World UFO Day: भारत में भी कई बार देखी गई हैं उडनतश्तरियां, जानें कब और कहां

World UFO Day: भारत में भी कई बार देखी गई हैं उडनतश्तरियां, जानें कब और कहां
1950 मे पाल ट्रेंट ने अमेरिका में उड़नतश्तरी दिखने की एक फोटो खींची, जिसे तब मशहूर मैगजीन लाइफ ने प्रकाशित किया

दुनियाभर में तकरीबन रोज ही दुनिया के किसी कोने में उड़नतश्वरियों या आसमान में अजीबोगरीब गतिशील चीजें देखने की खबरें आती हैं. माना जाता है कि दूसरे ग्रह के लोग अक्सर पृथ्वी का जायजा लेने आते हैं. लंबे समय से वैज्ञानिक उनसे संपर्क करने की कोशिश भी कर रहे हैं. क्या एलियंस से मुलाकात होने का समय आ गया है

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इस साल कई बार दुनियाभर में उडनतश्तरी यानि यूएफओ देखे जाने की खबरें आई हैं. यहां तक अमेरिका की वायुसेना ने भी ऐसी ही तीन तस्वीरें पिछले दिनों जब जारी कीं तो ये दुनियाभर में वायरल हो गईं. अक्सर दुनिया में आसमान में उड़ती अजीबगरीब चीजों से रोशनी निकलने की भी खबरें हाल में पढ़ने को मिली हैं. वैसे अब  वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं कि गैलेक्सी में 30 से ऊपर ऐसे ग्रह हैं, जो पृथ्वी जैसे हैं, जहां जीवन हो सकता है. वैसे भारत में भी उडनतश्तरियां देखे जाने के तमाम मामले रहे हैं.

दुनियाभर में 02 जुलाई को वर्ल्ड यूएफओ डे के तौर पर मनाया जाता है. आकाश में उड़ती किसी अज्ञात वस्तु को यूएफओ (UFO) यानी अनआइडेंटीफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स कहा जाता है. प्रसिद्ध अंतरिक्ष विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग का कहना था कि जल्द ही एलियंस से हमारा आमना सामना होगा. हॉकिंग इसके लिए एक बहुत बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे.

क्या होते हैं यूएफओ?
आमतौर पर आसमान में उड़ती उड़नतश्तरी के आकार वाली वस्तु को यूएफओ (UFO) कहा जाता है. इनका आकार किसी डिस्क या तश्तरी सरीखा होता है. कई चश्मदीद गवाहों के अनुसार, यूएफओ को जब भी देखा गया तब उनके साथ तेज प्रकाश भी देखा गया. इनमें बहुत गतिशीलता होती है.
कब से नजर आ रहे हैं?


1920 के दशक में अचानक ऐसे मामले बहुत ज्यादा हो गए जबकि आकाश में चमकदार उड़नतश्तरियां नजर आईं. वैसे प्राचीन काल से आसमान में यूएफओ देखे जाने की बात कही जाती रही है. 40 के दशक में माना गया कि उड़नतश्तरी जैसी चीजें सोवियत संघ की देन हैं. ये उनके खास आकार वाले विमान हैं, जो दुनियाभर में नजर आते हैं.

अमेरिका ने इन पर नजर रखने के लिए अलग विंग ही बना दी

बाद में लगने लगा कि इनका संबंध वाकई पृथ्वी नहीं, बल्कि दूसरे ग्रह के लोगों से हो सकता है. वर्ष 1948 में अमेरिकी वायुसेना ने इन पर नजर रखने के लिए एक विंग ही बना दी. 50 सालों से कहीं ज्यादा समय तक ब्रिटेन की गुप्तचर एजेंसी एमआई5 इनकी पड़ताल करती रही. लेकिन बहुत कुछ हाल लगा नहीं.

पिछली सदी में जब यूएफओ देखने की घटनाएं बढ़ने लगीं तो अमेरिका ने इस पर नजर रखने के लिए एक अलग विंग ही बना दी


भारत में इन्हें एक नहीं कई बार देखा गया

हां, भारत में भी कई बार इनके देखे जाने के दावे किए गए हैं, लेकिन ना तो उनकी प्रामाणिकता साबित हो पाई और ना ही उसकी पुष्टि हुई.

वर्ष 1951-15 मार्च को सुबह 10.20 मिनट पर नई दिल्ली में 25 सदस्यों के फ्लाइंग क्लब को आकाश में सिगार के शक्ल की कोई चीज आसमान में उड़ती नजर आई. जो करीब सौ फीट लंबी थी. ये पहले पास में ही दिखी और फिर देखते ही देखते गायब हो गई.

वर्ष 2008- 29 अक्टूबर को कोलकाता में लोगों ने रात 03.30 बजे से सुबह 06.30 बजे के बीच आसमान में तेजी से घूमती हुई चीज देखी. हैंडीकैम से इसे कैमरे में कैच किया गया. पहले इसका आकार गोलाकार दिखा, फिर से तिकोना हुआ और फिर सीधी लाइन में बदल गया. ये चीज एक चमकदार रोशनी छोड़ती चली गई. इसे कई लोगों ने देखा. इसे देखने के लिए भीड़ भी लग गई. इस वीडियो को टीवी न्यूज चैनल्स पर चलाया गया. बाद में कोलकाता के एमपी बिरला प्लेनेटोरियम के डायरेक्टर डॉक्टर डीपी दुरई ने जब इसे देखा तो इसे काफी दिलचस्प और अजीब सा बताया. बाद में डॉक्टर डीपी दुरई ने इसे शुक्र ग्रह बताया तेजी से
-  वर्ष 2008 में यूएफओ के बिजनौर में देखे जाने का दावा किया गया.

वर्ष 2013 - चेन्नई में मोगाप्पियर के निवासियों ने 20 जून को रात 08.55 को आकाश में नारंगी रंग में चमकती चीज देखी. इसे 23 जून को स्थानीय अखबारों ने भी छापा.
- लद्दाख में चीन से लगी सीमा पर वर्ष 2013 में चार अगस्त को सेना ने आसमान में उड़ती हुई गोल चीज देखी, जो पीली रोशनी के साथ थी. वो वहां पांच घंटे तक नजर आती रही.

वर्ष 2014 -- अहमदबाद के पास आसमान में 26,300 फुट की ऊंचाई पर जेट एयरवेज की महिला पायलट महिमा चौधरी ने एक चमकदार यूएफओ देखने का दावा किया. उसका दावा था कि ऑब्जेक्ट का रंग हरा और सफेद था. ये फ्लाइट पुणे से अहमदाबाद जा रही थी.
- इसी साल लखनऊ के अमित त्रिपाठी ने जुलाई में बालकनी से सूरज के नजदीक एक चमकीला ऑब्जेक्ट देखा. जिसे उन्होंने सेलफोन में फोटो के तौर पर कैद भी किया. उनका दावा था कि ये ऑब्जेक्ट लगभग 40 मिनट तक चमकता रहा.
- वर्ष 2014 में 11 जुलाई को गुवाहाटी, 12 जुलाई को शामली और 14 जुलाई को टुंडला में यूएफओ देखे जाने की खबर फैली

UFO
भारत के आसमान में अगर कई बार ऐसी चीजें नजर आ चुकी हैं तो हमारे पड़ोसी देशों में भी उन्हें देखे जाने के दावे किए गए हैं. श्रीलंका में भी ऐसा ही दावा किया गया था.


जब विमान उड़ा रहे पायलटों ने उड़नतश्तरियां देखने की बात कही

इंटरनेशनल स्पेश स्टेशन के वैज्ञानिकों ने करीब एक महीना पहले ऐसी दो उड़नतश्तरियों के स्टेशन के पास मंडराने की बात कही. इसके बाद अमेरिका में कैलिफोर्निया के ऊपर आसमान से गुजरते हुए एक विमान के पायलट ने यूएफओ देखने की बात कही. कैलिफोर्निया के ऊपर से जो विमान मैक्सिको की ओर जा रहा था उसमें विमान के दोनों पायलट्स ने दक्षिणी एरिजोना में एक उड़ती हुई चीज देखा थी. दोनों पायलट्स की एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से हुई बातचीत का ऑडियो जारी किया गया. दोनों फ्लाइट्स करीब 40,000 फीट की ऊंचाई पर थीं. पुष्टि तो खैर इनमें से किसी भी बात की नहीं हुई. कई बार यूएफओ देखे जाने की बात कही गई है.

कुल घटनाएं
पिछले कुछ दशकों में यूएफओ ऑर्गनाइजेशन ने उड़नतश्तरी देखे जाने के करीब 14000 मामले दर्ज किए हैं. दुनियाभर में चीन से लेकर अमेरिका तक ऐसी घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं. कुछ लोगों ने इनकी तस्वीरें भी खींची. इस साल भी कई बार इन्हें देखा गया. ये मीडिया में सुर्खियां भी बनीं. ब्रिटेन में तो कुछ समाचार पत्र ऐसे भी हैं, जो रोज इनकी खबरें जरूर छापते हैं कि इन्हें अब दुनिया में कहां देखा गया.

कभी कभी बादल भी इस तरह का आकार ले लेते हैं कि आसमान में उडनतश्तरी सरीखे लगने लगते हैं


क्या संपर्क होगा?
वैज्ञानिक अब कहने लगे हैं कि अगले एक डेढ़ दो दशकों में एलियन से पृथ्वीवासियों का या तो संपर्क हो पाएगा या उनसे मिलना संभव हो जाएगा. इंसान बरसों से एलियन की तलाश कर रहा है. कभी उसकी तलाश के लिए दूरबीन की मदद ली जाती है, तो कभी अंतरिक्ष में दूरबीन और यान भेजकर उसे तलाशा जाता रहा है. बहुत दिनों से धरती से रेडियो तरंगें भी भेजी जा रही हैं.

कहां से आते हैं एलियंस?
नासा और दूसरी बड़ी स्पेस एजेंसियों का मानना है कि मंगल पर पहले जीवन था. उनका ये भी कहना है कि हमारे इसी सौरमंडल से ही आते हैं एलियंस. नासा के ग्रह विज्ञान विभाग का कहना है कि सौर मंडल में चार जगहों पर संभावित जीवन हो सकता है. उनका तयशुदा तरीके से मानना है कि मंगल पर पहले जरूर जीवन रहा होगा. इसके अलावा तीन उपग्रहों टाइटन, यूरोपा और एनसेलडस पर जीवन की संभावना है.

अमेरिका के रोसवेल में उड़नतश्तरी दिखने की खबर अखबारों में भी छा गई थी


एलियंस अगर हुए तो ..
इसको लेकर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की बातें कही जाती हैं. प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक स्वर्गीय स्टीफन हॉकिंग सावधान कर गए हैं कि जिस दिन हमारा एलियंस से आमना सामना हो गया, उस दिन हो सकता है कि वो पृश्वी पर नियंत्रण करना चाहें. खैर जो भी हो लेकिन ऐसा लगता है कि पृथ्वीवासियों का मुकाबला जल्दी ही गैलेक्सी के किसी उन्नत सभ्यता वाले ग्रह के निवासियों से हो सकता है.
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