युवाओं में धूम्रपान के मामले में भारत दूसरे स्थान पर, दुनिया के दो तिहाई स्मोकर 10 देशों में

2019 में तंबाकू से मरने वालों की संख्या 77 लाख के करीब पहुंच गई थी. (सांकेतिक तस्वीर)

World No Tobacco Day: अध्ययन बताते हैं कि जिन्होंनें कभी धूम्रपान नहीं किया, उनकी तुलना में धूम्रपान करने वालों की औसत उम्र करीब 10 साल कम होती है.

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    हर फिक्र को धुएं में उड़ाने के फलसफे को लगता है भारत के युवाओं ने गलत तरीके से अंतर्सात कर लिया है. 2019 के आंकड़े यही बात बताते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत 15-24 साल के युवाओं में धूम्रपान के मामले में विश्व में दूसरे नंबर पर था. भारत में करीब 2 करोड़ युवा धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करते हैं और 1990 से इस उम्र समूह के युवाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है.


    'नो वर्ल्ड टोबैको डे' के मौके पर लैंसेट और लैंसेट पब्लिक हेल्थ जरनल्स में छपे एक अध्ययन के मुताबिक वैश्विक स्तर पर धूम्रपान करने वालों की संख्या में 2019 में इज़ाफा देखने को मिला है और ये संख्या 110 करोड़ पहुंच गई है. यही नहीं तंबाकू से मरने वालों की संख्या भी 77 लाख के करीब पहुंच गई थी. खास बात ये है कि हर 5 युवाओं में से मरने वाला एक नया धूम्रपान करने वाला था. इनमें से 89 फीसद को 25 साल की उम्र में धूम्रपान की लत लग गई थी.


    दस देशों में हैं दुनिया के दो तिहाई स्मोकर (धूम्रपान करने वाले)
    दुनिया के 10 देशों में 2019 में सबसे ज्यादा तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों की तादाद थी. ये संख्या दुनियाभर के तंबाकू सेवन की आबादी का दो तिहाई था. इन देशों में चीन, भारत, इंडोनेशिया, अमेरिका, रूस, बांग्लादेश, जापान, टर्की, वियतनाम, फिलीपींस शामिल हैं. 15-24 उम्र समूह में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या के मामले में चीन (2 करोड़ 65 लाख), भारत ( करीब दो करोड़) और इंडोनेशिया (करीब एक करोड़) अव्वल देशों में शुमार है. वैश्विक स्तर पर इस उम्र समूह के धूम्रपान करने वालों की संख्या 15.5 करोड़ है.


    वहीं अगर इस उम्र के पुरुषों के तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या पर गौर करें, तो भारत ( 47 लाख ) पुरुष धूम्रपान करने वालों के साथ अव्वल है, वहीं मिस्र (12 लाख 40 हज़ार) और इंडोनेशिया (12 लाख 20 हज़ार) क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर है. वहीं अगर 15-24 उम्र समूह में महिलाओं के धूम्रपान सेवन करने वालों की बात करें, तो तुर्की (4.6 लाख), जोर्डन (1.1 लाख) और जॉम्बिया (1.1लाख) शीर्ष पर हैं.


    भारत जैसे देशों में पुरुष युवाओं में लगातार बढ़ता धूम्रपान का सेवन बहुत डराने वाला है. रिपोर्ट के लेखकों का कहना है इसे रोकने के लिए दो तरह की नीतियों पर काम किया जा सकता है. एक तो जो लोग धूम्रपान का सेवन कर रहे हैं उन्हें तंबाकू छुड़वाने के लिए अलग-अलग तरह की बाधाएं मसलन जुर्माने से लेकर सजा तक का प्रावधान रखा जाए. दूसरा, जिन्होंने अभी धूम्रपान का सेवन नहीं किया है वो इसे शुरू ना करें इस रणनीति पर काम किया जाए. हालांकि भारत युवाओं में बढ़ते धूम्रपान की लत को रोकने पर अच्छा काम कर रहा है और कई परियोजनाएं हैं जो इसमें महती भूमिका निभा रही हैं, जैसे मैत्री ( मोबिलाइजिंग यूथ फॉर टोबैको रिलेटेड इनीशियेटिव इन इंडिया) परियोजना. युवाओं में तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों की रोकथाम के लिए लगातार नई नीतिया भी बनाई जा रही हैं. रिपोर्ट के लेखक का कहना है कि तंबाकू के खात्मे, उससे जुड़े उत्पादों की रोकथाम और आने वाली पीढ़ी को तंबाकू मुक्त भविष्य देने के लिए भारत को गंभीरता से विचार करना होगा.


    किस वजह से कितनी मौतें
    2019 के आंकड़ों के मुताबिक तंबाकू से जुड़ी बीमारियों की वजह से मरने वालों की संख्या पर नज़र डालें, तो इसमें 17 लाख लोग दिल की बीमारी से, 16 लाख की मौत सीओपीडी, 13 लाख लोग ट्रेकियल, ब्रोंकल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारी और करीब 10 लाख लोगों स्ट्रोक की वजह से मारे गए. पहले किए गए अध्ययन बताते हैं कि जिन्होंनें कभी धूम्रपान नहीं किया, उनकी तुलना में धूम्रपान करने वालों की औसत उम्र करीब 10 साल कम होती है.