दुनिया का सबसे बड़ा ऑइल पोर्ट, जहां हमला हुआ, क्या होगा भारत में असर?

सऊदी आरामको कंपनी की पोर्ट फैसिलिटी की तस्वीर अरब न्यूज़ से साभार.

सऊदी आरामको कंपनी की पोर्ट फैसिलिटी की तस्वीर अरब न्यूज़ से साभार.

OPEC से जुड़े 15 सदस्य कुल मिलाकर उतना तेल उत्पादन (Oil Production) नहीं करते, जितना सऊदी, रूस और अमेरिका (USA) मिलकर. अब सऊदी तेल भंडार (Oil Storage) पर हुए हमले से बड़े तेल आयातक (Oil Importer) भारत की परेशानी और कितनी बढ़ेगी?

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कच्चे तेल के उत्पादन (Crude Oil Production) के मामले में दुनिया के सबसे बड़े देश सऊदी अरब में स्थित है रैस तनूरा (Ras Tanura). यह सबसे बड़ा तेल निर्यातक पोर्ट (Largest Oil Export Facility) है, जिसके स्टोरेज क्षेत्र के पास रिहायशी कॉम्प्लेक्स में दो दिन पहले चरमपंथियों के ड्रोन हमले (Drone Attack) की खबरें आईं. हौती विद्रोहियों ने इस जगह को निशाना तो बनाया, हालांकि खबरों की मानें तो तेल और जानो माल का नुकसान नहीं हुआ. लेकिन तेल सप्लाई (Oil Supply) की सुरक्षा बढ़ाए जाने की कवायद के बीच पहले से बढ़ रहे दाम और बढ़ गए हैं.

पिछले साल अक्टूबर के महीने से ही लगातार तेल की कीमतें बढ़ रही थीं, जो ताज़ा घटनाक्रम के चलते 70.7 डॉलर प्रति बैरल तक और बढ़ गईं. अब सवाल यह है कि सऊदी अरब में यह जो हो रहा है, इससे भारत में तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा क्योंकि यहां पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस के भाव लगातार बढ़ रहे हैं. इससे पहले इस खास ऑइल पोर्ट को जानिए.

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क्या है रा तनूरा का भूगोल?
ऑइल को अगर दुनिया की इकोनॉमी की रीढ़ कहा जाए तो इस रीढ़ का सबसे अहम हिस्सा रैस तनूरा है. सऊदी अरब की सबसे आधुनिक औद्योगिक नगरी जुबैल में तरूत की खाड़ी में स्थित रैस तनूरा कॉम्प्लेक्स एक तरह का द्वीप है. अस्ल में सऊदी की सरकारी आधिपत्य वाली तेल कंपनी सऊदी आरामको ने आसान डॉकिंग के लिए कई आर्टिफिशियल द्वीप बनवाए हैं.

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सऊदी में सबसे बड़े तेल पोर्ट पर हुए हमले में किसी नुकसान की खबर नहीं है. (तस्वीर प्रतीकात्मक)


यह पोर्ट दाहरान जुबैल हाईवे के साथ दो लेन वाले हाईवे से जुड़ता है, जो कि जुबैल, दम्मम और दाहरान को आपस में जोड़ता है. इस शहर में एक छोटा सा रैस तनूरा एयरपोर्ट भी है. यह अस्ल में आरामको कंपनी के इस्तेमाल के लिए ही ज़्यादातर इस्तेमाल होता है, वो भी हेलिकॉप्टरों के लिए. दम्मम एयरपोर्ट से रैस तनूरा की दूरी घटाने के लिए एक नई सड़क और बन रही है.



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कितना बड़ा है यह पोर्ट?

फारस की खाड़ी में स्थित सबसे बड़े इस पोर्ट में कुल 18 बर्थ हैं जहां इतने जहाज़ खड़े होते हैं, जिनकी कुल मालवाहक क्षमता 5,50,000 डेडवेट टन की होती है. यहां जो टैंक फार्म है, उसकी कुल स्टोरेज क्षमता 33 मिलियन यानी 3.3 करोड बैरेल की है. तेल का सबसे बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर सऊदी के रैस तनूरा के अलावा जुआयमा के साथ ही अबकैक और लाल सागर स्थित यानबू पोर्ट में है.

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सऊदी की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तेल पर टिकी हुई है और यहां करीब 80 तेल व गैस फील्ड हैं, जिनमें से देश का आधा रिज़र्व सिर्फ 8 फील्ड में है. इतना बड़ा होने के बावजूद पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर इस तरह से केंद्रीकृत है कि यहां आतंकी हमलों का खतरा बना रहता है.

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सऊदी आरामको कंपनी के तेल स्टोरेज के लिए सांकेतिक तस्वीर


भारत में क्या और बढ़ेंगी कीमतें?

अगर कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल कुछ समय तक लगातार बनी रहीं और कम नहीं हुईं, तो बढ़े दामों से हलाकान लोग और महंगा पेट्रोल, डीज़ल व रसोई गैस खरीदने पर मजबूर होंगे. भारत में ये कीमतें केंद्र और राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्सों के अलावा इस पर भी निर्भर करती हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में तेल का भाव क्या है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मानें तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़त हो तो देश का आयात बिल बहुत बढ़ जाता है. वहीं, भारत अपनी कुल तेल ज़रूरत का 83 फीसदी तक आयात करता है. इसमें भी इराक, अमेरिका और सऊदी प्रमुख तेल निर्यातक हैं. सऊदी तो भारत के लिए पारंपरिक तेल निर्यातक देश रहा है. साफ है कि सऊदी में कच्चे तेल के दाम बढ़े तो भारत पर काफी असर पड़ेगा.
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