वर्ल्ड पॉपुलेशन डे : जानिए कितने साल बाद कम होने लगेगी भारत की जनसंख्या

भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है. 2024 तक हम चीन को भी पछाड़ देंगे. लेकिन एक ऐसा भी वक्त आने वाला है जब भारत की जनसंख्या कम होने लगेगी.

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Updated: July 11, 2019, 10:48 AM IST
वर्ल्ड पॉपुलेशन डे : जानिए कितने साल बाद कम होने लगेगी भारत की जनसंख्या
भारत की जनसंख्या 2024 में चीन से भी ज्यादा होगी
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Updated: July 11, 2019, 10:48 AM IST
आज विश्व जनसंख्या दिवस है. विश्व की बढ़ती जनसंख्या और उसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के तौर पर मनाया जाता है. दुनिया की आबादी किस तेजी से बढ़ रही है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि 1800 में दुनिया की आबादी थी 100 करोड़. जो 2018 में बढ़कर हो गई 761 करोड़. ग्लोबल पॉपुलेशन में पिछले छह दशकों में सबसे ज्यादा तेजी आई है. पिछले छह दशक में आबादी 120 फीसदी बढ़ी है. 1960 में दुनिया की आबादी 300 करोड़ थी.

अस्सी के दशक में दुनिया की बढ़ती आबादी के प्रति जागरूकता आई. संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने 1989 से हर 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के तौर पर मनाने का निर्णय लिया. उसके बाद हर साल दुनिया के सारे देश इस दिन बढ़ती आबादी के प्रति लोगों को जागरूक करते हैं.

25 साल पहले दुनिया को हुई बढ़ती आबादी की चिंता
पिछले साल वर्ल्ड पॉपुलेशन डे की थीम परिवार नियोजन थी. लेकिन इस बार कोई थीम नहीं रखी गई. यूएन ने फैसला लिया कि पहले 1994 के इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन पॉपुलेशन एंड डेवलपमेंट के बचे हुए कामों पर ध्यान दिया जाए. 25 साल पहले दुनिया के देशों ने फैसला लिया था कि लोगों को प्रजनन स्वास्थ्य और लैंगिक असमानता के प्रति लोगों को जागरूक बनाकर विकास की दिशा में आगे बढ़ा जाए.

बढ़ती जनसंख्या की वजह से प्राकृतिक संसाधनों में कमी आ रही है. ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज के पीछे दुनिया की बढ़ती आबादी का ही हाथ है. हमें खुद को बचाए रखने के साथ प्रकृति को बचाए रखने के प्रति भी काम करना होगा. आने वाली पीढ़ी को दुनिया की बढ़ती आबादी के खतरों से आगाह करना होगा.

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मुंबई सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है


1951 में भारत सरकार ने जनसंख्या के प्रति जागरूकता के कदम उठाए
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भारत ने इस दिशा में सबसे पहले 1951 में कदम उठाए. उस साल भारत ने नेशनल फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम की शुरुआत की. विकासशील देशों में भारत फैमिली प्लानिंग चलाने वाला पहला देश बना. इस प्रोग्राम का मकसद था कि भारत की जनता आबादी और उससे होने वाले दुष्परिणामों को समझें. लोग खुद फैसला करें कि उन्हें कितने बच्चे चाहिए ताकि वो उन पर पूरा ध्यान दे सकें और उनके प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें. इसमें सबसे बड़ी सफलता परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता से आई.
दुनिया का हर छठा आदमी भारत में रहता है

यूएन के डाटा के मुताबिक भारत की जनसंख्या 137 करोड़ है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ी आबादी वाला देश है. हालांकि क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का स्थान 7वां है. दुनिया का हर छठा आदमी भारत में निवास करता है. भारत की आबादी पिछले 40 साल में दोगुनी हो चुकी है. अगले कुछ साल में हम जनसंख्या के मामले में चीन को भी पछाड़ने वाले हैं. फिलहाल भारत की जनसंख्या 1.02 फीसदी की दर से बढ़ रही है. भारत में हर एक स्क्वायर किलोमीटर में 416 लोग रहते हैं. पॉपुलेशन डेंसिटी (जनसंख्या घनत्व) के हिसाब से भारत का दुनिया में 31वां स्थान है. मुंबई में आबादी का भार सबसे ज्यादा है. वहां हर स्क्वायर किलोमीटर में 21 हजार लोग रहते हैं.

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भारत की जनसंख्या कम होने में अभी 42 साल इंतजार करना होगा.


भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर
भारत में मुंबई सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है. 2011 की जनगणना के मुताबिक मुंबई की आबादी 1 करोड़, 25 लाख थी. दिल्ली का स्थान दूसरा है, जहां की आबादी करीब 1 करोड़ 11 लाख है. भारत में 50 शहर ऐसे हैं जिनकी आबादी 10 लाख से ज्यादा है. 1971 में मुंबई की आबादी 59 लाख थी
देश के बाकी बड़ी आबादी वाले शहरों में बेंगलुरु का भी नाम है. बेंगलुरु की आबादी करीब 84 लाख है. हैदराबाद की आबादी 68 लाख, वहीं अहमदाबाद की जनसंख्या 55 लाख है.

भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य
आबादी के लिहाज से यूपी सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला राज्य है. यहां देश के करीब 20 करोड़ लोग रहते हैं. सिक्किम सबसे छोटा राज्य है, जहां की आबादी 5 लाख के करीब है. यूपी के बाद देश के दो बड़े राज्य महाराष्ट्र और बिहार हैं. महाराष्ट्र की आबादी 11 करोड़ और बिहार की आबादी करीब 10 करोड़ है.
एक आंकड़े के मुताबिक जनसंख्या के मामले में हम 2024 तक चीन को पछाड़ देंगे. तब हमारी आबादी 144 करोड़ के करीब होगी. 2029 तक हमारी जनसंख्या 150 करोड़ को पार कर जाएगी. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि 2061 के बाद भारत की आबादी घटनी शुरू होगी. यानी आबादी कम होने के लिए हमें अभी भी 42 साल का इंतजार करना होगा.

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First published: July 11, 2019, 9:32 AM IST
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