स्विट्जरलैंड में है दुनिया की सबसे धीमी गति की ट्रेन, ये है खासियत

स्विटजरलैंड की ऊंची पहाड़ियों पर ग्लेशियर एक्सप्रेस चलती है

स्विटजरलैंड की ऊंची पहाड़ियों पर ग्लेशियर एक्सप्रेस चलती है

नॉर्थ कोरिया से मॉस्को जा रहे रूसी राजनयिकों (Russian diplomate in North Korea) को फ्लाइट की बजाए लगभग 34 घंटों तक ट्रेन से यात्रा करनी पड़ी. इसके बाद से वहां की ट्रेन सुविधा का मजाक बन रहा है. हालांकि दुनिया की सबसे धीमी रफ्तार ट्रेन स्विट्जरलैंड (world's slowest train) में है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 8:29 AM IST
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उत्तर कोरिया फिर एक बार चर्चा में है. वहां रूस के राजनयिकों को अपने देश जाने के लिए हाथ से ढकेलने वाली ट्रॉली पर सामान रखकर निकलना पड़ा. इसके बाद से दोनों देशों के अच्छे संबंधों पर चर्चा करते हुए इस बात पर हैरानी जताई जा रही है कि आखिर डिप्लोमेट के साथ ऐसा कैसे हुआ. इस बीच कोरिया की धीमी गति की ट्रेन सर्विस की भी बात हो रही है. हालांकि दुनिया में सबसे धीमी गति की ट्रेन का दर्जा स्विट्जरलैंड की ग्लेशियर एक्सप्रेस को दिया गया है.

प्योंगयांग में स्थित रूसी दूतावास में तैनात 8 राजनयिकों को परिवार के साथ अपने वतन जाने के लिए रेललाइन के सहारे लगभग 34 घंटे की यात्रा करनी पड़ी. बता दें कि उत्तर कोरिया की रेल लाइन वैसे तो पूरे देश को एक कोने से दूसरे कोने तक जोड़ती है लेकिन यहां का मेंटेनेंस बहुत खराब है. ट्रेनें जगह-जगह रुकती रहती हैं और धीमी गति से चलती हैं. लेकिन ग्लेशियर एक्सप्रेस की धीमी गति के कारण उसे दुनिया की सबसे धीमी ट्रेन माना जाता है.

slow train
ऊंची पहाड़ियों के बीच इस ग्लेशियर एक्सप्रेस की शुरुआत साल 1930 में हुई थी




स्विट्जरलैंड की ऊंची पहाड़ियों पर ग्लेशियर एक्सप्रेस चलती है. ये जेरमार्ट और सेंट मॉर्रिट्ज स्टेशनों को जोड़ती है. कहने को ये एक्सप्रेस ट्रेन है, जिसकी रफ्तार सामान्य ट्रेनों से ज्यादा होनी चाहिए, लेकिन ऐसा है नहीं. ये लगभग 290 किलोमीटर की दूरी 10 घंटों में तय करती है. यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे धीमी रफ्तार वाली एक्सप्रेस ट्रेन कहा जाता है.
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ऊंची पहाड़ियों के बीच इस ग्लेशियर एक्सप्रेस की शुरुआत साल 1930 में हुई थी. शुरुआत में ट्रेन केवल गर्मियों के मौसम में चलती थी क्योंकि बर्फीली पहाड़ियों में कोई आता-जाता नहीं था. पहले इसमें पैंसेजर डिब्बे लगाए गए थे, जो काफी दिक्कत देने वाले थे. इसमें ऊंची पहाड़ियों के बीच गुजरते यात्रियों को टॉयलेट तक की सुविधा नहीं मिलती थी. धीरे-धीरे इसमें सुधार होता चला है. इस बीच ट्रेन की मालिक कंपनियां भी बदलीं.

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सबसे धीमी रफ्तार की ट्रेन होना वैसे तो किसी गर्व की बात नहीं लेकिन इसे ये दर्जा मिलने के बाद स्विस लोगों से लेकर दुनियाभर के पर्यटक इसी अनुभव को लेने आने लगे हैं. लगभग 290 किलोमीटर के रास्ते में जहां हरी-भरी या बर्फीली पहाड़ियां दिखती हैं, वहीं इस यात्रा के दौरान 91 सुरंगें और 291 ही पुल आते हैं. पहाड़ियों से गुजरते हुए कई बार ऊंची-नीची ढलानें आती हैं. ऐसे में यात्रियों को खास वाइन पेश की जाती है ताकि उन्हें पेट में दर्द या उल्टियों की शिकायत न हो.

fastest train
चीन की Shanghai Maglev ट्रेन सबसे तेज गति की ट्रेन है


ये तो रही दुनिया की सबसे धीमी गति वाली ट्रेन, वहीं तेज गति वाली कई ट्रेनें हैं, जिनकी स्पीड हैरान करती है. इनमें सबसे ऊपर है चीन की Shanghai Maglev ट्रेन. ये शंघाई एयरपोर्ट से लोंगयेंग स्टेशन के बीच चलती है. इसकी गति 431 किलोमीटर प्रति घंटा है यानी एक किलोमीटर की बात करें तो ये 9 सेकंड से भी कम समय में किलोमीटर की दूरी तय कर लेती है. इस ट्रेन में ट्रैक और रेल के बीच चुंबकीय ताकत का इस्तेमाल किया गया है , जो उसे इतना ताकतवर बनाता है.

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इसके बाद बारी आती है जापान की बुलेट ट्रेन की. जापान आधुनिक हाई-स्पीड ट्रेनों का जनक देश रहा. यहां की Shinkansen H5 नामक ट्रेन बुलेट ट्रेन है, जो टोक्यो से नागासाकी को जोड़ती है. अब इस ट्रेन के कई मॉडल आ चुके हैं, जो एक घंटे में लगभग 360 किलोमीटर का फासला तय करते हैं. इन ट्रेनों की खास बात ये है कि ये कई स्टेशनों पर रुकती हुई चलती हैं, इसके बाद भी इनकी गति इतनी ज्यादा है.
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