आशंका वाली खबरों के प्रति झुकाव रखते हैं. दुनिया की कई सरकारें भी ऐसा नजरिए रखती देखी गई हैं. एक अतिज्वालामुखी प्रस्फोट को तुलना एक किलोमीटर चौड़े क्षुद्रग्रह के टकराव से की जा सकती है और तो और ज्वालामुखी विस्फोट के होने की संभावना किसी क्षुद्रग्रह के टकराने की संभावना से कहीं ज्यादा है.

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बदलाव की जरूरत
मनि का कहना है कि क्षुद्रग्रह के खतरों से निपटने के लिए करोड़ों अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन ज्वालामुखी विस्फोटों से निपटने के लिए वैश्विक वित्त और संयोजन तक दिखाई नहीं देता है.  इसमें आपात रूप से बदलाव की जरूरत है. हमें ज्वालामुखियों द्वारा हमारे समाजों के लिए पेश किए जा रहे जोखिमों को पूरी तरह से कमतर आंक रहे हैं.

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टोंगा ज्वालामुखी (Tonga Volcano) का विस्फोट हमारे लिए एक गंभीर चेतावनी की तरह है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

बहुत ही घातक होता अगर
इस साल के शुरू में टोंगा में आया ज्वालामुखी अब तक के रिकॉर्ड किए गए सभी ज्वालामुखी में से सबसे तीव्र और घातक ज्वालामुखी था. शोधकर्ताओं ने इस  बात को रेखांकित किया कि यह विस्फोट भूमध्य सागर जैसे इलाके में हुआ होता जो पहले से ही काफी संवेदनशील संरचना वाला है, तो इसके वैश्विक प्रभाव और भी ज्यादा विनाशकारी हो सकते थे.

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इतना ही नहीं अगर यह ज्वालामुखी कुछ लंबे समय तक लावा उगलता रहता तो यह और घातक साबित होता मनि का कहना है कि टोंगो उत्सर्जन को एक चेतावनी वाली घटना समझा जाना चाहिए. इससे पहले का विनाशकारी विस्फोट साल 1815 में इंडोनेशिया में आया था जिसमें एक लाख लोग मारे गए थे. जबकि आज हमारी बढ़ी हुई जनसंख्या को ऐसी आपदाओं से कहीं ज्यादा खतरा है. इसके आर्थिक नुकसान महामारी की तरह होंगे.

Tags: Environment, Geology, Research, Science, World

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