कोविड-19 महामारी के दौर में ज्यादा मायने रखता है विश्व तंबाखू निषेध दिवस

विश्व तंबाखू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) के मौके पर कोविड महामारी के बावजूद कई कार्यक्रम किए जा रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विश्व तंबाखू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) के मौके पर कोविड महामारी के बावजूद कई कार्यक्रम किए जा रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस साल विश्व तंबाखू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) के मौके पर माना है कि तंबाखू (Tobacco) के सेवन करने वाले लोग इसे छोड़ने की बात कर रहे हैं.

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दुनिया भर में तम्बाखू (Tobacco) कई बहुत बड़े व्यवासायों  का आधार है. इसमें सिगरेट (Cigarette) सबसे प्रमुख है. दुनिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक सुर में तम्बाखू सेवन के हर रूप के नुकसान से लोगों को परिचित कराते रहते हैं, लेकिन यह व्यवसाय बंद नहीं होते क्यों इनसे सरकारों को बहुत बड़ा राजस्व मिलता है. पिछले कुछ सालों में तंबाखू सेवन के विरोध में तेजी आई है. विश्व सवास्थ्य संगठन (WHO) हर साल 31 मई को विश्व तंबाखू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) मनाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सक्रियता

विश्व तंबाखू निषेध दिवस तंबाखू के उपयोग से संबंधित जोखिमों को रेखांकित करने के लिए मनाया जाता है. इस मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन बहुत से जागरुकता अभियान और कार्यक्रम आयोजित करता है जिससे लोग तंबाखू के खतरों से परिचित हो सकें और उन्हें तंबाखू के सेवन और लत को छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा सके.

कोविड महामारी में इस दिवस का महत्व
ऐसा लगता है कि इस साल दुनिया जहां कोरोना महामारी से जूझ रही है वहां विश्व तंबाखू निषेध दिवस की अहमियत उतनी नहीं होगी. लेकिन हकीकत कुछ और ही है. दरअसल कोविड-19 महामारी का संबंध इंसान के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से है. वैसे तो इस विषय पर अध्ययन नहीं हुआ है लेकिन जाहिर बात है कि तंबाखू का सेवन करने वालों के प्रतिरक्षा प्रणाली उतनी मजबूत नहीं होती है. ऐसे में इन लोगों को कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है.

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कोरोना काल में विश्व तंबाखू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है. सांकेतिक तस्वीर

डब्ल्यूएचओ ने भी माना



इस बात को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अपने संदेश में रेखांकित किया है. संगठन ने अपनी’वेबसाइट के विश्व तंबाखू निषेध दिवस के पेज पर अपनी थी ‘कमिट के क्वि’ यानि ‘छोड़ने के लिए संकल्प लें’ के साथ  लिखा है कि कोविड -19 महामारी ने लाखों तंबाखू उपभोगकर्ताओं को यह कहने के लिए मजबूर किया किया है कि वे तंबाखू छोड़ना चाहते हैं.  आज ही इसे छोड़ने का संकल्प ले और प्रतिज्ञाबद्ध हो जाएं.

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ये प्रयास भी

विश्व स्वास्थ्य संगठन केवल लोगों को ही जागरुक और तंबाखू के जोखिमों से परिचित कराने का काम नहीं करता है  वह दुनिया भर की सरकारों को ऐसी नीति बनाने के लिए प्रेरित भी करता है जिनके लागू होने पर धूम्रपान और अन्य तंबाखू उपयोगों को कम किया जा सके. इसके अलावा संगठन ने अपनी वेबसाइट पर तंबाखू छोड़ने में मदद करने के लिए कई तरह के सहयोग और प्रोत्साहन सामग्री और कार्यक्रम की जानकारी भी दी है.

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हर साल दुनिया में तंबाखू (Tobacco) के सेवन की वजह से 80 लाख लोग मरते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

हर साल 80 लाख लोगों की मौत

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक तंबाखू के उपयोग के कारण हर साल करीब 80 लाख लोग मारे जाते हैं. किसी भी तंबाखू के धूम्रपान से फोफड़ो की क्षमता कम जाती है और श्वास संबंधी बीमारियों की गंभीरता बढ़ जाती है. कोविड-19 महामारी में यह तथ्य और भी प्रासंगिक हो जाता है.

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ऐसे हुआ इसे मानाने का फैसला

साल 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठ ने एक प्रस्ताव पारित कर घोषणा की थी कि सात अप्रैल 1988 से विश्व धूम्रपान निषेध दिवस मनाया जाएगा. यह कानून लोगों को कम से कम 24 घंटों के लिए धूम्रपान छोड़ने के लिए बनाया गया  था. बाद में साल 1988 को ही संगठन ने एक और प्रस्ताव पारित किया और हर साल 31 मई को विश्व तंबाखू निषेध दिवस मनाने का फैसला किया.

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