10 करोड़ साल पुराना है दुनिया का सबसे पुराना Sperm, जानिए कैसे मिला ये

यह अब तक का खोजा गया सबसे पुराना जीवाश्म (Fossil) स्पर्म (Sperm) है (तस्वीर: Pixabay)
यह अब तक का खोजा गया सबसे पुराना जीवाश्म (Fossil) स्पर्म (Sperm) है (तस्वीर: Pixabay)

जीवाश्म विज्ञानियों (Palaeontologist) ने पेड़ों के रेजिन (Resin) में 10 करोड़ साल पुराने स्पर्म (Sperm) को खोजा है जिसने उद्भ्व (Evolution) के बारे में बहुत अहम जानकारियां दी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 20, 2020, 6:22 PM IST
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जीवाश्म विज्ञानी (Palaeontologist) जानवरों और अन्य जीवों का जीवाश्म (Fossils) की तलाश में बहुत सारा समय लगाते हैं. लेकिन बहुत ही कम बार या यूं कहें कि सौभाग्य से ही उन्हें पूरा जीवाश्म, जीवाश्म में भ्रूण जैसी काम की चीजें मिल पाती है. ऐसी ही एक सौभाग्यशाली खोज में शोधकर्ताओं ने जीवाश्म स्पर्म (Sperm) की खोज की है जो उन्हें कौड़ी के जैसे दिखने वाले क्रस्टाशियन (crustacean) जानवर के जीवाश्म में मिला. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह स्पर्म 10 करोड़ साल पुराना है और अब तक पाए गए स्पर्म में सबसे पुराना है.

कैसे सुरक्षित रह गया स्पर्म
आमतौर पर जीवाश्म में स्पर्म का मिलना संभव नहीं है. लेकिन इस जानवर के साथ कुछ खास सयोंग हुए होंगे जिससे यह जीवाश्म विज्ञानियों को मिल सका. यह स्पर्म शोधकर्ताओं को मादा ओस्ट्राकोड (ostracod) में मिला. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मादा ओस्ट्राकोड ने मरने से कुछ समय पहले ही संसर्ग (Mating) किया होगा जिसके बाद यह पेड़ों से निकलने वाले चिपचिपे पदार्थ अंबर (Amber) के अंदर फंस गई होगी. इसी वजह से स्पर्म समय के साथ जीवाश्म के साथ ही रह गया होगा.

इससे पहले मिला स्पर्म कितना पुराना था
यह अध्ययन  प्रोसिडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी में प्रकाशित हुआ है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह उनके बहुत ही दुर्लभ अवसर है जिससे वे इन जीवों के प्रजजन और उद्भव (evolution) के बारे में बहुत कुछ जान सकेंगे. अब तक का सबसे पुराना  जीवाश्म स्पर्म अंटार्कटिका में 5 करोड़ साल पुराने कीड़े के कोकून के अंदर पाया गया था.



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इस स्पर्म (Sperm) की खासयित यह है कि यह ओस्ट्राकोड (ostracod) से भी लंबा होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कहां पाए जाते हैं ये जीव
क्रस्टासीन एक म्यांमानसाइप्रिस हुई नाम की प्रजाति है जो आज के म्यांमान की तटीय और अंतरिक पानी के इलकों में पाई जाती है. इसके क्षेत्र के आसपास बहुत सी तादात में रेजिन वाले पेड़ पाए जाते हैं. शोधकर्ताओं ने अंबर में फंसे 39 ऑस्ट्राकोड्स का विश्लेषण किया था. उन्होंनें एक मादा ऑस्ट्राकोड के अंदर यह स्पर्म पाए जिनकी अंडाणुओं से अंतरक्रिया नहीं हो पाई थी.

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स्पर्म के आकार की अहमियत
बहुत से जानवर बड़ी मात्रा में छोटे आकार के स्पर्म पैदा करते हैं जिससे निषेचन (Fertilisation) की संभावना बढ़ जाए, लेकिन कुछ मक्खियां या आधुनिक ऑस्ट्राकोड कम संख्या में बड़े आकार के स्पर्म पैदा करते हैं. जिनकी पूंछ जानवर तक से बहुत लंबी होती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामले में निषेचन की संभावना बहुत बढ़ जाती है.

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लंबे स्पर्म (Sperm) की वजह से इन जीवों में निषेचन (Fertilization) की संभावना अधिक हो जाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या पता चल सकेगा?
शोधकर्ताओं को विश्वास है कि इस विशाल स्पर्म के अध्ययन से उन्हें पुराने और आज के समय में जीवों के विकास के बारे में बहुत सी जानकारी मिल सकेगी. शोधकर्ताओं का जोर यह पता लगाने में है कि पृथ्वी के इतिहास में विशाल स्पर्म वाले जीव कैसे आए और कितने लंबे समय तक जिंदा रहे.

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उनका कहना है कि पहले उन्हें पता नहीं था कि जिन जानवरों ने विशाल स्पर्म का उपयोग शुरू किया क्या वे जल्दी ही विलुप्त हो गए थे. लेकिन ऑस्ट्राकोड तो 10 करोड़ साल तक भी जीवित रह गए हैं. उनका कहना है कि विकासपरक नजरिए से देखा जाएं तो विशाल स्पर्म वाली नीति प्रजनन के लिहाज से लाभकारी साबित हो सकती है.
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