World Ocean Day 2021: महासागरों बहुत गहराई से जुड़ा है मानव जीवन

विश्व महासागर दिवस (World Ocean Day) पर लोगों को महासागरों के महत्व के प्रति जागरुक किया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विश्व महासागर दिवस (World Ocean Day) पर लोगों को महासागरों के महत्व के प्रति जागरुक किया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विश्व महासागर दिवस 2021 पर संयुक्त राष्ट्र की थीम महासागर (Ocean), जीवन और जीवनयापन (Livelihood) रखी है जो महासागरों से मानव जीवन (Human Life) के गहराई से जुड़े होने को रेखांकित करती है.

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हमारी पृथ्वी ((Earth) पर जीवन में पानी की बहुत भूमिका है. खुद इंसान की जिंदगी पानी पर ज्यादा दूर नहीं रह सकती है. लेकिन दुनिया का ज्यादातर पानी इंसान के पीने लायक तक नहीं हैं. वहीं पृथ्वी की 70 प्रतिशत सतह महासागरों (Oceans) से ढकी है. 8 जून को दुनिया विश्व महासागर दिवस (World Ocean Day) मना रही है. यह मौका यह समझने का है कि मानव जीवन महासागरों से कितनी गहराई से जुड़ा है और उसकी महासागरों के प्रति क्या जिम्मेदारी है.

मानव जीवन को प्रभावित करते हैं महासागर

केवल मानव के प्रत्यक्ष उपयोग के लिहाज देखें तो शायद दुनिया के 97 प्रतिशत पानी वाले महासागर मानव जीवन के बहुत काम के नहीं दिखाई देते. लेकिन हमारा जीवन कई मायनों में महासागरों से बहुत ही गहराई से जुड़ा है और इनमें बदलाव हमारे जीवन को बहुत ज्यादा हद तक प्रभावित करने की क्षमता रखता है.

क्या है उद्देश्य विश्व महासागर दिवस का
विश्व महासागर दिवस का उद्देश्य लोगों को महासागरों पर मानवीय गतिविधियों के दुष्प्रभावों और उनकी वजह से मानव जीवन के प्रभाव को समझने के लिए जागरुकता फैलाना है. इंसान की वजह से कचरा, जहाजों से तेल का महासागरों में फैलना, मछलियों और सागरीय जीवों को शिकार आदि ऐसी घटनाएं है  जिससे महासागर का जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है.

पूरी पृथ्वी प्रभावित है महासागरों से

दुनिया का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जो महासागरों से प्रभावित ना हो. बेशक महासागरों का खुद के पारिस्थिकी तंत्र हैं और और उसके अपने जीव जंतु हैं लेकिन पृथ्वी की जलवायु की बहुत सी प्रक्रियाएं महासागरों से किसी न किसी तरह से जुड़ी हुई हैं. यहां तक कि वायुमंडल में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा तक महासागरों से प्रभावित होती है.



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महासागरों (Oceans) का इंसानों लिए वही महत्व है जो वायुमंडल का है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

गैसों के आदान प्रदान का असर

जिस तरह से धरती के जीव वायुमंडल में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड आदान प्रदान करते हैं. उसी तरह से महासागरों में भी ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल से आती जाती है. जलवायु परिवर्तन से दुनिया के कई इलाकों में ना केवल जीव जंतु प्रभावित हो रहे हैं वे सारी प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो रही है जो वायुमंडल से इन गैसों का आदान प्रदान करती हैं.

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महासागरों में तेल

महासागरीय जीवन बेशक धरती के जीवन से बहुत विशाल है. लेकिन जैवविविधता महासागरों के पर्यावरण का सबसे अहम हिस्सा है. लेकिन मानव जनित गतिविधियां इसे बहुत बुरी तरह प्रभावित करती हैं. इनमें समुद्र में कचरा डालना सबसे प्रमुख है. उसमें भी किसी जहाज या समुद्र में तेल उत्खनन से महासागरों में तेल फैलना सबसे खतरनाक घटना है. इससे महासागरों की सतह से तो जीवन खत्म हो ही जाता है, समुद्र के अंदर गैसें और सूर्य की रोशनी भी अंदर नहीं जा पाती जो समुद्र के अंदर के जीवन को तहस नहस कर देता है.

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मानवीय गतिविधियां कई बार महासागरों के लिए बहुत ही घातक सिद्ध होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

और समुद्री कचरा

पिछले कुछ समय से दुनिया भर से महासागरों में पहुंचे प्लास्टिक वहां की जैवप्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इतना ही नहीं समुद्री जहाजों और तटीय शहरों से भी गंदा पानी और कचरा सीधे समुद्र में डाला जा रहा है जो सुमद्री जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है. प्रदूषण से हानिकारक पदार्थ मछलियों के पेट में जा कर उनका जीवन को खतरे में डाल ही रहे हैं  बल्कि इंसानों तक वापस भी पहुंच रहे हैं.

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वैसे तो दुनिया का 97 प्रतिशत पानी है वह महासागरों में है लेकिन जो पानी इंसान अपने उपयोग में लाता है उसमें से अधिकतर नदियों और झीलों से आता है जो बारिश से भरते हैं. बारिश का यह पानी महासागरों के वाष्पीकृत हो कर हवा में पहुंचकर उन बादलों का रूप लेता है जिनसे बारिश  होती है. वहीं दुनिया में आधे से ज्यादा लोगों को भोजन मछली है. इस तरह मानव जीवन महासागरों पर बहुत अधिक निर्भर है. ऐसे में महासागरों का ख्याल रखना भी इंसान की उतनी ही जिम्मेदारी है जितनी वायुमंडल को साफ रखने की.

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