World Red Cross Day 2021: कोरना काल में क्या अहमियत है रेड क्रॉस आंदोलन की

विश्व रेडक्रॉस दिवस (World Red Cross Day) पिछले 73 सालों से मनाया जा रहा है लेकिन रेड क्रॉस आंदोलन उससे भी बहुत पुराना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विश्व रेडक्रॉस दिवस (World Red Cross Day) पिछले 73 सालों से मनाया जा रहा है लेकिन रेड क्रॉस आंदोलन उससे भी बहुत पुराना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

रेड क्रॉस संगठन (Red Cross Organisation) ने जिस तरह से हर वैश्विक आपदाओं (Global Crises) में लोगों की मदद की है, उस लिहाज से आज कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के समय में रेड क्रॉस आंदोलन बहुत अधिक प्रासंगिक है.

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विश्व रेड क्रॉस दिवस (World Red  Cross Day) हर साल 8 मई को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस (Red Cross) और रेड क्रिसेंट आंदोलन के सिद्धांतों को याद करने के लिए मनाया जाता है. इस दिन लोग इस मानवतावादी संगंठन और उसकी ओर से मानवता की सहायता के लिए अभूतपूर्व योगदान के लिए श्रद्धांजलि देने के लिए याद करते हैं. आज कोविड-19 महामारी (Corona Pandemic) में रेड क्रॉस आंदोलन की अहमित और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है.

रेडक्रॉस की भूमिका

रेडक्रॉस सोसाइटी की अहमियत उसके इतिहास में छिपी है. स्विटजरलैंड के कारोबारी जीन हेनरी ड्यूनेंट 1859 में इटली में सॉल्फेरिनो का युद्ध देखा. जिसमें में बड़ी तादात में सैनिक मरे और घायल हुए थे. किसी भी सेना के पास घायल सैनिकों की देखभाल के लिए चिकित्सकीय व्यवस्था नहीं थी. ड्यूनेंट ने स्वंयसेवकों का एक समूह बनाया जिसने युद्ध में घायल जवानों तक खाना और पानी पहुंचाया. इतना ही नहीं समूह ने उनका इलाज कर उनके परिजनों को चिट्ठियां भी लिखीं.

सोसाइटी बनाने का विचार
इस घटना के 3 साल बाद हेनरी ने अपने अनुभव को एक किताब 'ए मेमोरी ऑफ सॉल्‍फेरिनो' की शक्‍ल देकर प्रकाशित कराया. पुस्तक में उन्होंने एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय सोसायटी की स्थापना का सुझाव दिया. ऐसी सोसायटी जो युद्ध में घायल लोगों का इलाज कर सके. जो किसी भी देश की नागरिकता के आधार पर नहीं बल्कि मानवीय आधार पर लोगों के लिए काम करे. उनके इस सुझाव पर अगले ही साल अमल किया गया.

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रेड क्रॉस सोसायटी (Red Cross Society) के संस्‍थापक जीन हेनरी ड्यूनेंट को 1901 में पहला शांति नोबेल पुरस्‍कार दिया गया था. (फाइल फोटो)

16 देशों ने अपनाया सिद्धांत



जिनेवा पब्लिक वेल्फेयर सोसायटी ने फरवरी 1863 में एक कमेटी का गठन किया. जिसकी अनुशंसा पर अक्टूबर 1863 में एक विश्व सम्मेलन किया गया. इसमें 16 राष्ट्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिसमें कई प्रस्तावों और सिद्धांतों को अपनाया गया. इसके बाद 1876 में कमेटी ने इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रास (ICRC) नाम अपनाया.

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प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध

आईसीआरसी का नाम प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में ज्यादा चर्चा में रहा. प्रथम विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद रेड क्रॉस संधि मनाने का प्रस्ताव लाया गया. युद्ध के दौरान और उसके बाद रेड क्ऱॉस ने 20 लाख यूद्धबंदियों की जानकारी का रिकॉर्ड अपने पास जमा किया. युद्ध के बाद रेडक्रॉस में बहुत से बदलाव आए. साल 1934 में टोक्यो में 15वीं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बहुत से संधि प्रस्तावों को माना गया. द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी का अलग रेड क्रॉस था जिसने अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस कमेटी को कोई सहयोग नहीं दिया था. वह लाखों युद्धबंदियों की जानकारी हासिल करने में नाकाम रही.

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रेड क्रॉस सोसायटी (Red Cross Society) ने प्रथम विश्व युद्ध में सबसे सराहनीय कार्य किया था. (फाइल फोटो)

1948 में मना पहला रेडक्रॉस दिवस

पहला रेडक्रॉस डे, हेनरी ड्यूनेंट के जन्मदिवस की सालगिरह  8 मई 1948 को मनाया गया जिन्हें साल 1901 में शांति का नेबेल पुरस्कार मिला था. यह दिवस आधिकारिक तौर पर 1984 में वर्ल्ड रेडक्रॉस और वर्ल्ड क्रिसेंट डे के रूप में मनाया जाने लगा. जिस तरह से रेडक्रॉस संस्था ने अपने लंबे इतिहास में बिना किसी एक देश के प्रति निष्ठा दिखाकर मानवता के प्रति निष्ठा दिखाई है, आज कोरोना महामारी में उसी की सबसे ज्यादा जरूरत है.

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आज भी सेवा को उसी तरह से तत्पर

आज जहां वैक्सीन बनाने वाले देशों से पेटेंट में छूट की मांग की जा रही है. यह साफ दिखाता है कि दुनिया को मानवता के लिए उसी तरह से एकजुट होना है जैसे के रेड क्रॉस सोसाइटी  होती है. कोरोना काल में चाहे मास्क या ग्लब्स बांटना हो या फिर ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता हासिल करना हो, रेडक्रॉस कोरोना के खिलाफ उसी तरह अपनी सेवाएं दे रही है जैसेवह युद्ध में देती है.

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